सारंगपुर में पहली बार चातुर्मास का शुभारंभ, मुनि श्री 108 प्रवर सागर महाराज के सान्निध्य में विधिवत सम्पन्न हुई मंगल कलश स्थापना
धर्म, साधना और आत्मकल्याण का सर्वोत्तम काल है चातुर्मास, सारंगपुर बनेगा आध्यात्मिक जागरण का केंद्र : मुनि प्रवर सागर महाराज
संवाददाता : मनोज कुमार पुष्पद
सारंगपुर (राजगढ़)। धर्म, तप, संयम और आत्मकल्याण की पावन साधना का पर्व चातुर्मास इस वर्ष सारंगपुर के लिए ऐतिहासिक बन गया। पहली बार नगर को आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 प्रवर सागर महाराज एवं छुल्लक क्षेमंकर नंदी जी ससंघ के पावन वर्षायोग (चातुर्मास) का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज, चातुर्मास समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज सारंगपुर के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय राठी परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच मंगल कलश स्थापना समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
धार्मिक अनुष्ठानों, संगीतमय पूजा, प्रवचनों और कलश स्थापना के साथ संपन्न हुए इस समारोह में सारंगपुर सहित आसपास के अनेक शहरों और गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण णमोकार मंत्र, भक्ति गीतों और धर्ममय उल्लास से गूंजता रहा।
मंगलाचरण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह की शुरुआत बालिका मंडल द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुई। बालिकाओं ने भक्ति गीतों और स्तुतियों के माध्यम से ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि पूरा परिसर भक्तिभाव से सराबोर हो गया।
इसके बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी, आचार्य विराग सागर जी तथा आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज के चित्रों का दीप प्रज्ज्वलन एवं अनावरण किया गया।
यह शुभ कार्य राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल, नगर पालिका अध्यक्ष पंकज पालीवाल, सकल जैन समाज अध्यक्ष नरेन्द्र जैन, महेश पुष्पद एवं गोपाल वैद्य ने संयुक्त रूप से संपन्न किया।
इसके पश्चात अतिथियों एवं समाज के वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था, बड़ी संख्या में पहुंचे समाजजन
चातुर्मास कलश स्थापना समारोह में सारंगपुर सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
इस अवसर पर पूर्व सकल जैन समाज अध्यक्ष निर्मल जैन, महावीर अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर अध्यक्ष निर्मल जैन, सुधीर श्रीमाल, नगर पालिका उपाध्यक्ष भावना वर्मा, नीलेश वर्मा, प्रदीप सादानी, कैलाश सोनी सहित दिगंबर जैन समाज के अनेक पदाधिकारी, महिला-पुरुष, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे।
समारोह में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक अवसर को और भी भव्य बना दिया।
धर्म की प्रभावना का सर्वोत्तम समय है चातुर्मास : मुनि प्रवर सागर महाराज
चातुर्मास कलश स्थापना समारोह को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री 108 प्रवर सागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास का समय धर्म, साधना, स्वाध्याय, संयम और आत्मकल्याण का सर्वोत्तम अवसर होता है।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु के दौरान संत एक स्थान पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को धर्मोपदेश देते हैं। इस अवधि में धर्म की प्रभावना अत्यंत व्यापक रूप से प्रवाहित होती है और लोगों को संतों के सान्निध्य में रहकर अपने जीवन को संस्कारित करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि जहां संतों का निवास होता है, वहां स्वतः ही धर्म, सदाचार, संस्कार और आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण होता है।
सारंगपुर की भूमि अत्यंत पुण्यशाली है
अपने प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि सारंगपुर की धरती अत्यंत पुण्यशाली है।
उन्होंने कहा कि यहां मूलनायक भगवान कमलासन विराजमान हुए, तभी से इस क्षेत्र में धर्म की प्रभावना निरंतर बढ़ती चली गई।
उन्होंने कहा कि यह केवल संयोग नहीं है, बल्कि यहां के समाज की श्रद्धा, भक्ति और पूर्व जन्मों के पुण्यों का परिणाम है कि नगर को पहली बार चातुर्मास का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि किसी भी नगर को संतों का वर्षायोग सहजता से प्राप्त नहीं होता। इसके पीछे समाज की आस्था, समर्पण और सामूहिक पुण्य का बड़ा योगदान होता है।
सारंगपुर बनेगा धार्मिक जागरण का नया केंद्र
मुनि प्रवर सागर महाराज ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सारंगपुर का यह पहला चातुर्मास भविष्य में नई धार्मिक परंपरा की शुरुआत बनेगा।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आज समाज एकजुट होकर धर्म आराधना में सहभागी बना है, उसी प्रकार आने वाले वर्षों में भी यहां नियमित रूप से चातुर्मास आयोजित होंगे।
उन्होंने कहा कि यह नगर आने वाले समय में साधना, स्वाध्याय, संयम, तप और आध्यात्मिक जागरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
उन्होंने समाज से आग्रह किया कि चातुर्मास के चार महीनों का अधिकतम लाभ उठाते हुए प्रवचन, स्वाध्याय, पूजा, तप, दान और सेवा जैसे धार्मिक कार्यों में अधिकाधिक भाग लें।
राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने किया पाद प्रक्षालन
समारोह के दौरान मध्यप्रदेश शासन के राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने मुनि प्रवर सागर महाराज का विधिवत पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके बाद विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर मुनि श्री का आशीर्वाद लिया।
श्रद्धालुओं की लंबी कतारें पूरे समय बनी रहीं और सभी ने श्रद्धापूर्वक धर्मलाभ प्राप्त किया।
संगीतमय पूजा और शास्त्र भेंट ने बढ़ाई भक्ति की गरिमा
कार्यक्रम के दौरान आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज की संगीतमय पूजा संपन्न हुई।
भक्ति गीतों और स्तुतियों के साथ श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह से पूजा में भाग लिया।
इसके बाद समाजजनों द्वारा शास्त्र भेंट की गई और धर्मग्रंथों के संरक्षण तथा अध्ययन का संकल्प लिया गया।
धार्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।
विधिवत सम्पन्न हुई मंगल कलश स्थापना
समारोह का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण मंगल कलश स्थापना रहा।
मंगल कलश की बोली सम्पन्न होने के बाद पूज्य मुनि श्री के सान्निध्य में वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुसार विधिवत कलश स्थापना की गई।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंगल गीतों के बीच धर्म की प्रभावना और समाज की समृद्धि की कामना की।
कलश स्थापना के साथ ही सारंगपुर में चातुर्मास का विधिवत शुभारंभ हुआ।
श्वेतांबर जैन समाज ने भी दी श्रद्धा की अभिव्यक्ति
कार्यक्रम की विशेषता यह भी रही कि श्वेतांबर जैन समाज के प्रतिनिधियों ने भी समारोह में सहभागिता निभाई।
उन्होंने मुनि श्री को श्रीफल अर्पित कर चातुर्मास के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।
यह दृश्य जैन समाज की एकता, पारस्परिक सम्मान और धार्मिक समरसता का सुंदर उदाहरण बना।
समाज ने पूर्ण श्रद्धा के साथ निभाई सहभागिता

चातुर्मास कलश स्थापना समारोह के अवसर पर दिगंबर जैन समाज द्वारा अपने प्रतिष्ठान पूर्णतः बंद रखे गए, ताकि अधिक से अधिक समाजजन कार्यक्रम में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त कर सकें।
श्रद्धालुओं ने पूरे दिन विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया और चातुर्मास के सफल आयोजन की मंगलकामना की।
मनोज जैन ने किया संचालन
पूरे समारोह का प्रभावी एवं सुव्यवस्थित संचालन दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष मनोज जैन ने किया।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी संतों, अतिथियों, समाजजनों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सारंगपुर के लिए यह चातुर्मास ऐतिहासिक अवसर है और समाज इसे पूरी श्रद्धा, अनुशासन एवं समर्पण के साथ सफल बनाएगा।
सारंगपुर के धार्मिक इतिहास में जुड़ा नया अध्याय
सारंगपुर में पहली बार आयोजित चातुर्मास और मंगल कलश स्थापना समारोह ने नगर के धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति, संतों के प्रेरणादायी प्रवचन, संगीतमय पूजा, कलश स्थापना और समाज की एकजुटता ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
पूज्य मुनि श्री 108 प्रवर सागर महाराज के सान्निध्य में प्रारंभ हुआ यह चातुर्मास आने वाले चार महीनों तक धर्म, साधना, स्वाध्याय, तप और आध्यात्मिक जागरण का केंद्र रहेगा। समाजजनों का विश्वास है कि इस ऐतिहासिक चातुर्मास से न केवल सारंगपुर में धार्मिक चेतना का विस्तार होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह नगर दिगंबर जैन समाज की महत्वपूर्ण धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी बनेगा।
