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MP में फर्जी MBBS डिग्री रैकेट का भंडाफोड़: गिरोह का सरगना भोपाल से गिरफ्तार, 50 से अधिक फर्जी डॉक्टरों की आशंका

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Published On: 21 May 2026
MP
— फर्जी MBBS डिग्री रैकेट का बड़ा खुलासा भोपाल से गिरोह का सरगना गिरफ्तार, प्रदेश में 50 से ज्यादा फर्जी डॉक्टर होने की आशंका

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MP में फर्जी MBBS डिग्री रैकेट का भंडाफोड़: गिरोह का सरगना भोपाल से गिरफ्तार, 50 से अधिक फर्जी डॉक्टरों की आशंका

MP में फर्जी MBBS डिग्री के जरिए सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरी करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इस मामले में दमोह पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में 50 से अधिक फर्जी डॉक्टर सक्रिय हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी डॉक्टरों की तैनाती से खुला मामला

यह पूरा मामला तब सामने आया जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में तीन डॉक्टरों की फर्जी MBBS डिग्री के आधार पर नियुक्ति की पुष्टि हुई। इन डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया और एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से फर्जी डिग्रियां बनाकर लोगों को सरकारी और निजी संस्थानों में नौकरी दिलाने का काम कर रहा था।

सरगना भोपाल से गिरफ्तार

दमोह पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपी हीरा सिंह कौशल (45), निवासी भोपाल को कोहेफिजा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यही व्यक्ति इस पूरे फर्जी डिग्री रैकेट का संचालन कर रहा था और अलग-अलग जिलों में नेटवर्क फैलाकर लोगों को जोड़ रहा था।

इस मामले में अब तक दमोह, जबलपुर और भोपाल से कुल चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

पूरे प्रदेश में फैला हो सकता है नेटवर्क

पुलिस की शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह गिरोह केवल कुछ जिलों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क ग्वालियर, मुरैना, धार, मंडला, जबलपुर, भोपाल और अन्य जिलों तक फैला हुआ हो सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में 50 से अधिक फर्जी डॉक्टर इस गिरोह के माध्यम से विभिन्न अस्पतालों और क्लीनिकों में काम कर रहे हो सकते हैं। यह संख्या और भी बढ़ सकती है, क्योंकि जांच अभी जारी है।

फर्जी डिग्रियों का बड़ा खेल

जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने रीवा मेडिकल कॉलेज और जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के नाम पर फर्जी MBBS डिग्रियां तैयार की थीं। इन डिग्रियों को इस तरह से बनाया गया था कि वे असली प्रतीत हों और आसानी से किसी भी जांच में पकड़ में न आएं।

इसके अलावा, मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल भोपाल के पंजीकरण नंबरों में भी हेरफेर कर फर्जी रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए थे। एक मामले में 2018 के असली पंजीकरण नंबर को बदलकर 2023 के रूप में दिखाया गया था।

असली डॉक्टर का नंबर भी हुआ इस्तेमाल

जांच के दौरान यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि एक असली डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर भी फर्जी तरीके से इस्तेमाल किया गया। यह नंबर डॉ. अभिषेक यादव के नाम पर पंजीकृत था, जो वर्तमान में नर्मदापुरम के सिवनीमालवा में पदस्थ हैं।

डॉ. यादव ने बताया कि मेडिकल काउंसिल का पोर्टल OTP आधारित सुरक्षा प्रणाली से चलता है, फिर भी उनका रजिस्ट्रेशन नंबर कैसे इस्तेमाल हुआ, यह गंभीर सवाल खड़ा करता है।

कैसे शुरू हुआ फर्जीवाड़ा

पुलिस जांच के अनुसार, इस गिरोह से सबसे पहले मुरैना निवासी अजय मौर्य जुड़ा था, जिसके बाद ग्वालियर और सीहोर के कुछ लोग इस नेटवर्क का हिस्सा बने। धीरे-धीरे यह पूरा रैकेट सक्रिय हो गया और फर्जी डिग्री तैयार कर लोगों को मेडिकल फील्ड में नौकरी दिलाने का काम शुरू हो गया।

गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें असली संस्थानों के नाम पर जारी करते थे, जिससे कई लोग बिना वास्तविक योग्यता के डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल

इस पूरे मामले ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संजीवनी क्लीनिक जैसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में फर्जी डॉक्टरों की तैनाती से मरीजों की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि पूरे चिकित्सा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।

आगे की जांच जारी

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य संदिग्धों की तलाश में कई जिलों में दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि किन-किन अस्पतालों और क्लीनिकों में फर्जी डॉक्टरों ने काम किया है और कितने मरीज प्रभावित हुए हैं।

निष्कर्ष

MP में सामने आया यह फर्जी MBBS डिग्री घोटाला एक बड़े मेडिकल रैकेट की ओर इशारा करता है, जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है। भोपाल से सरगना की गिरफ्तारी के बाद अब उम्मीद है कि इस नेटवर्क की पूरी परतें जल्द खुलेंगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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