MP में GST चोरी का मुद्दा: उमंग सिंघार ने केंद्रीय वित्त मंत्री को लिखा पत्र, केंद्रीय जांच की मांग
MP में कथित रूप से बड़े पैमाने पर हो रही जीएसटी चोरी को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने इस गंभीर मामले को उठाते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर इसकी केंद्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अलग-अलग राज्यों से संगठित तरीके से माल लाकर बिना वैध कर भुगतान के व्यापार किया जा रहा है, जिससे केंद्र और राज्य सरकार दोनों को भारी राजस्व नुकसान हो सकता है।
उमंग सिंघार ने अपने पत्र में इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह नेटवर्क और अधिक मजबूत हो सकता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कही है।
केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग
उमंग सिंघार ने अपने पत्र में कहा है कि मध्यप्रदेश में संगठित तरीके से जीएसटी चोरी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। इस नेटवर्क के जरिए विभिन्न राज्यों से माल लाकर प्रदेश के बाजारों में बेचा जा रहा है, लेकिन उसके बदले में वैध कर का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्तर पर जांच कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही सिंघार ने अपने पत्र की प्रतिलिपि Central Board of Indirect Taxes and Customs (CBIC) के अध्यक्ष, मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री और राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव को भी भेजी है, ताकि इस मामले पर व्यापक स्तर पर कार्रवाई हो सके।
सीमावर्ती और औद्योगिक जिलों से मिली जानकारी
सिंघार ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख औद्योगिक जिलों से मिली सूचनाओं के आधार पर यह जानकारी सामने आई है कि कई राज्यों से संगठित तरीके से माल मध्यप्रदेश लाया जा रहा है।
इन जिलों में सक्रिय कुछ कारोबारी और परिवहन नेटवर्क मिलकर इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इनकी मदद से बड़ी मात्रा में माल बिना सही टैक्स भुगतान के बाजार में पहुंचाया जा रहा है।
सिंघार के अनुसार यह केवल एक या दो जिलों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है।
गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से आ रहा माल
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों से बड़ी मात्रा में माल ट्रकों के माध्यम से मध्यप्रदेश लाया जा रहा है।
इनमें मुख्य रूप से आयरन सामग्री, निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री, मसाले और अन्य व्यापारिक वस्तुएं शामिल हैं। यह सामान प्रदेश के विभिन्न शहरों और जिलों में पहुंचाकर वहां वितरित किया जाता है।
सिंघार का कहना है कि यदि इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और कई लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
फर्जी ई-वे बिल और अंडर-इनवॉइसिंग का आरोप
अपने पत्र में सिंघार ने इस नेटवर्क में सामने आ रही अनियमितताओं का भी जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी मात्रा में माल का परिवहन फर्जी या हेरफेर किए गए ई-वे बिल के जरिए किया जा रहा है।
इसके अलावा कई मामलों में माल की वास्तविक मात्रा और कीमत कम दिखाकर अंडर-इनवॉइसिंग की जाती है। यानी माल की कीमत और मात्रा कागजों में कम दिखाई जाती है ताकि उस पर देय जीएसटी कम चुकाना पड़े।
सिंघार के अनुसार यह पूरा काम एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें कई स्तरों पर लोगों की भूमिका हो सकती है।
बिचौलियों और परिवहन नेटवर्क की भूमिका
पत्र में यह भी कहा गया है कि बिचौलियों और परिवहन नेटवर्क की मदद से यह पूरा सिस्टम काम करता है। विभिन्न राज्यों से माल लाने वाले ट्रकों के जरिए यह सामान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाता है।
इस दौरान कई बार दस्तावेजों में हेरफेर किया जाता है या फिर फर्जी ई-वे बिल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके कारण कर विभाग को वास्तविक जानकारी नहीं मिल पाती और टैक्स चोरी आसानी से हो जाती है।
सिंघार का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और इसमें कई लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है।
हजारों करोड़ के राजस्व नुकसान की आशंका
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में दावा किया है कि इस तरह की गतिविधियों से केंद्र और राज्य सरकार दोनों को हर साल हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
जीएसटी प्रणाली का उद्देश्य कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और टैक्स चोरी को रोकना था, लेकिन यदि इस तरह के संगठित नेटवर्क सक्रिय हैं तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
सिंघार ने कहा कि यदि समय रहते इस नेटवर्क को खत्म नहीं किया गया तो यह सरकार के राजस्व पर गंभीर असर डाल सकता है।
निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग
उमंग सिंघार ने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान संगठित नेटवर्क, परिवहन चैनलों और इसमें शामिल संस्थाओं की भूमिका की गहन पड़ताल की जानी चाहिए। इसके साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
सिंघार का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो यह राज्य और केंद्र दोनों के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बढ़ी हलचल
इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्ष का कहना है कि यदि वास्तव में इतने बड़े स्तर पर जीएसटी चोरी हो रही है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि यदि केंद्रीय स्तर पर जांच के आदेश दिए जाते हैं तो कई जिलों में छापेमारी और जांच अभियान चलाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में कथित जीएसटी चोरी का यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद अब इस बात पर नजरें टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।
यदि केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच शुरू की जाती है तो प्रदेश में सक्रिय कथित जीएसटी चोरी के नेटवर्क का बड़ा खुलासा हो सकता है। साथ ही इससे भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
