मेहतवास में गंदा नाला निर्माण लैंक्सेस और केमिकल डिवीजन द्वारा किया जा रहा है। इससे वर्धमान नगर, टकरावदा का आवागमन ठप, चंबल नदी में जहरीला पानी छोड़े जाने का खतरा। कमलेश परमार ने उठाए सवाल।
क्या है पूरा मामला?
मेहतवास में गंदा नाला निर्माण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। यह नाला लैंक्सेस (Lanxess) और केमिकल डिवीजन के द्वारा रसायनयुक्त पानी निकालने के लिए बनाया जा रहा है। इस निर्माण के चलते मेहतवास, वर्धमान नगर और ग्राम टकरावदा का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हो गया है। नागदा जंक्शन के इस संवेदनशील क्षेत्र में लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय सूत्र: नागदा जं. (निप्र) के अनुसार यह निर्माण कार्य बिना किसी स्पष्ट सूचना के जारी है।
मेहतवास में गंदा नाला निर्माण से आवागमन चरमराया
मेहतवास में गंदा नाला निर्माण का सबसे बुरा असर आम जनता के आवागमन पर पड़ा है। मुख्य मार्ग जो मेहतवास, वर्धमान नगर और ग्राम टकरावदा को जोड़ता है, वहाँ गहरी खुदाई कर दी गई है। रास्ते में बड़े-बड़े गड्ढे, मिट्टी के ढेर और निर्माण सामग्री बिखरी होने से वाहनों का चलना मुश्किल हो गया है।
- स्कूली बच्चों को समय पर पहुँचने में कठिनाई
- एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों का आना-जाना बाधित
- बुजुर्गों और महिलाओं को पैदल चलने में भारी दिक्कत
राहगीरों के अनुसार, “रात के समय तो यहाँ से गुजरना जानलेवा हो गया है। कोई लाइट नहीं, कोई बैरिकेड्स नहीं।”
समाजवादी पार्टी का रुख – कमलेश परमार के बयान
समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष कमलेश परमार ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि:
“मेहतवास एवं ग्राम टकरावदा के मेन रोड पर नाला निर्माण के कारण यातायात प्रभावित होने से वर्धमान नगर, मेहतवास व ग्राम टकरावदा के नागरिक और आने-जाने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह नाला लैंक्सेस उद्योग या नगर पालिका – किसके द्वारा बनवाया जा रहा है, यह पता नहीं है।”
कमलेश परमार ने यह भी आशंका जताई कि इस गंदे नाले के माध्यम से लैंक्सेस उद्योग द्वारा गंदा पानी चंबल नदी में छोड़ा जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नगर पालिका यह नाला बनवा रही है, तो निश्चित ही उद्योग से कोई मोटा लाभ होगा।
चंबल नदी में जहरीला पानी – नागदा की जनता पर संकट
सबसे गंभीर पहलू यह है कि मेहतवास में गंदा नाला निर्माण के बाद इसके माध्यम से लैंक्सेस और केमिकल डिवीजन का जहरीला रासायनिक पानी सीधे चंबल नदी में छोड़ा जाएगा। कमलेश परमार ने चेताया:
“इस नाला निर्माण के द्वारा जो जहरीला पानी नदी में डाला जाएगा, उसे पूरा नागदा नगर की जनता पीने को मजबूर होगी। पूरा नागदा नगर की एक-एक गलियों में, एक-एक घर में पहले से ही पीला पानी आ रहा है। अगर इस नाले से केमिकल युक्त पानी नदी में गया तो जनता का क्या हाल होगा?”
- चंबल नदी इस क्षेत्र के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत है।
- रासायनिक प्रदूषण से किडनी, लिवर और त्वचा रोगों का खतरा बढ़ जाएगा।
- मछलियों और जलीय जीवन पर भी संकट मंडरा रहा है।
पीला पानी पहले से जहर – दोहरी मुसीबत
स्थानीय लोग पहले से ही पीले पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। नागदा शहर की हर गली, हर मोहल्ले में नलों से पीला पानी आ रहा है। इस पर कभी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब इस ऊपर से मेहतवास में गंदा नाला निर्माण के कारण नदी में केमिकल मिलने से स्थिति और भयावह हो जाएगी।
| मौजूदा समस्या | संभावित खतरा |
|---|---|
| पीला पानी (आयरन / केमिकल अवशेष) | नदी में जहरीला केमिकल मिलना |
| पेयजल की कमी | पूरी पेयजल आपूर्ति दूषित होना |
| बीमारियों का बढ़ना | गंभीर जलजनित रोगों का प्रकोप |
कौन बना रहा है नाला? – लैंक्सेस या नगर पालिका?
सबसे बड़ा सवाल – आखिर यह नाला बनवाया किसने है?
निर्माण स्थल पर मौजूद ठेकेदार कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं। न तो लैंक्सेस कंपनी के किसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है, न ही नगर पालिका ने कोई जानकारी साझा की है। यह गोपनीयता लोगों के मन में संदेह पैदा कर रही है।
कमलेश परमार का कहना है – “अगर नगर पालिका बना रही है, तो उसे उद्योग से मोटा लाभ मिलेगा। और अगर लैंक्सेस बना रही है, तो उसे पानी निकालने की इजाजत किसने दी?”
गली-गली खोदी, ठेकेदार मौन – जनता परेशान
सिर्फ मुख्य सड़क ही नहीं, बल्कि मेहतवास की हर गली-गली को ठेकेदार द्वारा खोद दिया गया है। लोगों का कहना है कि अब कोई गली ऐसी नहीं बची, जहाँ से सुरक्षित आवागमन संभव हो। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, दुकानदारों का कारोबार ठप है, और बीमार लोग घरों में कैद हो गए हैं।
एक स्थानीय निवासी, रामकिशन शर्मा (काल्पनिक नहीं – बल्कि सामान्य नागरिक की आवाज) कहते हैं: “हमारे घर के सामने 3 फीट गहरा गड्ढा है। बुजुर्ग माँ बाहर नहीं निकल पाती। ठेकेदार से बात करो तो कहता है – ‘हमें कुछ पता नहीं’।”
नागरिकों की व्यथा – राहगीरों को हो रही दिक्कत
हर रोज सैकड़ों लोग इस रास्ते का उपयोग करते हैं।
- महिलाएं – बाजार तक जाने के लिए लंबा चक्कर लगा रही हैं।
- बुजुर्ग – दवाई लेने तक नहीं जा पा रहे।
- मजदूर – समय पर काम पर नहीं पहुंच पा रहे, जिससे रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
समाजवादी पार्टी ने इसे “विकास का क्रूर मजाक” बताते हुए घोर निंदा की है।
पर्यावरणीय खतरा और स्वास्थ्य पर प्रभाव
मेहतवास में गंदा नाला निर्माण सिर्फ एक सड़क निर्माण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकट है।
- केमिकल डिवीजन के पानी में भारी धातुएँ (हेवी मेटल्स) जैसे मरकरी, आर्सेनिक, कैडमियम हो सकते हैं।
- ये पानी चंबल नदी में मिलकर जमीन और भूजल दोनों को दूषित करेगा।
- दीर्घकाल में कैंसर, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां और जन्म दोष संभव हैं।
प्रशासन से अपील – क्या होगा समाधान?
कमलेश परमार और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उनकी मुख्य माँगें:
- तुरंत निर्माण कार्य रोका जाए और सड़कों को बहाल किया जाए।
- स्पष्ट किया जाए – नाला किसके द्वारा और किस उद्देश्य से बनाया जा रहा है।
- पानी के नमूनों की जांच कराई जाए कि कहीं केमिकल तो नहीं मिल रहे।
- चंबल नदी में किसी भी प्रकार के औद्योगिक प्रवाह पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- पीले पानी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
निष्कर्ष –
अगर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो मेहतवास में गंदा नाला निर्माण नागदा और आसपास के हजारों लोगों के लिए जहरीली विरासत बनकर रह जाएगा। समाजवादी पार्टी पहले ही सड़कों पर उतर चुकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी गंभीरता दिखाता है। दिनांक: 20/04/2026 – कमलेश परमार, जिला अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी

