MHA Order 2025: नेपाल-भूटान नागरिकों को भारत आने के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं
नई दिल्ली, 2 सितम्बर 2025
भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि नेपाल और भूटान के नागरिकों को भारत में आने-जाने के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं होगी। गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को आदेश जारी कर कहा कि यह छूट पहले की तरह ही जारी रहेगी और भारतीय नागरिकों पर भी लागू होगी, जो नेपाल या भूटान से सड़क या हवाई मार्ग से लौटते हैं।
यह आदेश हाल ही में लागू हुए 2025 आप्रवासन और विदेशी नागरिक अधिनियम (Immigration & Foreigners Act 2025) के तहत जारी किया गया है।
भारतीय सेना और उनके परिवार को छूट
गृह मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के जवान, जो ड्यूटी पर सरकारी परिवहन से आ-जा रहे हैं, उन्हें भी पासपोर्ट या वीजा दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी। इतना ही नहीं, उनके परिवार के सदस्य, यदि सरकारी परिवहन से यात्रा कर रहे हों, तो इस छूट का लाभ उठा सकेंगे।
पासपोर्ट-वीजा नियम लागू नहीं होंगे
आदेश के अनुसार –
भारत में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों को नेपाल या भूटान सीमा से लौटते समय पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं होगी।
नेपाल और भूटान के नागरिकों को भी भारत आने पर पासपोर्ट-वीजा से छूट मिलेगी।
यह नियम चीन, मकाऊ, हांगकांग और पाकिस्तान से आने-जाने वाले नागरिकों पर लागू नहीं होगा।
तिब्बती शरणार्थियों को राहत
गृह मंत्रालय ने बताया कि 1959 से 2003 के बीच विशेष प्रवेश परमिट (Special Entry Permit) पर भारत आने वाले तिब्बती नागरिक भारत में रहने के हकदार होंगे।
2003 से लेकर नए कानून लागू होने तक परमिट लेकर भारत आए तिब्बती भी पंजीकरण कराने के बाद इस छूट का लाभ उठा पाएंगे।
धार्मिक अल्पसंख्यक और श्रीलंकाई तमिलों को भी फायदा
अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग भी भारत में बिना मान्य दस्तावेजों के 31 दिसम्बर 2024 तक रह सकते हैं।
श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी, जिन्होंने 9 जनवरी 2015 तक भारत में शरण ली थी, उन्हें भी पासपोर्ट और वीजा की शर्त से छूट दी गई है।
भारत-नेपाल और भारत-भूटान संबंधों पर असर
यह फैसला भारत की खुली सीमा नीति (Open Border Policy) को मजबूत करता है, जिससे नेपाल और भूटान के नागरिक बिना किसी दिक्कत के भारत आ-जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और पड़ोसी देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे
