मातृ पिता पूजन दिवस इंदौर में डॉ. भरत शर्मा, संत रामा महाराज, डॉ. अन्ना महाराज ने भारतीय संस्कृति, सद्भावता और परिवार सम्मान का दिया संदेश।
मातृ पिता पूजन दिवस इंदौर का सांस्कृतिक महत्व
मातृ पिता पूजन दिवस इंदौर भारतीय संस्कृति की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है जिसमें माता-पिता को देवतुल्य माना गया है। राष्ट्रीय संस्थान संत आसाराम गुरुकुल द्वारा आयोजित यह समारोह इंदौर के दशहरा मैदान में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
सैकड़ों बच्चों ने अपने माता-पिता का पूजन कर “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः” के संस्कार को व्यवहार में उतारा।
यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवार, संस्कार और सद्भावता का सामाजिक अभियान बनकर उभरा।
डॉ. भरत शर्मा का प्रेरक उद्बोधन
डॉ. भरत शर्मा (सदस्य – संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) ने कहा कि आधुनिकता के आडंबर के बीच यह आयोजन भारतीय आध्यात्मिक विरासत को सहेजने का सशक्त प्रयास है।
उन्होंने कहा—
शिक्षा से छात्र बनाए जा सकते हैं, परंतु श्रवण कुमार जैसे संस्कार ऐसे आयोजनों से ही विकसित होते हैं।
डॉ. शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वगुरु भारत के स्वप्न को ऐसे सांस्कृतिक प्रयासों से साकार होता बताया।
संत रामा महाराज का संदेश: सच्चा प्रेम क्या है
गुजरात से पधारे संत रामा महाराज ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा—
सच्चा प्रेम त्याग, मर्यादा और सम्मान में निहित होता है।
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे पाश्चात्य प्रभाव से दूर रहकर भारतीय संस्कारों को जीवन में अपनाएँ।
डॉ. अन्ना महाराज का वैश्विक दृष्टिकोण
सद्गुरु माऊली दत्त संत डॉ. अन्ना महाराज ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विश्वभर में होने चाहिए ताकि भारतीय संस्कृति की पैठ वैश्विक स्तर पर बढ़े।
उन्होंने इस आयोजन को “मानवता और परिवार संस्था के पुनर्जागरण का माध्यम” बताया।
वैदिक विधि से हुआ पूजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ।
विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से अपने माता-पिता का पूजन किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में शामिल रहे:
- झाँसी की रानी का शौर्य प्रदर्शन
- माता-पिता समर्पित काव्य पाठ
- गीत एवं नाट्य मंचन
- रामायण प्रस्तुति (जिसने सभा को भावुक कर दिया)
समाज के गणमान्य नागरिकों की सहभागिता
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे:
- श्री आशुतोष झा (बिहार)
- समाजसेवी श्री वीरेंद्र पुराणिक जी
- गुरमुख दास जी
- दयालदास जी
- कमल पूरी महाराज जी
- गणेश गोस्वामी जी
- माधव दास जी झा
अतिथि स्वागत:
- श्री महेश पटेल
- श्री पंकज बुलानी जी
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मातृ-पितृ सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।
भारतीय संस्कृति, परिवार और सद्भावता का संदेश
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में यह आयोजन परिवार संस्था को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।
यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन, पीढ़ियों के संवाद और भावनात्मक जुड़ाव का पर्व है।
ऐसे आयोजन:
- पारिवारिक विघटन रोकते हैं
- युवाओं को पहचान देते हैं
- संस्कृति को व्यवहार में लाते हैं
- समाज में सद्भावता बढ़ाते हैं


