MP Govt Two Child Policy Update: मध्य प्रदेश में दो बच्चों की शर्त खत्म, सरकारी नौकरी नियमों में बड़ा बदलाव; मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिए आदेश
MP सरकार ने सरकारी नौकरी से जुड़े नियमों में बड़ा और अहम बदलाव किया है। राज्य में लंबे समय से लागू “दो बच्चों की अधिकतम सीमा” (Two Child Policy) को अब समाप्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रावधान से जुड़े प्रस्तावित नियम को निरस्त करने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही आदेश दिया गया है कि इस नियम को संबंधित पोर्टल से तत्काल हटाया जाए।
इस फैसले को सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
2001 से लागू था दो बच्चों का नियम
MP में यह नियम वर्ष 2001 से लागू था। इसके तहत जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक जीवित बच्चे होते थे, उन्हें सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता था। यह नियम केवल सीधी भर्ती तक सीमित नहीं था, बल्कि विभागीय पदोन्नति और अन्य नियुक्तियों पर भी लागू होता था।
इसके अलावा, मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत भी यह प्रावधान शामिल था। यदि किसी सरकारी कर्मचारी के दो से अधिक बच्चे होते थे, तो इसे अनुशासनहीनता या कदाचार की श्रेणी में रखा जाता था। लंबे समय से इस नियम को लेकर सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस चल रही थी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा तैयार किए गए मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम के प्रारूप पर संज्ञान लिया। समीक्षा के बाद उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि दो बच्चों की सीमा से संबंधित प्रस्तावित नियम को पूरी तरह निरस्त किया जाए।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आदेश दिया कि इस प्रारूप को तत्काल प्रभाव से सरकारी पोर्टल से भी हटा दिया जाए। सरकार का कहना है कि नए सिरे से नियमों की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार संशोधित प्रारूप तैयार किया जाएगा।
सरकारी कर्मचारियों और युवाओं को राहत
इस निर्णय के बाद राज्य के लाखों युवाओं और सरकारी कर्मचारियों को राहत मिली है। अब सरकारी नौकरी या सेवा में बने रहने के लिए बच्चों की संख्या की बाध्यता नहीं रहेगी। पहले यह नियम कई परिवारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था, खासकर उन लोगों के लिए जो परिवार नियोजन से जुड़े पुराने प्रावधानों के कारण प्रभावित हो रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे परिवार नियोजन और रोजगार नीति के बीच संतुलन पर पुनर्विचार का संकेत मिलता है।
नियम का उद्देश्य क्या था?
वर्ष 2001 में इस नीति को लागू करने का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था। सरकार का मानना था कि सरकारी सेवा में आने के लिए कुछ सामाजिक जिम्मेदारियों का पालन करना जरूरी है और इसी कारण दो बच्चों की सीमा निर्धारित की गई थी।
इसके तहत यह नियम बनाया गया था कि 26 जनवरी 2001 या उसके बाद यदि किसी व्यक्ति के दो से अधिक जीवित संतान हैं, तो वह सरकारी सेवा के लिए पात्र नहीं होगा।
अन्य राज्यों में पहले ही खत्म हो चुका है नियम
MP से पहले यह नियम कई अन्य राज्यों में भी समाप्त किया जा चुका है।
राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार ने 11 मई 2016 को इस पाबंदी को हटाया था।
छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार ने 14 जुलाई 2017 को इसे समाप्त कर दिया था।
इन राज्यों में अब तीन या अधिक बच्चों वाले कर्मचारी भी सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं और उन्हें किसी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ता।
इसके अलावा, आंध्र प्रदेश सरकार ने एक अलग कदम उठाते हुए तीसरे बच्चे के जन्म पर 25 हजार रुपये का प्रोत्साहन देने की घोषणा भी की है।
नीति में बदलाव का व्यापक असर
इस फैसले का असर केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक नीति और प्रशासनिक दृष्टिकोण में भी बदलाव का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में रोजगार नीति को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
हालांकि, कुछ सामाजिक संगठन और नीति विशेषज्ञ इस बदलाव के दीर्घकालिक प्रभावों का भी अध्ययन करने की बात कह रहे हैं, खासकर जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के संदर्भ में।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, MP सरकार का यह फैसला एक बड़ा नीतिगत बदलाव है, जिसके तहत दो बच्चों की शर्त को समाप्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद अब इस नियम को औपचारिक रूप से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह कदम सरकारी नौकरी प्रणाली को अधिक सरल और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
