Manmad-Indore रेल लाइन परियोजना को मिली रफ्तार, वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू
309 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के लाखों लोगों को मिलेगा लाभ
इंदौर। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित Manmad-Indore नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। करीब 309 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना के लिए वन भूमि से जुड़ी प्रक्रिया अब आगे बढ़ने लगी है। परियोजना के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कुल 349.7890 हेक्टेयर वन भूमि चिन्हित की गई है, जिसके हस्तांतरण की प्रक्रिया विभागीय स्तर पर शुरू की जाएगी।
रेल परियोजना के धरातल पर आगे बढ़ने से क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी है। माना जा रहा है कि इस रेल लाइन के पूरा होने के बाद निमाड़, मालवा और उत्तर महाराष्ट्र के लाखों लोगों को बेहतर और तेज रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
छह जिलों से होकर गुजरेगी परियोजना
मनमाड़-इंदौर रेल लाइन परियोजना के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई जिलों में जमीन की आवश्यकता निर्धारित की गई है। वन भूमि से संबंधित प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई शुरू होने के बाद परियोजना को नई गति मिलने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में कुल 142.4867 हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 207.3023 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता है।
महाराष्ट्र के:
- नासिक जिले में 13.8247 हेक्टेयर
- धुले जिले में 128.6620 हेक्टेयर
वन भूमि परियोजना के लिए प्रस्तावित की गई है।
वहीं मध्य प्रदेश के:
- इंदौर जिले में 14.6680 हेक्टेयर
- खरगोन जिले में 31.0807 हेक्टेयर
- धार जिले में 76.4503 हेक्टेयर
- बड़वानी जिले में 65.2110 हेक्टेयर
वन भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है।
निमाड़, मालवा और महाराष्ट्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग
मनमाड़-इंदौर रेल संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे ने बताया कि यह रेल परियोजना निमाड़, मालवा और उत्तर महाराष्ट्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग रही है। इस रेल लाइन के निर्माण से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और व्यापार, उद्योग, कृषि तथा पर्यटन के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे।
इंदौर सहित कई जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन, धुले, नासिक और मनमाड़ सहित आसपास के क्षेत्रों को सीधा रेल संपर्क मिलेगा।
वर्तमान में कई क्षेत्रों के लोगों को लंबी दूरी तय कर रेल सुविधाओं तक पहुंचना पड़ता है। नई रेल लाइन बनने से यात्रा का समय कम होगा और लोगों को सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था मिलेगी।
इसके अलावा माल परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामान और अन्य व्यापारिक गतिविधियों के लिए यह रेल मार्ग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में बेहतर रेल नेटवर्क आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार होता है। मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस रेल लाइन से:
- उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी,
- किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी,
- पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी,
- रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
महू क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू
रेलवे ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, महू क्षेत्र के 18 गांवों के 943 किसानों की 131.49 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
रेलवे ने प्रभावित किसानों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद जमीन अधिग्रहण की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जमीन का अवॉर्ड जारी होने के बाद कब्जा लेने की कार्रवाई की जाएगी।
ड्रोन सर्वे और जियो टैगिंग का काम शुरू
परियोजना के लिए रेलवे ने तकनीकी कार्य भी शुरू कर दिए हैं। मनमाड़ से महू तक प्रस्तावित रेल लाइन के लिए ड्रोन सर्वे और जियो टैगिंग का काम किया जाएगा।
इसके लिए रेलवे ने करीब 77 लाख रुपये के टेंडर जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि मनमाड़ की ओर से यह कार्य शुरू हो चुका है।
ड्रोन सर्वे के माध्यम से जमीन की वास्तविक स्थिति, मार्ग निर्धारण और अन्य तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
जल्द शुरू हो सकता है निर्माण कार्य
जमीन अधिग्रहण और सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और इसके बाद पटरियां बिछाने का काम शुरू किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक प्रक्रियाओं में कुछ समय लग सकता है, लेकिन परियोजना को गति देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मनमाड़-इंदौर रेल लाइन परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और लाखों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
