आओ मनाएँ सार्थक दिवाली: बच्चों के साथ खुशियों का दिया जलाएँ
भोपाल, 13 अक्टूबर 2025: दीपों का त्योहार दिवाली सिर्फ घर को रोशन करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में प्रेम, सहयोग और मानवता के दीप जलाने का समय भी है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए, कल TI में एक बेहद खास और सार्थक दिवाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकार पूजा सिंह और अद्भुत NGO के बच्चों ने मिलकर ‘दिया मेकिंग वर्कशॉप’ का आयोजन किया।
इस वर्कशॉप का उद्देश्य बच्चों को केवल कला की शिक्षा देना नहीं था, बल्कि उन्हें यह संदेश देना था कि खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं। इसमें लगभग 20 बच्चे शामिल हुए, जिनमें प्रत्येक ने उत्साह और उमंग के साथ दिवाली के लिए अपने अपने हाथों से दीये बनाए। बच्चों की आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान देखना वहां उपस्थित सभी के लिए बेहद प्रेरणादायक पल था।
कार्यक्रम का नेतृत्व कलाकार पूजा सिंह ने किया, जिन्होंने बच्चों को दीयों को सजाने और रंगने की तकनीक सिखाई। पूजा ने बच्चों को समझाया कि हर दीया केवल मिट्टी और रंग का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि यह उम्मीद, प्यार और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “जब हम किसी के लिए खुशियों का दीप जलाते हैं, तो हम सिर्फ उस घर को नहीं रोशन करते, बल्कि अपने दिल को भी रोशन करते हैं।”
कार्यक्रम में अद्भूत NGO के संस्थापक सिद्धार्थ शर्मा, और स्वयंसेवक परिधि राठौर, अंचल मोरी और तन्वी भी मौजूद थे। बच्चों के उत्साह और रचनात्मकता को देखकर उन्होंने इस बात पर गर्व महसूस किया कि उनके प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने बच्चों को यह समझाया कि समाज की सेवा करना, दूसरों की खुशी में शामिल होना और मिलकर काम करना सबसे बड़ा त्योहार है।
Yogesh Kale (Centre Director) और TI मैनेजर ने इस मौके पर 27 सेट दीयों की खरीदारी करके बच्चों का मनोबल बढ़ाया। यह केवल एक भौतिक उपहार नहीं था, बल्कि यह बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और सहयोग की भावना जगाने वाला कदम था। बच्चों ने अपने हाथों से बनाए गए दीयों को बड़े प्यार और सम्मान के साथ पैक किया, ताकि यह खुशियाँ समाज के अन्य घरों तक भी पहुँच सकें।
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण हिस्सा तब आया, जब बच्चों ने अपने बनाए हुए दीयों को लाइव सजाया। प्रत्येक दीया अपने आप में एक कहानी कह रहा था—किसी का दीया उम्मीद का, किसी का प्यार का और किसी का सहयोग का प्रतीक था। बच्चों ने खुद अनुभव किया कि खुशी केवल लेने से नहीं, बल्कि देने से बढ़ती है।
इस आयोजन की खासियत यह भी थी कि यह केवल कला और दीयों तक सीमित नहीं था। यह बच्चों को सामाजिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और उत्साह की शिक्षा देने का माध्यम भी बन गया। बच्चे समझ गए कि दिवाली का असली अर्थ केवल रोशनी और मिठाइयाँ नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में खुशियाँ लाना भी है।
सिद्धार्थ शर्मा, संस्थापक अद्भुत NGO ने कहा, “जब बच्चे अपने हाथों से किसी के लिए दीप बनाते हैं, तो वे केवल कला सीखते नहीं हैं, बल्कि वे मानवता और संवेदनशीलता की भावना को भी आत्मसात करते हैं। यह अनुभव उनके लिए जीवनभर यादगार रहेगा।”
पूजा सिंह ने इस अवसर पर बच्चों के लिए कहा, “हर दीया एक उम्मीद की किरण है। जब आप इसे किसी और के घर में जलाते हैं, तो यह केवल उस घर को नहीं, बल्कि पूरे समाज को रोशन करता है। यही सच्ची दिवाली है।”
कार्यक्रम में उपस्थित सभी स्वयंसेवकों और संस्थान के कर्मचारियों ने बच्चों को उत्साहित किया और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक बच्चा अपने बनाए हुए दीयों को लेकर गर्व महसूस करे और समझे कि उनके छोटे-छोटे कदम भी समाज में बड़े बदलाव ला सकते हैं।
इस दिवाली वर्कशॉप ने न केवल बच्चों को कला सिखाई, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया कि खुशियाँ बांटना सबसे बड़ा त्यौहार है। यह आयोजन इस बात का प्रतीक बन गया कि यदि समाज के हर सदस्य ने दूसरों के लिए समय और प्यार निकाला, तो समाज में खुशियों की कोई कमी नहीं होगी।
कार्यक्रम का समापन बच्चों द्वारा तैयार किए गए दीयों की प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसे सभी आगंतुकों ने बड़े उत्साह के साथ देखा। बच्चों के चेहरे की चमक और उनकी आँखों की रोशनी दर्शकों के दिलों को भी रोशन कर गई।
इस वर्कशॉप ने सभी को याद दिलाया कि दिवाली सिर्फ अपने घर को रोशन करने का नाम नहीं है, बल्कि यह दूसरों के जीवन में भी उम्मीद और खुशियाँ फैलाने का पर्व है। इस दिवाली, आओ हम सब मिलकर सिर्फ अपने घर नहीं, बल्कि समाज के हर कोने में खुशियों का दीप जलाएँ।
सारांश में कहा जा सकता है:
यह आयोजन बच्चों के लिए केवल एक कला वर्कशॉप नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और प्रेम का पाठ था। पूजा सिंह और अद्भुत NGO ने यह साबित कर दिया कि जब छोटे कदम बड़े इरादों के साथ उठते हैं, तो दुनिया में खुशियों की रोशनी फैलती है। इस दिवाली, आओ हम सब उनके साथ जुड़ें और खुशियों का दीप हर घर में जलाएँ।



