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MP डिस्कॉम पर 49,239 करोड़ का कर्ज, वित्तीय सुधार की जरूरत

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Published On: 12 February 2026
MP Eastern Power Distribution Company Faces ₹913 Crore Loss, Bill Hike Likely
— MP’s Eastern Power Distribution Company Faces ₹913 Crore Loss, Bill Hike Likely

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MP में बिजली चोरों की वजह से बढ़ सकता है ईमानदार उपभोक्ताओं का बिल

MP में बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। देश की बिजली वितरण कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में पहली बार लाभ कमाया है, लेकिन मध्य प्रदेश की कंपनियां अब भी कर्ज और घाटे के बोझ में जकड़ी हुई हैं। राज्य में बढ़ती बिजली चोरी के कारण ईमानदार उपभोक्ताओं को उनके बिल में अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिजली कंपनियां अपनी हानियों की भरपाई बिलों के माध्यम से करेंगी, तो आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ेगा।

बिजली चोरी से हो रहा भारी नुकसान

MP की पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी चार संभागों के 22 जिलों में बिजली आपूर्ति करती है। लेकिन कंपनी 100 यूनिट बिजली बेचने के बावजूद केवल 73 यूनिट का बिल वसूल पा रही है। इसका मतलब यह है कि प्रति 100 यूनिट बिजली पर कंपनी को 27 यूनिट के बराबर का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस तरह, एक वित्तीय वर्ष में कुल नुकसान लगभग 913 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।

कंपनियां इस नुकसान की भरपाई के लिए अब बिल बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति न केवल उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है, बल्कि कंपनी की वित्तीय नीति और नियामक ढांचे की मजबूरी को भी उजागर करती है।

MP की विद्युत वितरण कंपनियों का वित्तीय ढांचा

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की वर्ष 2024-25 की वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल 54 विद्युत वितरण कंपनियां हैं। इसमें मध्य प्रदेश की पूर्व क्षेत्र कंपनी की ओवरऑल परफॉर्मेंस रैंक 43 और बिलिंग एफिसियंसी 73.34 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि राज्य में बिजली वितरण कंपनियां बिक्री और बिलिंग के बीच संतुलन बनाने में असमर्थ रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी बनने से अब तक लगभग 20 साल का संचयी घाटा 27,992 करोड़ रुपये है। मध्य क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र की कंपनियों के घाटे को मिलाकर राज्य की तीनों वितरण कंपनियों का कुल घाटा 71,394 करोड़ रुपये है।

तीनों कंपनियों का विस्तृत वित्तीय विवरण

क्षेत्र पिछले साल का घाटा संचयी घाटा लाभ/हानि
मध्य क्षेत्र 1,769 करोड़ रुपये 30,900 करोड़ रुपये हानि
पश्चिम क्षेत्र – 12,503 करोड़ रुपये 130 करोड़ रुपये लाभ
पूर्व क्षेत्र – 27,992 करोड़ रुपये हानि
कुल – 71,394 करोड़ रुपये –

देश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों का कुल घाटा लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये है। इस दृष्टिकोण से मध्य प्रदेश की कंपनियों की स्थिति देश के औसत के मुकाबले बेहतर तो नहीं है, लेकिन वित्तीय दबाव कम करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं।

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कर्ज और संचयी घाटा

31 मार्च 2025 तक मध्य प्रदेश की डिस्कॉम कंपनियों पर 49,239 करोड़ रुपये का कर्ज था। वहीं राज्य में संचयी घाटा 71,394 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसका मतलब यह है कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति अभी भी गंभीर है। कंपनियां घाटा कम करने के लिए विभिन्न उपाय कर रही हैं, लेकिन चोरी और असंगठित बिलिंग के चलते वित्तीय सुधार की प्रक्रिया धीमी है।

विद्युत वितरण कंपनियों की वित्तीय हालत सुधारने के लिए संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) लागू की गई है। इस योजना के तहत फंडिंग राज्यों के प्रदर्शन और उनके घाटे के आंकड़ों पर आधारित है। इस योजना का उद्देश्य कंपनियों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ न डालना है।

विशेषज्ञों की आपत्ति

बिजली मामलों के जानकार और सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बिजली कंपनियां अपनी हानियों को रोकने में पूरी तरह असफल रही हैं। उनका मानना है कि बिजली की दर बढ़ाकर घाटा वसूलने का प्रयास अस्वीकार्य है और इसका बोझ सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

अग्रवाल ने मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) को आपत्ति भेजकर इस नुकसान को अस्वीकार्य बताया और मांग की कि कंपनियों को घाटा वसूलने के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

नुकसान कम करने के विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली चोरी रोकने और कंपनियों की वित्तीय हालत सुधारने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं:

  1. स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल बिलिंग प्रणाली को राज्य के सभी जिलों में लागू करना।
  2. चोरी की निगरानी के लिए नियमित निरीक्षण और सख्त दंड नीति।
  3. वितरण कंपनियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सुधार।
  4. उपभोक्ताओं को जागरूक करना कि बिजली चोरी से उनकी ही जेब पर असर पड़ता है।

इन कदमों से न केवल कंपनियों का घाटा कम होगा, बल्कि ईमानदार उपभोक्ताओं को भी अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी।

भविष्य की राह

MP  में बिजली वितरण कंपनियों की स्थिति राष्ट्रीय दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पहली बार लाभ कमाना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अभी भी चोरी, कर्ज और संचयी घाटा गंभीर समस्या बने हुए हैं। यदि बिजली चोरी पर नियंत्रण नहीं पाया गया और कंपनियों की कार्यप्रणाली सुधारित नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में ईमानदार उपभोक्ताओं पर बिलों के माध्यम से अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ता रहेगा।

विद्युत नियामक आयोग, विशेषज्ञ और कंपनियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि उपभोक्ताओं को न्यूनतम हानि हो और कंपनियों की वित्तीय स्थिति दीर्घकालिक रूप से सुधार सके।

निष्कर्ष

MP में बिजली चोरी के कारण ईमानदार उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों का संचयी घाटा 71,394 करोड़ रुपये है, जबकि कर्ज 49,239 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञ इस स्थिति को अस्वीकार्य मानते हैं और उपभोक्ताओं के लिए राहत की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

स्मार्ट मीटरिंग, निगरानी, जागरूकता और तकनीकी सुधार के जरिए ही इस घाटे को कम किया जा सकता है। अन्यथा, आम उपभोक्ताओं के लिए उनके बिल में लगातार वृद्धि होती रहेगी।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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