मध्यप्रदेश भाजपा में गहराती गुटबाजी: सिंधिया को सीएम बनाने की मांग, डिप्टी सीएम की तस्वीरों से अनदेखी और पोस्टर विवाद
मध्यप्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस समय आंतरिक कलह और गुटबाजी से जूझती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक ने हाल ही में पचमढ़ी में आयोजित कार्यसमिति बैठक में अनुशासन और एकजुटता का सख्त संदेश दिया था। लेकिन इसके बावजूद प्रदेश भाजपा में नेताओं के बीच मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। हाल ही में सामने आए कई घटनाक्रम इस अंदरूनी खींचतान को साफ तौर पर उजागर करते हैं।
मुरैना: ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने की मांग
ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति इन दिनों पोस्टरबाजी के कारण सुर्खियों में है।
मुरैना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे के दौरान सोशल मीडिया पर एक पोस्टर तेजी से वायरल हुआ। इस पोस्टर में सीधे तौर पर लिखा गया था कि “सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाया जाए, वरना अपनी खैर मनाओ।”
यह पोस्टर भाजपा संगठन और पार्टी मुख्यालय तक चर्चा का विषय बना। कई नेताओं ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ मानते हुए शिकायत भी दर्ज कराई। इस घटना ने प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।
रीवा: मुख्यमंत्री के स्वागत में डिप्टी सीएम की तस्वीर नदारद
रीवा जिले में आयोजित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी की जन्मशताब्दी समारोह भी भाजपा की आंतरिक राजनीति का गवाह बना।
इस कार्यक्रम का आयोजन उनके पोते और त्योंथर विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने किया था। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए शहरभर में बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इन पोस्टरों में प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल की तस्वीर शामिल नहीं की गई। नाराजगी जाहिर करते हुए डिप्टी सीएम कार्यक्रम में पहुंचे ही नहीं। यह घटना भाजपा के अंदर गुटबाजी को और स्पष्ट कर देती है।
देवास: विधायक के पोस्टर हटाने से भड़का विवाद
देवास में भी पोस्टर विवाद ने भाजपा को असहज स्थिति में ला खड़ा किया।
नवरात्रि पर्व से पहले शहर में भाजपा विधायक गायत्री राजे पवार के पोस्टर लगाए गए थे। लेकिन नगर निगम ने इन पोस्टरों को हटा दिया।
इस कार्रवाई से नाराज विधायक के पुत्र विक्रम राव समर्थकों के साथ सड़क पर उतर आए और निगम कमिश्नर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस दौरान निगम अधिकारियों को खुली धमकियां दी गईं और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
बढ़ रही है नए मुख्यमंत्री की मांग
इन घटनाओं से साफ है कि मध्यप्रदेश भाजपा में सीएम बदलने की मांग लगातार तेज हो रही है। ग्वालियर-चंबल में सिंधिया समर्थक उनके पक्ष में माहौल बना रहे हैं, जबकि रीवा और देवास जैसी घटनाओं ने पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को और गहरा कर दिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है, क्योंकि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर बढ़ती कलह संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकती है।
