MP News: भारी विरोध के बाद ओंकारेश्वर में ‘ममलेश्वर लोक’ प्रोजेक्ट निरस्त, ब्रह्मपुरी विस्थापन पर उभरी जनभावनाओं ने बदला फैसला
मध्यप्रदेश की प्रमुख तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में प्रस्तावित ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध ने आखिरकार बड़ा असर दिखाया है। स्थानीय लोगों के दबाव, नगर बंद और व्यापक प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट निरस्त करने का फैसला लिया है। यह निर्णय ठीक उस समय आया है जब ब्रह्मपुरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होने वाले विस्थापन को लेकर निवासियों में तीव्र आक्रोश बढ़ता जा रहा था।
ओंकारेश्वर, जो नर्मदा तट पर स्थित देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है, यहां लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। इस धार्मिक नगरी में प्रस्तावित 119 करोड़ रुपये की ममलेश्वर लोक परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र को पर्यटन और आध्यात्मिक विकास से जोड़ना था। लेकिन प्रोजेक्ट का स्थान चिन्हित किए जाने के बाद ही विवाद शुरू हो गया। स्थानीय निवासियों ने साफ कहा कि वे अपनी पूर्वजों की भूमि नहीं छोड़ेंगे और ममलेश्वर लोक योजना यदि बनाना है तो किसी वैकल्पिक स्थान पर बनाई जाए।
तीन दिवसीय ओंकारेश्वर नगर बंद ने बदली स्थिति
सोमवार से शुरू हुए ओंकारेश्वर नगर बंद ने पूरा माहौल बदल दिया। नगर के लोगों ने सर्वसम्मति से बंद को सफल बनाने में सहयोग दिया।
- सभी दुकानें
- बाजार
- नाव संचालन
- गेस्ट हाउस
-
ऑटो-टेम्पो सेवा
— सब कुछ पूर्ण रूप से बंद रहा।
तीर्थनगरी में इस तरह का पूर्ण बंद बहुत दुर्लभ माना जाता है, लेकिन इस बार लोगों के मन में अपनी जमीन और अस्तित्व को बचाने की चिंता ने आंदोलन को बड़ा बना दिया। बंद का असर सोमवार को तो दिखा ही, मंगलवार को भी पूरा नगर लगभग ठप रहा। इससे साफ संकेत मिल गया कि ममलेश्वर लोक योजना को लेकर जनता गंभीर है और जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती, आंदोलन और उग्र हो सकता है।
ब्रह्मपुरी क्षेत्र में विस्थापन का मुद्दा बना केंद्र में
ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को लेकर सबसे अधिक विवाद ब्रह्मपुरी क्षेत्र में होने वाले संभावित विस्थापन को लेकर था। सर्वे कार्य के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में घर, दुकानें और प्राचीन बस्तियां इस प्रोजेक्ट की जद में आएंगी। लोगों ने इसे अपनी पहचान, परंपरा और आजीविका पर संकट बताते हुए विरोध शुरू किया।
स्थानीय नागरिकों का कहना था कि—
- यह क्षेत्र वर्षों से बसा हुआ है
- परिवारों का आजीविका स्रोत यहीं है
- धार्मिक और सांस्कृतिक संरचनाएं यहां मौजूद हैं
- विस्थापन उनके जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर देगा
इस वजह से लोगों ने मांग की कि प्रशासन प्रोजेक्ट के स्थान को बदलकर किसी ऐसे इलाके का चयन करे जहां स्थानीय बस्ती को नुकसान न हो।
अपर कलेक्टर ने माना—जनता की भावनाएं महत्वपूर्ण
प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर ने कहा कि ममलेश्वर क्षेत्र में प्रोजेक्ट बनाए जाने का प्रस्ताव था और इसी लिए हाल ही में सर्वे कार्य किया गया था। लेकिन जैसे ही नगर बंद और विरोध शुरू हुआ, प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया।
अपर कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि—
“जनता की भावनाएं सर्वोपरि हैं। इसलिए वर्तमान स्थान पर ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को तत्काल निरस्त किया जाता है। यदि भविष्य में जनता की सहमति से किसी अन्य स्थान पर प्रोजेक्ट आवश्यक लगा, तो उस पर भी सामूहिक सहमति से ही निर्णय होगा।”
यह बयान दर्शाता है कि प्रशासन अब किसी भी निर्णय में जनभावनाओं को प्राथमिकता देगा।
119 करोड़ रुपये का था प्रस्तावित ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में मध्यप्रदेश शासन द्वारा सिंहस्थ 2028 से पहले ओंकारेश्वर में यह भव्य निर्माण करने की योजना थी।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएँ —
- तीर्थ क्षेत्र का सौंदर्यीकरण
- आधुनिक सुविधाओं का विकास
- घाटों का पुनर्निर्माण
- आगंतुकों के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर
- धर्म एवं संस्कृति से जुड़े आकर्षक निर्माण
यह कुल मिलाकर 119 करोड़ रुपये का विशाल प्रोजेक्ट था। लेकिन इसका विरोध बढ़ता गया, खासकर तब जब सर्वे कार्य के दौरान विस्थापन की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर भी लगातार इस विषय पर चर्चाएं बढ़ीं और आम जनता प्रशासन से जवाब मांग रही थी।
विरोध क्यों हुआ?
ममलेश्वर लोक योजना के विरोध के कुछ प्रमुख कारण—
- विस्थापन का बड़ा खतरा — ब्रह्मपुरी क्षेत्र के सैकड़ों परिवार प्रभावित होने वाले थे।
- आजिविका पर संकट — दुकानदारों, नाव संचालकों और स्थानीय व्यवसायियों की आमदनी प्रभावित होती।
- धार्मिक परंपरा का सवाल — प्राचीन ममलेश्वर मंदिर और उसके आसपास की असली पहचान बिगड़ने की चिंता।
- जनता से परामर्श नहीं — लोगों ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट उनकी सहमति के बिना लागू किया जा रहा था।
नगर बंद की ताकत: जनता की जीत
ओंकारेश्वर नगर बंद का व्यापक असर प्रशासन को यह संदेश देने में सफल रहा कि जनता सिर्फ विरोध नहीं कर रही, बल्कि यह मुद्दा उनकी अस्तित्व से जुड़ा है।
- बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण था
- नागरिकों की एकता साफ दिखी
- युवा, व्यापारी, वृद्ध—सभी शामिल हुए
तीर्थनगरी में इस तरह का एकजुट आंदोलन प्रशासन के लिए एक बड़ा संकेत था।
अब आगे क्या?
प्रोजेक्ट निरस्त होने के बाद अब प्रशासन यह विचार करेगा कि यदि भविष्य में ममलेश्वर लोक योजना को अन्य किसी स्थान पर विकसित किया जाए, तो वह सभी पक्षों की सहमति से ही हो।
संभावित भविष्य की दिशा—
- नया वैकल्पिक स्थान तलाशना
- स्थानीय निवासियों से विस्तृत चर्चा
- संभावित बदलावों पर सर्वसम्मति
- पर्यटन विकास और मौजूदा बस्तियों की सुरक्षा, दोनों का संतुलन
यह भी संभव है कि सरकार सिंहस्थ के मद्देनजर किसी अन्य योजना को प्राथमिकता दे।
निष्कर्ष
ओंकारेश्वर में ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट निरस्त होना स्थानीय जनता की एकजुटता और लोकतांत्रिक शक्ति का प्रतीक है। इस मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि विकास महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की भावनाओं और मूल अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकता।
अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि प्रशासन आगे किस स्थान पर और किस तरह ममलेश्वर लोक जैसी योजना को आगे बढ़ाता है, ताकि तीर्थनगरी का विकास भी हो और स्थानीय रहवासियों का अस्तित्व भी सुरक्षित रहे।
