मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन ने 15 जिलों के एसपी और आईएएस अधिकारियों के तबादले पर चर्चा पूरी कर ली है।
एमपी में होने जा रहा बड़ा प्रशासनिक बदलाव, सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन के बीच हुई अहम चर्चा
भोपाल। मध्यप्रदेश (MP) में एक बार फिर सत्ता की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है, जिससे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों में हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच हुई अहम चर्चा के बाद अब कई जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) बदलने की पूरी संभावना है।
यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव न सिर्फ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल करेगा, बल्कि प्रदेश में शासन की कार्यशैली को भी नई दिशा देगा। बीजेपी के स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों की रिपोर्ट को इस फेरबदल में अहम मानदंड बनाया जा रहा है।
सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन के बीच चार दौर की वार्ता पूरी
सीएम हाउस पर हुई इस हाई-लेवल मीटिंग में सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन ने प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र पर गहराई से चर्चा की। बताया जा रहा है कि अधिकारियों के काम करने के तरीके, राजस्व वसूली के लक्ष्य और आम जनता से व्यवहार को परखने के बाद एक निगेटिव लिस्ट तैयार की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, “जिन अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें आई हैं या जिनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा, उन्हें उनके मौजूदा ओहदे से हटाकर कम महत्वपूर्ण विभागों में भेजा जा सकता है।” यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव पूरी तरह से परफॉर्मेंस ऑडिट पर आधारित होगा।
प्रशासनिक दक्षता के साथ राजनीतिक संबंध भी बने कसौटी
सिर्फ फाइलें पास करने वाला अफसर ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ा अफसर अब सरकार की नजरों में खरा उतरेगा। इस बड़े प्रशासनिक बदलाव में यह देखा जा रहा है कि आईएएस अधिकारियों के संबंध स्थानीय सांसदों और विधायकों से कैसे हैं।
- राजस्व संग्रहण: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों को पूरा करने वालों को इनाम मिलेगा, जबकि फेल रहने वालों पर गदा चलेगी।
- जन व्यवहार: अधिकारियों के साथ जनता का व्यवहार (ट्रैवर्सी और रेड्रेसल सिस्टम) देखा जा रहा है।
- नेता संबंध: बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं से तालमेल न बिठाने वाले अफसरों को हटाया जाएगा।
पुलिस विभाग में भी हलचल: 15 जिलों के SP बदलने की तैयारी
प्रशासनिक फेरबदल की तरह ही पुलिस विभाग में भी बड़ा उथल-पुथल होने वाला है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने पहले ही एक सूची तैयार कर ली है। राज्य के DGP और मुख्यमंत्री के बीच मंत्रणा के बाद लगभग 15 जिलों के एसपी बदलने का फॉर्मूला तैयार कर लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, बड़ा प्रशासनिक बदलाव खंडवा, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ जैसे जिलों को प्रभावित करेगा। खास बात यह है कि 9 ऐसे अधिकारी हैं, जो प्रमोशन के बाद भी एसपी के पद पर बने हुए हैं। इन सभी को नई जिम्मेदारी दी जाएगी।
प्रमोटेड SP की लिस्ट (मुख्य):
- खंडवा SP
- भिंड SP
- धार SP
- रीवा SP
- झाबुआ SP
- दो रेलवे SP (इंदौर एवं भोपाल)
परफॉर्मेंस ही कुंजी: बड़े जिलों की कमान मिलने के आसार
इस फेरबदल में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि पुलिस अधिकारियों को सिर्फ बदला ही नहीं जाएगा, बल्कि उनके परफॉर्मेंस के आधार पर बड़े जिलों (इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर) की कमान थमाई जा सकती है।जिन एसपी ने अपने कार्यकाल में अपराध पर काबू पाया, साइबर क्राइम सॉल्व किए और कानून व्यवस्था बनाए रखी, उन्हें प्रमोट कर बड़े जिलों में भेजा जाएगा। यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव एक संदेश है कि अब ‘चपरासी’ से लेकर ‘एसपी’ तक को जवाबदेह बनाया जाएगा।
क्या बदलेगा इस फेरबदल से?
यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव सिर्फ कुर्सियां बदलने का खेल नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश में नई कार्य संस्कृति की शुरुआत है।
- जनता को राहत: खराब अफसरों के हटने से जनता को शिकायत निवारण में आसानी होगी।
- विकास में गति: नए कलेक्टर नई सोच लेकर आएंगे, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होगा।
- अपराध पर नियंत्रण: नए एसपी के आने से पुलिसिंग में सख्ती आएगी।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में इस बड़े प्रशासनिक बदलाव को लेकर चर्चा जोरों पर है। सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन की सक्रियता साफ कर रही है कि सरकार गैर-जरूरी अधिकारियों के साथ समझौता करने के मूड में नहीं है। जल्द ही सूची जारी होने की उम्मीद है, तब तक सभी अफसरों के तार-तार बजे हुए हैं।
