MP कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार मौत से हड़कंप, 9 दिनों में बाघिन टी-141 और तीन शावकों की मौत
MP के मंडला जिले स्थित Kanha Tiger Reserve में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते नौ दिनों में एक बाघिन और उसके तीन शावकों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे वन विभाग और संरक्षण टीम में चिंता का माहौल है। अब केवल एक शावक के जीवित होने की जानकारी सामने आई है।
इलाज के दौरान बाघिन टी-141 की मौत
कान्हा टाइगर रिजर्व के सरही रेंज में सक्रिय बाघिन टी-141 की बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। बाघिन को पहले से ही कमजोर और बीमार अवस्था में पाया गया था, जिसके बाद उसे रेस्क्यू कर मुक्की रेंज के क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था।
वन विभाग के अनुसार बाघिन की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
नौ दिनों में तीन शावकों की मौत
बाघिन टी-141 के चार शावकों में से तीन की मौत पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग समय पर हो चुकी है। यह घटनाक्रम वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद चिंताजनक माना जा रहा है।
- 21 अप्रैल को अमाही नाले के पास एक शावक मृत पाया गया था।
- 23 अप्रैल को दूसरे नर शावक का शव सड़ी-गली अवस्था में मिला।
- 25 अप्रैल को तीसरे मादा शावक की मौत हो गई, जिसकी वजह फेफड़ों में संक्रमण बताई गई।
इन घटनाओं के बाद अब केवल एक शावक जीवित बचा है, जिसकी निगरानी की जा रही है।
पोस्टमार्टम में अलग-अलग कारण
वन विभाग की प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शावकों की मौत के अलग-अलग कारण सामने आए हैं। एक शावक को खाली पेट मृत पाया गया, जबकि दूसरे में संक्रमण और कमजोरी की बात कही गई है।
हालांकि, लगातार हो रही मौतों के पीछे किसी बड़े कारण की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। विशेषज्ञ इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग कर रहे हैं।
वन विभाग ने अभी नहीं दी पूरी जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पार्क प्रबंधन की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। केवल रेस्क्यू और मौत की पुष्टि की गई है, लेकिन कारणों को लेकर स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम अवधि में एक ही कुनबे के कई बाघों की मौत गंभीर संकेत है, जिसकी स्वतंत्र जांच जरूरी है।
बाघिन का पूरा कुनबा संकट में
जानकारी के अनुसार बाघिन टी-141 का पूरा कुनबा धीरे-धीरे खत्म होने की ओर बढ़ गया है। पहले से ही कमजोर स्थिति में चल रहा यह परिवार अब लगभग समाप्त हो चुका है।
वन अधिकारियों के मुताबिक यह क्षेत्र पहले भी बाघों की गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस तरह की लगातार मौतें असामान्य मानी जा रही हैं।
पहले भी मिले थे मृत शावक
इससे पहले 21 अप्रैल को ही एक शावक का शव बरामद हुआ था, जिसे प्रारंभ में प्राकृतिक मृत्यु बताया गया था। लेकिन बाद में लगातार घटनाओं ने संदेह को बढ़ा दिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी शिकार या बाहरी हमले के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं, जिससे मामला और भी जटिल हो गया है।
वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल
इस घटना के बाद Wildlife Conservation और टाइगर रिजर्व प्रबंधन पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते उचित देखभाल और निगरानी होती तो इन मौतों को रोका जा सकता था।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
निष्कर्ष
कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके तीन शावकों की लगातार मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर बाघ संरक्षण के बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि बचे हुए एक शावक को सुरक्षित रखा जा पाता है या नहीं, और इस पूरे मामले में आगे क्या खुलासे सामने आते हैं।
