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MP Property Registry Digital योजना: घर बैठे डाउनलोड करें 25 साल पुरानी रजिस्ट्री, 50 लाख दस्तावेज होंगे ऑनलाइन, मिलेगी सत्यापित प्रति

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Published On: 13 November 2025
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MP Property Registry Digital: अब घर बैठे डाउनलोड करें 25 साल पुरानी रजिस्ट्री, 50 लाख से अधिक दस्तावेज होंगे ऑनलाइन उपलब्ध

भोपाल | मध्यप्रदेश समाचार | 13 नवंबर 2025


मध्यप्रदेश सरकार ने संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराने की बड़ी पहल शुरू की है। अब प्रदेश के नागरिकों को अपनी 2000 से 2015 तक की पुरानी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार इन सभी मैन्युअल रजिस्ट्रियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर रही है, जिससे लोग घर बैठे अपनी पुरानी रजिस्ट्री डाउनलोड कर सकेंगे।

यह व्यवस्था प्रदेशभर में 50 लाख से अधिक मैन्युअल रजिस्ट्रियों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

अब 2000 से 2015 तक की रजिस्ट्री ऑनलाइन उपलब्ध

राज्य सरकार की इस पहल के तहत 2000 से 2015 के बीच की सभी रजिस्ट्रियाँ डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। पहले यह रिकॉर्ड केवल संबंधित तहसील या रजिस्ट्री कार्यालयों में ही मौजूद होता था, जहाँ से सत्यापित प्रति प्राप्त करने में हफ्तों लग जाते थे।

अब यह सारी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी। नागरिकों को बस अपनी रजिस्ट्री की बुनियादी जानकारी भरनी होगी और 300 रुपए शुल्क का भुगतान करके सत्यापित प्रति डाउनलोड की जा सकेगी।

चरणबद्ध तरीके से 50 लाख रजिस्ट्री होगी डिजिटल

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में कुल 50 लाख से अधिक मैन्युअल रजिस्ट्रियों को डिजिटल डेटा में बदला जा रहा है। यह कार्य राजस्व विभाग और पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है।

पहले चरण में जिन जिलों की रजिस्ट्री को डिजिटल किया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:

  • भोपाल: लगभग 4 लाख रजिस्ट्री

  • इंदौर: करीब 5 लाख रजिस्ट्री

  • ग्वालियर: लगभग 2 लाख रजिस्ट्री

  • जबलपुर: करीब 2 लाख रजिस्ट्री

इन जिलों के बाद दूसरे चरण में अन्य जिलों के रिकॉर्ड को भी जोड़ा जाएगा।

 2010 तक का डेटा पहले से ऑनलाइन

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, 2010 तक की अधिकांश रजिस्ट्री पहले ही ऑनलाइन की जा चुकी है, जबकि 2015 तक के रिकॉर्ड को सॉफ्टवेयर में फीड करने की प्रक्रिया जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में 1995 तक की सभी रजिस्ट्री भी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जाए।

अभी तक लगभग 2 लाख 60 हजार पुरानी रजिस्ट्री डिजिटल की जा चुकी हैं, जिनमें भोपाल की 43 हजार रजिस्ट्री शामिल हैं।

संपदा सॉफ्टवेयर से हुई ई-रजिस्ट्री की शुरुआत

अगस्त 2015 में ई-रजिस्ट्री प्रणाली लागू होने के बाद से मध्यप्रदेश में संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया और पारदर्शी बनी है।
‘संपदा सॉफ्टवेयर (Sampada Software)’ के जरिए सर्विस प्रोवाइडर स्लॉट बुक करते हैं और रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संपन्न होती है।

नई व्यवस्था से दो बड़े फायदे हुए हैं —

  1. फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी के मामलों में भारी कमी।

  2. नागरिकों का समय और धन दोनों की बचत।

अब इस पहल को और आगे बढ़ाते हुए सरकार पुराने रिकॉर्ड को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ रही है।

300 रुपए में मिलेगी सत्यापित प्रति

डिजिटल रजिस्ट्री की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि नागरिक घर बैठे 300 रुपए शुल्क देकर अपनी रजिस्ट्री की सत्यापित प्रति डाउनलोड कर सकेंगे।

पहले नागरिकों को रजिस्ट्री कार्यालय जाकर आवेदन देना पड़ता था और दस्तावेज की प्रति मिलने में कई दिन लग जाते थे। नई व्यवस्था से समय, श्रम और पारदर्शिता तीनों में सुधार आएगा।

15 साल पुराना रिकॉर्ड अब ऑनलाइन सर्च में

डिजिटल रजिस्ट्री परियोजना के तहत अब तक 15 साल पुराने दस्तावेजों की सर्च रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा चुकी है। लोग अपनी संपत्ति से संबंधित जानकारी, स्वामित्व, रजिस्ट्री नंबर, तारीख और खरीदार-बेचने वाले के नाम तक की जानकारी ऑनलाइन सर्च कर सकते हैं।

सरकार की योजना है कि अगले चरण में 30 साल पुराने रिकॉर्ड को भी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाए ताकि नागरिकों को संपत्ति सत्यापन में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

क्यों जरूरी है रजिस्ट्री का डिजिटलकरण?

पुराने समय में रजिस्ट्री की प्रतियां केवल कागज़ी रूप में होती थीं।
इनमें से कई दस्तावेज़ नष्ट, क्षतिग्रस्त या खो जाने के खतरे में रहते थे।
डिजिटल फॉर्मेट में रिकॉर्ड आने से यह डेटा सुरक्षित और स्थायी रूप से संरक्षित रहेगा।

इसके अलावा, डिजिटल रिकॉर्ड से –

  • कानूनी विवादों में प्रमाणिकता बढ़ेगी

  • बैंक लोन या संपत्ति बिक्री में त्वरित सत्यापन संभव होगा

  • भूमि और मकान के स्वामित्व की पारदर्शिता बढ़ेगी

 प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम

मध्यप्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में कई अहम कदम उठा रही है।
राज्य के राजस्व, भूमि, संपत्ति और पंजीयन से जुड़े अधिकांश काम अब ऑनलाइन माध्यम से किए जा रहे हैं।

रजिस्ट्री डिजिटल होने के बाद नागरिकों को न केवल सुविधा मिलेगी, बल्कि यह प्रणाली फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में भी मदद करेगी।

आगे का लक्ष्य – 1995 तक का पूरा डेटा ऑनलाइन

राज्य सरकार की दीर्घकालिक योजना है कि आने वाले दो वर्षों में 1995 तक की सभी रजिस्ट्री रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाए।
इसके बाद नागरिकों को किसी भी संपत्ति की जानकारी या दस्तावेज़ के लिए कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

यह कदम प्रदेश को पूर्णत: ई-गवर्नेंस स्टेट बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

नागरिकों के लिए बड़ा लाभ

  • घर बैठे रजिस्ट्री डाउनलोड सुविधा

  • पुराना रिकॉर्ड खोने का डर खत्म

  • कोर्ट केस या बैंक कार्य में तुरंत प्रमाण उपलब्ध

  • समय और पैसे की बचत

  • सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता

निष्कर्ष

MP Property Registry Digital योजना मध्यप्रदेश के नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।
अब किसी को तहसील या रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं।
सिर्फ कुछ क्लिक में 15 से 25 साल पुरानी संपत्ति की रजिस्ट्री ऑनलाइन डाउनलोड की जा सकेगी।

सरकार का लक्ष्य इस परियोजना के माध्यम से प्रदेश को पूरी तरह डिजिटल रजिस्ट्री सिस्टम की दिशा में ले जाना है, जिससे पारदर्शिता, सुरक्षा और सुविधा — तीनों का समन्वय हो सके।

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