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महंगी होने वाली हैं दवाएं: मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित, MP Pharma Companies पर चीन का निर्भरता असर

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Published On: 8 April 2026
MP Pharma

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MP Pharma दवाइयां होंगी महंगी! मिडिल ईस्ट संकट का असर सीधे आपकी मेडिकल किट पर

भोपाल, 08 अप्रैल 2026: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब आम नागरिक की जेब पर सीधे महसूस होने लगा है। पहले महंगाई ने खाने-पीने और गैस के खर्चे बढ़ाए, अब यह संकट दवाओं की कीमतों तक पहुंच चुका है। होटल-रेस्टोरेंट्स में भोजन महंगा हो गया है, और आम भारतीय की पसंद समोसा-कचोरी और चाट भी पहले से दोगुने दाम में मिलने लगी है। उदाहरण के लिए, जो समोसा पहले 10 रुपए का मिलता था, अब उसे 20 रुपए में खरीदना पड़ रहा है।

गैस और तेल के बढ़ते दाम ने भी परिवारों का खर्च दोगुना कर दिया है। वहीं, मिडिल ईस्ट में युद्ध और वैश्विक संकट का फायदा उठाते हुए चीन ने दवाओं का कच्चा माल (API) 166% तक महंगा कर दिया है। इसका असर सीधे आपके मेडिकल बजट पर दिखने वाला है।

दवाओं की महंगाई का मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान-इजराइल युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। अधिकांश दवाओं का कच्चा माल चीन और अन्य एशियाई देशों से आता है। युद्ध के कारण जहाजों को सुरक्षित मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इससे शिपिंग में पहले 30-40 दिन लगते थे, अब यह समय 80-90 दिन तक बढ़ गया है। साथ ही शिपिंग लागत भी 15 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 40 रुपए प्रति किलो हो गई है।

इन परिस्थितियों में फार्मा कंपनियों के लिए उत्पादन लागत दोगुनी हो गई है, जिसका असर दवाओं की कीमतों में इजाफे के रूप में आम नागरिक पर पड़ेगा।

सबसे अधिक प्रभावित मरीज कौन होंगे?

महंगी होने वाली दवाओं से सबसे ज्यादा बीपी (ब्लड प्रेशर), शुगर (डायबिटीज) और अस्थमा जैसे मरीज प्रभावित होंगे। इन रोगों में मरीजों को रोजाना दवा लेनी पड़ती है। अब दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी से उनकी दैनिक मेडिकल खर्च बढ़ जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचा, तो आने वाले समय में दवाओं की कीमतें 25-30% तक बढ़ सकती हैं। इससे मरीजों की जेब पर भारी असर पड़ेगा और कुछ परिवारों को दवाओं के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

 MP Pharma Companies की स्थिति

मध्य प्रदेश में लगभग 200 से ज्यादा छोटी-बड़ी Pharma Companies कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। युद्ध और वैश्विक संकट के कारण शंघाई से मुंबई तक जहाजों को सुरक्षित मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इसके चलते डिलीवरी में पहले जहां 30-40 दिन लगते थे, अब यह समय 80-90 दिन तक बढ़ गया है।

इस लंबी डिलीवरी और बढ़ी हुई शिपिंग लागत के कारण कंपनियों का उत्पादन खर्च दोगुना हो गया है। फार्मा उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को लागत बढ़ने की वजह से दवाओं के दाम बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

जेनेरिक दवाओं और डिस्काउंट पर असर

दवा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहले असर जेनेरिक दवाओं और केमिस्ट की दुकानों पर मिलने वाले डिस्काउंट पर पड़ा है। पहले ये दवाएं 10-20% की छूट पर मिलती थीं, लेकिन अब उन्हें सीधे एमआरपी पर ही बेचना पड़ रहा है।

आने वाले 15-20 दिन में ब्रांडेड दवाओं (एथिकल दवाएं) और सर्जिकल सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इससे मरीजों और उनके परिवारों के लिए मेडिकल खर्च और बढ़ जाएगा।

आम नागरिक के लिए क्या करें?

  1. दवाओं का स्टॉक पहले से रखें: बीपी, शुगर, अस्थमा जैसी दवाओं के नियमित मरीजों को जरूरत पड़ने पर अपनी मेडिकल किट अपडेट करने की सलाह दी जा रही है।
  2. जेनेरिक विकल्प अपनाएं: यदि ब्रांडेड दवाओं की कीमत बढ़ती है, तो जेनेरिक दवाएं कम खर्चीली विकल्प बन सकती हैं।
  3. डिस्काउंट और ऑफर्स पर ध्यान दें: कुछ केमिस्ट समय-समय पर ऑफर्स और कूपन उपलब्ध कराते हैं, उनका फायदा उठाएं।
  4. सटीक डोज का पालन: दवा की खुराक सही तरीके से लेना महत्वपूर्ण है, ताकि अतिरिक्त दवाओं की आवश्यकता न पड़े।

निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट संकट का असर अब सीधे हमारी मेडिकल किट तक पहुंच चुका है। महंगी हुई कच्ची सामग्री, लंबी डिलीवरी और बढ़ी हुई शिपिंग लागत ने दवाओं को महंगा बना दिया है। आने वाले समय में मरीजों को अपनी जेब पर असर महसूस होगा, खासकर वे लोग जो रोजाना दवा लेते हैं।

फार्मा कंपनियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यह संकट लंबे समय तक जारी रह सकता है। इसलिए आम नागरिकों को पूर्व योजना बनाकर, अपनी मेडिकल किट और दवा खरीद का ख्याल रखना चाहिए।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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