मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा को लेकर हार्दिक हुंडिया ने रमेश मुथा एंड कंपनी और अशोक सागर से जुड़े आयोजन पर सवाल उठाए। जानिए क्या हैं उनके प्रमुख सवाल।
मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा पर हार्दिक हुंडिया के 7 बड़े सवाल, बोले- शिथिलाचार को बढ़ावा क्यों?
मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा को लेकर जैन समाज में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जैन समाज से जुड़े हार्दिक हुंडिया ने मुंबई में मांडवगढ़ के दादा की प्रतिष्ठा को लेकर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों और उससे जुड़े निर्णयों पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने देशभर के जैन संघों से इस विषय पर विचार करने और किसी भी ऐसे कदम से बचने की अपील की है, जिससे उनके अनुसार धार्मिक मर्यादाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
हार्दिक हुंडिया ने अपने बयान में कहा कि प्राचीन तीर्थ मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा किसके हाथों से कराई जा रही है और इसके पीछे क्या सोच है, इस पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से अशोक सागर जी और रमेश मुथा एंड कंपनी से जुड़े आयोजन को लेकर अपनी आपत्ति और सवाल सामने रखे हैं।
मुंबई में जाजम कार्यक्रम को लेकर सवाल
हार्दिक हुंडिया का कहना है कि यदि अशोक सागर जी के नाम से धन एकत्र करने में कठिनाई आ रही है तो क्या अब मुंबई में मांडवगढ़ के दादा के नाम पर जाजम कार्यक्रम आयोजित कर धन एकत्र करने का रास्ता अपनाया जा रहा है?उन्होंने सवाल किया कि यदि वास्तव में मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा अशोक सागर जी के हाथों से करानी है, तो उनके अनुसार उनकी निश्रा में जाजम का कार्यक्रम क्यों नहीं आयोजित किया जाता?उनका कहना है कि समाज के सामने इस पूरे आयोजन और धन संग्रह की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए।
साधु-संतों की भूमिका पर भी उठे सवाल
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि मुंबई के पार्ले क्षेत्र में मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा को लेकर होने वाले कार्यक्रम में यदि साधु-संत शामिल होते हैं, तो समाज के सामने यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उनकी भूमिका क्या है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के आचरण को लेकर समाज में आपत्तियां या चर्चाएं हैं, तो ऐसे व्यक्ति से जुड़े धार्मिक आयोजन में साधु-संतों की उपस्थिति को किस दृष्टि से देखा जाना चाहिए।हार्दिक हुंडिया ने कहा कि यदि साधु-संत केवल मांडवगढ़ के दादा की प्रतिष्ठा के लिए कार्यक्रम में जा रहे हैं, तो फिर प्रतिष्ठा की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को क्यों दी जा रही है, जिसे लेकर समाज में सवाल उठ रहे हैं?
शिथिलाचार को लेकर हार्दिक हुंडिया की चिंता
अपने बयान में हार्दिक हुंडिया ने जैन साधु-संतों के महाव्रत और धार्मिक मर्यादाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में यदि किसी प्रकार के शिथिलाचार को बढ़ावा मिलता है तो भविष्य में इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।उन्होंने पार्ले के जाजम कार्यक्रम में जाने वाले महाव्रतधारी साधु-संतों से भी इस विषय पर विचार करने की अपील की।उनका सवाल है कि यदि कोई व्यक्ति केवल तीर्थ की प्रतिष्ठा के उद्देश्य से कार्यक्रम में जा रहा है, तो क्या प्रतिष्ठा के लिए किसी ऐसे साधु या धार्मिक प्रतिनिधि का चयन नहीं किया जा सकता जो भगवान की आज्ञा और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप जीवन जीने के लिए समाज में स्वीकार्य हो?
रमेश मुथा से धनराशि को लेकर सवाल
हार्दिक हुंडिया ने रमेश मुथा से सीधे सवाल करते हुए कहा कि आज तक मांडवगढ़ के दादा के मंदिर के लिए अशोक सागर जी के माध्यम से कितनी राशि प्राप्त हुई और उसमें से कितनी राशि खर्च की गई, इसकी जानकारी समाज के सामने रखी जानी चाहिए।उन्होंने यह भी सवाल किया कि श्रद्धालुओं और समाज के लोगों ने धन मांडवगढ़ के दादा के मंदिर के लिए दिया या फिर किसी व्यक्ति विशेष के नाम और प्रभाव को देखकर दिया?हार्दिक हुंडिया के अनुसार, धार्मिक कार्यों में पारदर्शिता समाज के विश्वास के लिए बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि आय और व्यय का स्पष्ट विवरण समाज के सामने रखा जाता है तो कई तरह की चर्चाओं और शंकाओं को समाप्त किया जा सकता है।
“मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा” को लेकर सबसे बड़ा सवाल
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि मांडवगढ़ एक अनमोल तीर्थ है और इसकी महिमा किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं है। उनके अनुसार, यदि प्रतिष्ठा भगवान की आज्ञा के अनुसार चलने वाले किसी भी साधु-संत के सान्निध्य में कराई जाती तो भी समाज पूरी श्रद्धा के साथ सहयोग करता।उन्होंने सवाल किया कि फिर मांडवगढ़ की प्रतिष्ठा को लेकर किसी विशेष व्यक्ति को ही आगे रखने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है?उन्होंने रमेश मुथा से अपील करते हुए कहा कि समाज के सामने यह स्पष्ट किया जाए कि इस निर्णय के पीछे धार्मिक उद्देश्य क्या है और कहीं किसी प्रकार का व्यक्तिगत स्वार्थ तो नहीं है।
देशभर के जैन संघों से विचार करने की अपील
हार्दिक हुंडिया ने देश के तमाम जैन संघों और समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वे इस पूरे विषय पर शांतिपूर्वक और धार्मिक दृष्टि से विचार करें।उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान करना नहीं, बल्कि जैन धर्म की मर्यादा और तीर्थों की प्रतिष्ठा को लेकर समाज में जागरूकता पैदा करना है।अंत में हार्दिक हुंडिया ने कहा कि यदि उनके सवालों में कोई तथ्यात्मक त्रुटि है तो संबंधित पक्ष समाज के सामने उसका स्पष्टीकरण दे सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम, पारदर्शिता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।हार्दिक हुंडिया ने अपने संदेश का समापन इन शब्दों के साथ किया कि समाज किसी भी ऐसे कार्य से बचे जिससे धार्मिक मर्यादाओं को ठेस पहुंचे और सभी के लिए सद्बुद्धि की भावना रखी जाए।
रिपोर्टर/लेखक: हार्दिक हुंडिया
