MP मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश, कहा- मैं शिकायत अधिकारी बन गया हूं”
MP के प्रशासनिक तंत्र में एक बार फिर कड़ी कार्रवाई का संकेत मिला है। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लगभग 80 आईएएस अधिकारियों और विभागाध्यक्षों के सामने सख्त रुख अपनाया। बैठक की शुरुआत में ही उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया, “मैं शिकायत अधिकारी बन गया हूं,” जिसके बाद बैठक में कुछ क्षणों के लिए सन्नाटा छा गया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अपनी नाराजगी जताई और कहा कि सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी से जुड़े लंबित प्रकरणों की संख्या चिंताजनक है। उनका स्पष्ट निर्देश था कि सभी विभागीय मामलों की साप्ताहिक समीक्षा की जाए और सैंपल जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
लंबित मामलों और कार्ययोजना पर फोकस
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभागवार कार्ययोजना और स्पष्ट लक्ष्य 15 अप्रैल तक प्रस्तुत किए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने पिछले ढाई वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का विवरण भी एक सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया। उनका उद्देश्य प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही बढ़ाना और समय पर काम संपन्न कराना है।
इसके अलावा उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि जो मामले समय-सीमा से बाहर चल रहे हैं, उनका निरीक्षण कर उन्हें शीघ्र निपटाया जाए। यह कदम राज्य सरकार की योजनाओं को समय पर लागू करने और जनता तक लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
‘एक्शन प्लान-2028’ और पुराने कानूनों की समीक्षा
मुख्य सचिव ने 1947 से पहले बने पुराने कानूनों की समीक्षा का भी निर्देश दिया। उनका कहना था कि इन कानूनों के संशोधन, निरसन और नए कानून बनाने की प्रक्रिया को 31 मई तक पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि आवश्यकता हुई, तो इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जा सके।
बैठक में ‘एक्शन प्लान-2028’ की प्रगति की समीक्षा भी की गई। इसके तहत महिला सशक्तिकरण योजनाओं और “जल गंगा संवर्धन अभियान” की स्थिति पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिला सशक्तिकरण के सफल उदाहरणों को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाए ताकि समाज में जागरूकता और भागीदारी बढ़ सके।
ऑनलाइन सेवाओं में सुधार की दिशा
गर्मी के मौसम को देखते हुए मुख्य सचिव ने पेयजल उपलब्धता, नए हैंडपंप खनन और उससे संबंधित एसओपी जल्द जारी करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिए थाना स्तर पर संसाधनों की जानकारी एकत्र कर उसे सार्वजनिक करने का भी निर्देश दिया गया।
मुख्य सचिव ने एमपीई-सेवा पोर्टल की समीक्षा करते हुए इसे और अधिक सरल और अपडेटेड बनाने के निर्देश दिए। वर्तमान में पोर्टल पर 1055 सेवाएं ऑनलाइन हैं, लेकिन उन्हें और अधिक सुव्यवस्थित और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने की जरूरत बताई गई।
कैबिनेट निर्णयों और न्यायालयीन मामलों में समयबद्ध क्रियान्वयन
मुख्य सचिव ने कैबिनेट निर्णयों के समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि न्यायालयीन मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम किया जाए और वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (CR) समय पर लिखी जाए। यह सभी कदम प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी याद दिलाया कि उनका काम केवल आदेश जारी करना नहीं है, बल्कि इन आदेशों का समय पर पालन कराना और जनता की समस्याओं का समाधान करना भी उनकी जिम्मेदारी है। मुख्य सचिव के सख्त निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
अधिकारियों की जवाबदेही और प्रशासनिक प्रभाव
मुख्य सचिव के बयान और कड़े निर्देशों ने बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों को हिला दिया। यह संकेत है कि MP प्रशासन अब सुस्त रवैये या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायत अधिकारी बनने के नाते वह सीधे जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेंगे और लंबित मामलों पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि हर विभाग को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए और जनता के लिए नीतियों और योजनाओं का सही समय पर क्रियान्वयन करना अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे केवल अपने विभागीय लक्ष्यों पर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की दक्षता और जवाबदेही पर भी ध्यान दें।
निष्कर्ष
मुख्य सचिव अनुराग जैन की यह बैठक MP प्रशासन में जवाबदेही, समयबद्ध कार्रवाई और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रतीक बन गई है। अधिकारियों को दिए गए निर्देश स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को सुचारू बनाना नहीं, बल्कि जनता तक सेवाओं का सही समय पर लाभ पहुंचाना है।
इस सख्त समीक्षा बैठक ने यह संदेश दिया कि अब प्रशासनिक ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है और प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी के प्रति गंभीर होना होगा। जनता की शिकायतों और लंबित मामलों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और कानूनों का समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करना अब मुख्य सचिव की निगरानी में होगा।
