MP में ड्रग्स का कारोबार बढ़ा: 2 साल में 6,161 केस इंटरनेशनल कनेक्शन भी सामने आया
MP: मध्य प्रदेश ड्रग्स और नशे के कारोबार के मामले में तेजी से बढ़ते केंद्र के रूप में उभरता जा रहा है। राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की जांच और कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में MD ड्रग्स, मेफेड्रोन और अन्य अवैध नशीले पदार्थों की फैक्ट्रियों और तस्करी का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। जनवरी 2023 से अक्टूबर 2024 तक 6,161 मामले दर्ज किए गए और इस दौरान 7,886 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश का जियोग्राफिकल लोकेशन इसे न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ड्रग्स तस्करी के लिए उपयुक्त बनाता है। राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसी पड़ोसी सीमाओं के कारण राज्य से ड्रग्स का कारोबार अन्य राज्यों में आसानी से फैलता है।
ड्रग्स का इंटरनेशनल कनेक्शन
जांच में यह सामने आया है कि मध्य प्रदेश का ड्रग नेटवर्क केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है। कई सौदागर अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन से जुड़े हैं। दुबई और तुर्की जैसे देशों से जुड़े नेटवर्क डार्कनेट और क्रिप्टोकरेन्सी का उपयोग करके ड्रग्स का कारोबार कर रहे हैं। इस तरह मध्य प्रदेश के भीतर चल रहे MD ड्रग्स और मेफेड्रोन जैसे नशीले पदार्थों का कारोबार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों और क्रिप्टोकरेन्सी के जरिए ड्रग्स की लेनदेन की प्रक्रिया को छुपाना आसान हो गया है। नतीजतन, स्थानीय और केंद्रीय एजेंसियों के लिए तस्करों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
बड़ी कार्रवाई और जब्ती की घटनाएं
मध्य प्रदेश में पिछले दो साल में कई बड़ी कार्रवाई हुई हैं, जिनमें ड्रग्स के भंडार और अवैध फैक्ट्रियों का खुलासा हुआ। इनमें से प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
- आगर-मालवा, जनवरी 2026: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) ने ‘तीर्थ नर्सरी’ में चल रही अवैध लैब पर छापा मारा। यहाँ से 50 करोड़ रुपये मूल्य की 31 किलो MD ड्रग्स और 600 किलो केमिकल जब्त किए गए।
- नीमच, नवंबर 2025: नारकोटिक्स विंग ने रामपुरा क्षेत्र में ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। यहां से 30 करोड़ रुपये मूल्य की MD ड्रग्स (ठोस और लिक्विड) जब्त की गई।
- भोपाल, अगस्त 2025: डीआरआई ने अवैध ड्रग फैक्ट्री पकड़ी। इस कार्रवाई में 92 करोड़ रुपये मूल्य की मेफेड्रोन जब्त की गई और 7 लोग गिरफ्तार हुए।
- नागपुर बॉर्डर, जनवरी 2026: ओडिशा से मध्य प्रदेश जा रहे एक ट्रक से 2.6 करोड़ रुपये मूल्य का गांजा जब्त किया गया। यह सामान घरेलू सामानों के नीचे छिपाया गया था।
- भोपाल, अक्टूबर 2024: NCB और गुजरात ATS ने बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री से 1,814 करोड़ रुपये मूल्य की MD ड्रग्स और रॉ मटेरियल जब्त किया।
- झाबुआ, अक्टूबर 2024: DRI ने मेघनगर में फैक्ट्री पर छापा मारकर 168 करोड़ रुपये की 112 किलो मेफेड्रोन जब्त की।
- कोडीन सिरप, अगस्त 2024: मध्य प्रदेश पुलिस ने राज्यभर में प्रतिबंधित कोडीन आधारित कफ सिरप की 72,000 बोतलें जब्त की।
इन बड़ी कार्रवाईयों ने यह स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में ड्रग्स का कारोबार केवल छोटे पैमाने पर नहीं है, बल्कि इसमें बड़ी मात्रा में आर्थिक लेनदेन और व्यवस्थित नेटवर्क शामिल है।
गिरफ्तारियां और संपत्ति जब्ती
MP पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2023 से अक्टूबर 2024 तक 7,886 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। नशा तस्करी में शामिल व्यक्तियों की लगभग 115 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क या जब्त की गई।
सबसे ज्यादा मामले इंदौर, मंदसौर, नीमच, उज्जैन और रतलाम जिलों में सामने आए। विशेषज्ञों का कहना है कि इन जिलों की भौगोलिक स्थिति और पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा होने के कारण ड्रग्स की तस्करी यहां तेज है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश में न केवल ड्रग्स की तस्करी का दायरा बढ़ रहा है, बल्कि यह राज्य के कई जिलों में एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
नशा मुक्ति अभियान में तेजी
MP सरकार नशा मुक्ति अभियान को बड़े पैमाने पर चला रही है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां लगातार अवैध ड्रग्स फैक्ट्रियों, तस्करों और नेटवर्क को पकड़ने के लिए अभियान चला रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कार्रवाई से नशा नेटवर्क पर असर पड़ा है, लेकिन यह केवल अस्थायी है। MD ड्रग्स और मेफेड्रोन जैसी नशीली दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे तस्करों को नए रास्ते और तकनीकी माध्यम अपनाने पड़ रहे हैं।
ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए एजेंसियों को डिजिटल और इंटरनेशनल नेटवर्क पर भी नजर रखना जरूरी है। दुबई और तुर्की जैसे देशों से जुड़े नेटवर्क और डार्कनेट के जरिए लेनदेन रोकना चुनौतीपूर्ण है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि MP का बढ़ता ड्रग्स नेटवर्क केवल राज्य के लिए खतरा नहीं है, बल्कि देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। MD ड्रग्स और मेफेड्रोन जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना होगा।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:
- कड़े कानून और सख्त निगरानी: नशीले पदार्थों की तस्करी और फैक्ट्री चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
- लोक जागरूकता अभियान: जनता को नशे के खतरे और कानून की जानकारी देना जरूरी है।
- इंटरनेशनल कोऑर्डिनेशन: दुबई और तुर्की जैसे देशों से जुड़े नेटवर्क पर निगरानी बढ़ानी होगी।
- डिजिटल मॉनिटरिंग: डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हो रहे लेनदेन पर नजर रखनी होगी।
निष्कर्ष
MP में ड्रग्स का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और राज्य के कई जिलों में नशीले पदार्थों की फैक्ट्री और नेटवर्क का खुलासा हो चुका है। पिछले दो साल में पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई ने यह दिखाया है कि प्रशासन सक्रिय है।
हालांकि, MD ड्रग्स और मेफेड्रोन जैसे नशीले पदार्थों की मांग लगातार बढ़ रही है। राज्य में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल तस्करों द्वारा बढ़ रहा है, जो समस्या को और जटिल बनाता है।
इसलिए राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के सतर्क प्रयास, कड़े कानून और जनता की जागरूकता ही नशे से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका हैं। अगर इसी तरह कार्रवाई जारी रही, तो मध्य प्रदेश ड्रग्स के खतरनाक नेटवर्क को नियंत्रित करने में सफलता पा सकता है
