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Morena : भव्य शोभायात्रा के साथ मुरैना में हुआ आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज का नगर प्रवेश

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Published On: 25 July 2026
Morena

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इंसानियत और समाज की एकता के बिना धर्म अधूरा: आचार्यश्री उदारसागर

भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ मुरैना में नगर प्रवेश, धर्मसभा में दिए आत्मकल्याण और समाजहित के संदेश

Morena (मनोज जैन नायक)। धर्म केवल पूजा-पाठ, जप, तप और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका वास्तविक स्वरूप मनुष्य के आचरण, विचार और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए। जब तक व्यक्ति के भीतर इंसानियत, करुणा और सेवा का भाव जागृत नहीं होगा, तब तक धर्म का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता। यह विचार जैन संत आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने मुरैना में वर्षायोग के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।

बड़े जैन मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि धर्म का आधार केवल बाहरी क्रियाएं नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन है। यदि व्यक्ति पूजा करता है, व्रत रखता है और धार्मिक कार्यों में भाग लेता है, लेकिन उसके व्यवहार में कठोरता, अहंकार और कटुता बनी रहती है तो ऐसी धार्मिक गतिविधियां आत्मकल्याण का वास्तविक मार्ग नहीं बन सकतीं।

उन्होंने कहा कि सच्चा धार्मिक व्यक्ति वही है, जिसके हृदय में सभी प्राणियों के प्रति प्रेम, दया, संवेदना और सेवा का भाव हो। दूसरों के दुख को समझना, जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने व्यवहार से किसी को पीड़ा न पहुंचाना ही धर्म की वास्तविक पहचान है।

धर्म और इंसानियत का समन्वय जरूरी

आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने कहा कि धर्म और इंसानियत एक-दूसरे के पूरक हैं। केवल धार्मिक अनुष्ठान करने से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए मन की विकृतियों को दूर करना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि पूजा के बाद भी हमारी वाणी से किसी का मन दुखी होता है, व्यवहार में कठोरता बनी रहती है और हम दूसरों के प्रति संवेदनशील नहीं बन पाते, तो हमें अपने धर्माचरण का आत्ममंथन करना चाहिए।

आचार्यश्री ने कहा कि साधना का उद्देश्य व्यक्ति के भीतर विनम्रता, क्षमा, संयम और परोपकार जैसे गुणों का विकास करना है। धर्म तभी सार्थक होता है, जब वह हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आए।

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समाजहित को रखें सर्वोपरि

धर्मसभा में आचार्यश्री ने समाज की एकता और संगठन की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता, प्रेम और आपसी विश्वास में होती है।

उन्होंने कहा कि जिस समाज में सहयोग, सद्भाव और भाईचारा होता है, वह निरंतर प्रगति करता है। वहीं अहंकार, ईर्ष्या, स्वार्थ और आपसी मतभेद समाज को कमजोर बनाते हैं।

आचार्यश्री ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं और संगठनों के पदाधिकारियों का दायित्व है कि वे सभी लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और संवाद बनाए रखें। किसी भी संगठन में तानाशाही की भावना नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की भावना होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर समाज के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। विचारों में अंतर हो सकता है, लेकिन मन में दूरी नहीं आनी चाहिए। जब समाज परिवार की भावना से कार्य करता है, तभी वह मजबूत और संस्कारित बनता है।

संतों का सानिध्य जीवन को देता है नई दिशा

इस अवसर पर मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दिगंबर संतों का सानिध्य जीवन में आत्मचिंतन और आत्मसंयम की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और संयम का उदाहरण होता है। उनके प्रवचन व्यक्ति को अपनी कमियों को पहचानने और जीवन में सुधार करने की प्रेरणा देते हैं।

मुनिश्री ने कहा कि संतों के दर्शन, वंदना और उपदेशों को जीवन में अपनाना ही संत-सानिध्य का वास्तविक लाभ है। संतों की शिक्षाएं व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाने के साथ-साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी जागृत करती हैं।

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भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ नगर प्रवेश

शनिवार 25 जुलाई को आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने अपने शिष्य मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज, ऐलकश्री उत्साहसागरजी महाराज एवं क्षुल्लकश्री उपकारसागरजी के साथ भव्य शोभायात्रा के माध्यम से मुरैना नगर में प्रवेश किया।

बड़ा जैन मंदिर समिति एवं वर्षायोग समिति के नेतृत्व में समाजजनों ने आचार्य संघ का भव्य स्वागत किया। वैरियर चौराहे पर श्रद्धालुओं ने पाद प्रक्षालन, आरती और श्रीफल भेंट कर संतों का अभिनंदन किया।

इसके बाद शोभायात्रा बैंड-बाजों और धार्मिक जयघोष के साथ वैरियर चौराहे से प्रारंभ हुई। यात्रा एमएस रोड, नेहरू पार्क, पुल तिराहा, सदर बाजार, हनुमान चौराहा, सराफा बाजार और लोहिया बाजार होते हुए बड़े जैन मंदिर पहुंची।

शोभायात्रा में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। जैन संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थी पचरंगी ध्वज लेकर चल रहे थे। पुरुष वर्ग जिनेंद्र भगवान के गुणगान कर रहे थे, वहीं महिलाएं भक्तिमय भजनों के साथ वातावरण को आध्यात्मिक बना रही थीं।

मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य संघ की आरती उतारकर स्वागत किया। पूरे नगर में धार्मिक वातावरण और उत्साह देखने को मिला।

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वर्षायोग से मिलेगा आध्यात्मिक लाभ

आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज के नगर प्रवेश और वर्षायोग को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह है। श्रद्धालुओं का मानना है कि संतों के सानिध्य में होने वाले धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देते हैं।

धर्मसभा में दिए गए संदेशों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन, सेवा और समाजहित के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। आचार्यश्री ने सभी से धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझते हुए जीवन में करुणा, विनम्रता और मानवता को अपनाने का आह्वान किया।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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