MP News: नर्सिंग के 30 हजार छात्रों को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने लगाई रोक
MP में नर्सिंग छात्रों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। लगभग 30 हजार से अधिक छात्रों की परीक्षाओं पर फिलहाल रोक लग गई है। यह फैसला मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान लिया गया।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक अदालत से अनुमति नहीं मिलती, तब तक नर्सिंग परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकतीं। इस आदेश के बाद 28 अप्रैल से प्रस्तावित परीक्षाएं फिलहाल टल गई हैं, जिससे हजारों छात्रों की चिंता बढ़ गई है।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अविनेंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि नर्सिंग काउंसिल को किसी भी परीक्षा आयोजन से पहले उच्च न्यायालय की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अपात्र (अयोग्य) घोषित किए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को पात्र कॉलेजों में स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।
800 में से 600 कॉलेजों में गड़बड़ी का खुलासा
यह पूरा मामला लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। इसमें आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2020-21 में प्रदेश में बड़ी संख्या में फर्जी नर्सिंग कॉलेज खोले गए।
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि MP के लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेजों में गंभीर कमियां पाई गईं।
इन कमियों में शामिल हैं:
- आवश्यक भवन सुविधाओं की कमी
- प्रयोगशाला (लैब) का अभाव
- लाइब्रेरी न होना
- योग्य और अनुभवी शिक्षक न होना
- 100 बेड वाले अस्पताल की अनिवार्य सुविधा का अभाव
कई कॉलेज केवल कागजों पर संचालित
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई नर्सिंग कॉलेज केवल कागजों पर ही संचालित हो रहे थे। यानी जमीनी स्तर पर उनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था।
इसके अलावा एक और गंभीर खुलासा हुआ कि कुछ प्रिंसिपल और शिक्षक एक ही समय में 10 से 15 कॉलेजों में नियुक्त दिखाए गए थे, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है।
छात्रों की परीक्षाओं पर संकट
28 अप्रैल से नर्सिंग की परीक्षाएं शुरू होनी थीं, लेकिन अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद इन पर रोक लग गई है। इससे हजारों छात्र असमंजस में हैं कि उनकी परीक्षाएं कब होंगी।
नर्सिंग काउंसिल को अब पहले अदालत में आवेदन देना होगा और कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद ही नई तारीखों पर निर्णय लिया जाएगा।
पात्र और अपात्र कॉलेजों का मुद्दा
हाई कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि जिन छात्रों का एडमिशन अपात्र कॉलेजों में हुआ है, उन्हें पात्र कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाए। इससे छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
अगली सुनवाई 28 अप्रैल को
इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होगी। इसी दिन यह तय होगा कि परीक्षाएं कब और किन शर्तों के साथ आयोजित की जाएंगी।
कोर्ट के इस आदेश के बाद साफ हो गया है कि नर्सिंग परीक्षा प्रक्रिया अब पूरी तरह न्यायालय की निगरानी में रहेगी।
छात्रों और अभिभावकों में चिंता
इस फैसले के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता का माहौल है। कई छात्र महीनों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब अचानक परीक्षा टलने से उनकी पढ़ाई और करियर पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
MP में नर्सिंग शिक्षा से जुड़े इस बड़े फर्जीवाड़े ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाई कोर्ट का यह फैसला जहां व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं हजारों छात्रों के लिए अस्थायी परेशानी का कारण भी बन गया है। अब सभी की नजर 28 अप्रैल की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।
