एमपी बनेगा टेक्नोलॉजी हब: भोपाल-इंदौर में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, सेमीकंडक्टर और AI रिसर्च को मिलेगी नई दिशा
“मध्यप्रदेश में 2500 करोड़ निवेश से भोपाल-इंदौर टेक्नोलॉजी हब बनेंगे। AI, ड्रोन और सेमीकंडक्टर रिसर्च से 30 हजार रोजगार अवसर तैयार होंगे।”
भोपाल/इंदौर, सितंबर 2025। मध्यप्रदेश अब सिर्फ कृषि और पर्यटन नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने जा रहा है। राज्य सरकार की प्रगतिशील नीतियों और फरवरी में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद एमपी को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 2500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है। इस निवेश से आने वाले वर्षों में 30 हजार से अधिक रोजगार अवसर बनने की संभावना है।
भोपाल-इंदौर बनेंगे आईटी और इनोवेशन के हब
राज्य की राजधानी भोपाल और इंदौर में पाँच अग्रणी आईटी व टेक्नोलॉजी कंपनियां मिलकर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs) स्थापित कर रही हैं। ये केंद्र डिजिटल कंसल्टेंसी, मेडिकल टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल प्लानिंग और एडवांस्ड आईटी सर्विसेज पर काम करेंगे। इससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी हब के रूप में नई पहचान मिलेगी।
सेमीकंडक्टर और AI में बड़ा निवेश
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आईआईएसईआर, भोपाल में 85.51 करोड़ रुपये की लागत से एआई-सक्षम ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। अगले तीन वर्षों में यहां से 200 से अधिक ड्रोन विशेषज्ञ और शोधकर्ता तैयार होंगे।
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एबीवी-ट्रिपल आईटीएम, ग्वालियर में 14.67 करोड़ रुपये की लागत से सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होगा। यहां ग्रीन चिप टेक्नोलॉजी और क्वांटम हार्डवेयर पर उन्नत रिसर्च होगी, जिससे भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को नई मजबूती मिलेगी।
नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीतियां
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार की टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली नीतियां टियर-2 शहरों को भी नवाचार और इंडस्ट्री की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। ड्रोन, सेमीकंडक्टर, आईटी और स्पेस-टेक में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष इंडस्ट्री पॉलिसी लागू की गई हैं।
नीति संवाद के दौरान वर्ल्ड बैंक और गूगल प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश को लाइटहाउस स्टेट बनाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि एआई और क्लाउड टेक्नोलॉजी की मदद से एमपी को ग्लोबल लेवल पर टेक्नोलॉजी डेस्टिनेशन बनाया जा सकता है।
