MP में प्रमोशन को लेकर फिर बढ़ा विवाद, 31 जुलाई तक पदोन्नति की तैयारी के बीच हाई कोर्ट पहुंचा सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संगठन
MP में करीब एक दशक से लंबित सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार ने नई प्रमोशन पॉलिसी-2025 के तहत सभी विभागों को 31 जुलाई 2026 तक पदोन्नति आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकें भी शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, सरकार की इस पहल के साथ ही विवाद भी गहरा गया है। सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए जबलपुर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
संगठन का कहना है कि जब पदोन्नति नियमों की वैधता से जुड़े मामले पहले से न्यायालय में लंबित हैं, तब सरकार द्वारा नई पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं है। हाई कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 7 जुलाई की तारीख निर्धारित की है, जहां संगठन सरकार की पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक (स्टे) लगाने की मांग करेगा।
सरकार ने तय की समयसीमा
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 15 जुलाई तक विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें पूरी कर ली जाएं। इसके बाद पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार कर 31 जुलाई तक पदोन्नति आदेश जारी किए जाएं।
सरकार का मानना है कि लंबे समय से पदोन्नतियां रुकी होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हजारों वरिष्ठ पद खाली पड़े हैं, जिससे विभागों के कामकाज पर असर पड़ रहा है। पदोन्नति होने के बाद निचले पद भी रिक्त होंगे, जिन पर नई भर्ती का रास्ता खुलेगा।
10 साल से रुकी हुई थी पदोन्नति प्रक्रिया
MP में मई 2016 से नियमित पदोन्नति प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है। इस दौरान आरक्षण और पदोन्नति नियमों को लेकर विभिन्न संगठनों ने अदालत का रुख किया, जिसके चलते मामला लगातार न्यायिक प्रक्रिया में बना रहा।
इन दस वर्षों में हजारों अधिकारी और कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। वहीं कई विभागों में उच्च पद खाली रहने से प्रशासनिक निर्णय लेने और योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने नई प्रमोशन पॉलिसी लागू कर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला लिया।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया
नई प्रमोशन पॉलिसी-2025 के तहत सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी पदोन्नति देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। फ्लोर सुपरवाइजर और जमादार जैसे पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग इस संबंध में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक भी आयोजित कर चुका है। सरकार का कहना है कि इससे लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और सेवा संरचना अधिक प्रभावी बनेगी।
संगठन ने जताई आपत्ति
सरकार की इस पहल का सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संगठन ने विरोध किया है। संगठन का कहना है कि पदोन्नति नियमों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले अभी भी हाई कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में अंतिम न्यायिक निर्णय आने से पहले पदोन्नति आदेश जारी करना भविष्य में प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
संगठन ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि यदि सरकार अभी पदोन्नति करती है और बाद में न्यायालय का फैसला अलग आता है, तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों की पदोन्नतियां निरस्त करनी पड़ सकती हैं। इससे विभागों में अस्थिरता और कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ सकता है।
7 जुलाई को होगी अहम सुनवाई
जबलपुर हाई कोर्ट ने संगठन की याचिका स्वीकार करते हुए 7 जुलाई को सुनवाई तय की है। इस दौरान याचिकाकर्ता सरकार द्वारा शुरू की गई पदोन्नति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करेगा।
यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यदि कोर्ट स्टे देता है तो सरकार की 31 जुलाई तक पदोन्नति पूरी करने की योजना प्रभावित हो सकती है। वहीं यदि कोर्ट रोक नहीं लगाता तो विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ेगी।
पदोन्नति समिति करेगी अंतिम फैसला
नई प्रमोशन पॉलिसी-2025 के तहत सरकार ने विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक समिति गठित की है।
समिति में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव सुभाष द्विवेदी को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा उप सचिव शैलेंद्र कुमार हनोतिया स्थापना प्रतिनिधि सदस्य, अवर सचिव सचिंद्र राव अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधि तथा अवर सचिव मनोज श्रीवास्तव को संयोजक सदस्य नियुक्त किया गया है।
यह समिति पात्र कर्मचारियों के सेवा अभिलेख, वरिष्ठता सूची, गोपनीय चरित्रावली (ACR) तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा कर पदोन्नति के लिए अंतिम मंजूरी देगी। समिति की अनुशंसा के बाद संबंधित विभाग पदोन्नति आदेश जारी करेंगे।
लाखों कर्मचारियों की निगाहें फैसले पर
राज्य सरकार की योजना के अनुसार इस प्रक्रिया से करीब 4.50 लाख सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल सकता है। पदोन्नति के बाद बड़ी संख्या में निचले पद रिक्त होंगे, जिससे नई भर्ती की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
दूसरी ओर, न्यायालय में लंबित मामलों के कारण कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है। कई कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ कर्मचारी संगठनों को आशंका है कि जल्दबाजी में उठाया गया कदम भविष्य में विवाद का कारण बन सकता है।
सरकार और संगठन आमने-सामने
फिलहाल सरकार प्रशासनिक जरूरतों का हवाला देकर पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के पक्ष में है, जबकि कर्मचारी संगठन कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक प्रक्रिया रोकने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अब सभी की नजरें 7 जुलाई को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के फैसले से यह तय होगा कि मध्यप्रदेश में वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी होगी या फिर एक बार फिर कानूनी अड़चनों में उलझ जाएगी।
