मोहनखेड़ा तीर्थ पर राज्यपाल थावरचंद जी गहलोत की आशीर्वाद यात्रा
महाराष्ट्र की महानगरी मुंबई के खेतवाड़ी में चातुर्मास काल के दौरान मोहनखेड़ा जैन तीर्थ की गरिमा और प्रभाव का प्रतिफल देखने को मिला, जब कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल थावरचंद जी गहलोत ने विशेष कार्यक्रम में पधारा। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने गच्छाधिपति आचार्य भगवंत नित्यसेन सुरिश्र्वरजी महाराजा साहेब और मोहीर मंडल से आशीर्वाद प्राप्त किया, साथ ही मोहनखेड़ा तीर्थ के महत्व और जैन धर्म की जिवदया एवं मानवतावादी दृष्टि पर गहरी चर्चा की।
कार्यक्रम की रूपरेखा
राज्यपाल थावरचंद जी गहलोत मुंबई के खेतवाड़ी पहुंचे, जहां धराद जैन संघ, भारत जैन महामंडल, जिनसं और वरकाणा जैन परिवार सहित अनेक जैन समाजसेवी एवं नेता मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत एक गुलाब माला अर्पित कर गच्छाधिपति को सम्मान देने से हुई। इसके बाद राज्यपाल ने गच्छाधिपति से आशीर्वाद लिया और मुनिराजों से मिलकर जिवदया और मानवता पर चर्चा की।
इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में थे — धराद जैन संघ के अध्यक्ष रमेश जी धरू, नाकोडा तीर्थ के ट्रस्टी कांतिलाल जी, समाजसेवी दिनेश भाई, बीजेपी से जुड़े देवेन्द्र भाई, युवा नेता मित भाई सांचौर, समाजसेवी पवनजी संघवी, भारत जैन महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी. सी. डांगी, जिनसं के डायरेक्टर सुरेश जी पुनमिया, कुमार भाई, चम्पालाल जी, और मीडिया/सूचना पक्ष से विक्रम सुराणा, समाजसेवी विनोदजी सुराणा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस जानकारी का स्रोत विक्रम सुराणा से प्राप्त हुआ।
धर्म से ऊपर कुछ नहीं — राज्यपाल की बात
राज्यपाल थावरचंद जी गहलोत ने इस अवसर पर कहा कि धर्म से ऊपर कुछ नहीं है। उनका यह संदेश आत्मा और समाज के बीच निर्माण को और अधिक सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मानवता, करुणा, और जिवदया ही सच्चे धर्म के आधार हैं। इस दिशा में प्रेरणा लेने योग्य है कि कैसे मोहनखेड़ा जैसे तीर्थों में न केवल आध्यात्मिक साधना होती है, बल्कि सामाजिक संदेशों का भी प्रवाह होता है।
गच्छाधिपति आचार्य भगवंत नित्यसेन सुरिश्र्वरजी महाराजा साहेब ने भी इस समय यह स्पष्ट किया कि उन्हें मोहनखेड़ा तीर्थ को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने का संकल्प है, और उनका मानना है कि मानवता एवं जिवदया पर विशेष ख्याल रखना चाहिए।
मोहनखेड़ा तीर्थ: इतिहास और धार्मिक महत्व
मोहनखेड़ा जैन तीर्थ मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है, एवं इसे जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है।
यह तीर्थ धार जिले की सरदारपुर तहसील से लगभग 7 किमी दूर है। मंदिर मुख्यतः सफेद संगमरमर से निर्मित है, जो अपनी शिल्पकला एवं सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।
मंदिर में भगवान आदिनाथ की एक त्रिदलीय प्रतिमा तथा कायोत्सर्ग मुद्रा में 16 फुट ऊँची प्रतिमा भी है, जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
इसके अतिरिक्त, यहाँ समाधि मंदिर है जिसमें राजेंद्रसूरीश्वर महाराज का स्मारक है
तीर्थ का विस्तार, विश्राम गृह, और श्रद्धालुओं के आवास की व्यवस्था इसे देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक बनाते हैं।
मोहनखेड़ा एवं वर्तमान चातुर्मास
इस वर्ष जब मोहनखेड़ा तीर्थ का नाम धार्मिक आयोजनों में प्रमुखता से उभरा है, तब यह आवश्यक है कि हम देखें— चातुर्मास के दौरान इस तीर्थ ने किस प्रकार की भूमिका निभाई। मोहनखेड़ा में चातुर्मास के आयोजनों का असर मुंबई, धार, और दूर-दराज के जैन समुदाय पर दिखाई दे रहा है।
राज्यपाल की इस यात्रा ने मोहनखेड़ा की धार्मिक महत्ता को और ऊँचा किया है। मोहनखेड़ा तीर्थ की प्रतिष्ठा को देखते हुए भविष्य में यहाँ आने वाले पुण्य तिथियों व पर्वों पर राज्यपालों, मुख्यमंत्री या अन्य गणमान्य हस्तियों के आगमन की संभावना बढ़ जाती है।
सामाजिक संदेश एवं जैन दर्शन की भूमिका
राज्यपाल के इस दौरे में मुख्य संदेश था — धर्म और आध्यात्म से आगे मानवता और जिवदया की भूमिका। यह विचार जैन दर्शन के मूल में निहित है। गच्छाधिपति ने इस अवसर पर विशेष रूप से यह बात कही कि मनुष्य मात्र के प्रति करुणा और सहानुभूति होने चाहिए।
मोहनखेड़ा जैसी तीर्थस्थल इस दृष्टि से बहुत उपयुक्त मंच हैं, जहाँ न केवल धार्मिक साधना होती है, बल्कि सामाजिक एवं नैतिक शिक्षा भी दी जाती है। जिनसं, धराद जैन संघ, भारत जैन महामंडल जैसे संस्थाएँ इस दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
आगामी योजनाएँ एवं महोदय की प्रेरणा
राज्यपाल थावरचंद जी गहलोत ने इस दौरान सुझाव दिया कि मोहनखेड़ा तीर्थ पर आने वाली सभी धर्मयात्राएँ और सार्वजनिक कार्यक्रम इस विचार पर आधारित हों कि कैसे धर्म और मानवता को एकसाथ रखा जाए।
मोहनखेड़ा तीर्थ प्रबंधन एवं जैन समाज ने भी यह प्रस्ताव रखा कि आगामी वर्षितप पारणे (वर्षरित् पर्व) में राज्यपाल सम्मानित अतिथि के रूप में पधारें। विशेष रूप से महोनखेड़ा की महापारणे को और भव्यता देने, जिनशासन की प्रभावना अधिक व्यापक रूप से फैलाने, और जिवदया के कार्यक्रमों को अधिक संगठित तरीके से आगे बढ़ाने की योजनाएँ इस समय चर्चा में हैं।
निष्कर्ष — मोहनखेड़ा की नई पहचान
राज्यपाल की इस आशीर्वाद यात्रा ने मोहनखेड़ा तीर्थ को एक राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित धार्मिक केंद्र के रूप में पुनर्परिभाषित किया है।
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मोहनखेड़ा तीर्थ को न केवल धार्मिक केंद्र के रूप में बल्कि मानवता, करुणा, और सामाजिक संदेश का मचान माना जाएगा।
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राजकीय समर्थन और समाज की भागीदारी से, मोहनखेड़ा तीर्थ की प्रतिष्ठा और पहुंच दोनों बढ़ेंगी।
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चातुर्मास, पारणे और अन्य महोत्सवों के अवसर पर मोहनखेड़ा एक ऐसा केंद्र बनेगा, जहाँ धार्मिक साधना और सामाजिक संदेश दोनों एक साथ प्रवाहित हों।



