माता-पिता पर मार्मिक प्रवचन देते हुए डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि मां-बाप की सेवा ही सच्ची भक्ति है। महिदपुर रोड की धर्मसभा में सुनाए प्रेरणादायी प्रसंग।
माता-पिता पर मार्मिक प्रवचन: डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने बताए 7 अनमोल संदेश, बोले- मां-बाप की सेवा ही सच्ची भक्ति
महिदपुर रोड। माता-पिता पर मार्मिक प्रवचन देते हुए परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि माता-पिता का स्थान संसार में सबसे ऊंचा है। उन्होंने कहा कि परमात्मा को भी परमात्मा बनाने वाले मां-बाप हैं। माता-पिता के उपकार और ऋणों को मनुष्य जीवनभर कभी नहीं चुका सकता।
महिदपुर रोड स्थित नवीन महाराणा प्रताप बस स्टैंड पर ग्राम पंचायत गोगापुर महिदपुर रोड के आग्रह पर रविवार को धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने नगरवासियों और श्रद्धालुओं को ‘कुदरत का करिश्मा माता-पिता’ विषय पर मार्मिक और प्रेरणादायी प्रवचन दिए।
मां को 68 तीर्थों के समान बताया
माता-पिता पर मार्मिक प्रवचन करते हुए साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि मां वह है जिसके अंदर स्वयं परमात्मा के दर्शन होते हैं। शास्त्रों में मां को 68 तीर्थों की उपमा दी गई है।उन्होंने कहा कि 68 तीर्थों के दर्शन करने से जितना पुण्य प्राप्त होता है, उतना ही पुण्य माता-पिता के चरण स्पर्श करने से प्राप्त होता है। मां-बाप का रिश्ता स्वयं विधाता ने बनाया है, इसलिए इस रिश्ते की तुलना संसार के किसी अन्य रिश्ते से नहीं की जा सकती।
साध्वी जी ने कहा कि पत्नी पसंद से मिलती है, लेकिन माता-पिता सौभाग्य और पूर्व पुण्य से मिलते हैं। इसलिए जीवन में माता-पिता की सेवा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
माता-पिता का रिश्ता सौभाग्य से मिलता है
प्रवचन के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि माता-पिता के उपकारों का ऋण चुकाना संभव नहीं है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने माता-पिता के लिए अपनी चमड़ी उतारकर भी उनके जूते बना दे, तब भी वह उनके उपकारों का ऋण नहीं चुका सकता।उन्होंने कहा कि जिसने माता-पिता को पूज लिया, उसने भगवान को पूज लिया। संसार में एक ही किरदार ऐसा है जो अपने परिवार की सेवा निस्वार्थ भाव से करता है और वह मां का किरदार है।
गणेशजी ने समझाया माता-पिता का महत्व
माता-पिता के महत्व को समझाते हुए साध्वी जी ने भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया।उन्होंने बताया कि भगवान शिव-पार्वती ने अपने पुत्र गणेश और कार्तिकेय से कहा कि जो पृथ्वी की परिक्रमा लगाकर सबसे पहले वापस आएगा, उसका विवाह रिद्धि-सिद्धि से किया जाएगा।
भगवान गणेश ने माता-पिता की ही परिक्रमा कर अपनी यात्रा पूर्ण कर ली। उनका विवाह रिद्धि-सिद्धि से हुआ, क्योंकि गणेशजी जानते थे कि माता-पिता की परिक्रमा ही संपूर्ण सृष्टि की परिक्रमा के समान है।साध्वी जी ने कहा कि जीवन में माता का, महात्मा का और परमात्मा का उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने भावपूर्ण पंक्तियों के माध्यम से कहा—
“ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आसमान कहते हैं, इस जहां में जिसका अंत नहीं उसे मां कहते हैं।”
वृद्धाश्रम की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कलियुग में कई बेटे अपने माता-पिता को वृद्धाश्रम भेज रहे हैं।उन्होंने कहा कि एक मां अपने तीन बेटों को पाल सकती है, लेकिन आज ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है कि तीन बेटे मिलकर भी एक मां की जिम्मेदारी नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से माता-पिता की सेवा, सम्मान और देखभाल को जीवन का महत्वपूर्ण संकल्प बनाने का आह्वान किया।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित
इस मंगलकारी कार्यक्रम में साधार्मिक भक्ति, प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ सुनील कुमार एवं शुभम कुमार मूणत परिवार द्वारा लिया गया। वहीं प्रभावना का लाभ ग्राम पंचायत गोगापुर महिदपुर रोड की ओर से लिया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक एवं जैन समाज गौरव दिनेश जैन बौस, ग्राम पंचायत गोगापुर की सरपंच रितु सत्यनारायण पाटीदार, पत्रकारगण, महिदपुर रोड नगर के समस्त ग्रामवासी, प्रबुद्धजन तथा जैन श्री संघ महिदपुर रोड, जावरा, बप्पैया और डेलची आदि श्री संघ के सदस्य उपस्थित रहे और धर्मलाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में ग्राम पंचायत सरपंच रितु सत्यनारायण पाटीदार ने धर्मसभा में पधारे सभी नगरवासियों, श्रद्धालुओं, संत समाज एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया।


