जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन, चिकली में बावड़ी उत्सव का आयोजन
संवादाता : सावन जाट मनावर
Manawar विकासखंड के ग्राम चिकली में जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन अवसर पर “बावड़ी उत्सव” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाना और प्राचीन जल स्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा देना रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नवांकुर संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्राचीन बावड़ी में श्रमदान और पूजा
कार्यक्रम की शुरुआत गांव में स्थित प्राचीन बावड़ी के आसपास सामूहिक श्रमदान से हुई। ग्रामीणों ने मिलकर बावड़ी परिसर की साफ-सफाई की और जल स्रोत को पुनर्जीवित करने में योगदान दिया। इसके बाद बावड़ी की विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती की गई, जिसमें जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का संदेश दिया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प भी लिया।
संगोष्ठी में अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत
बावड़ी के समीप स्थित हनुमान एवं शिव मंदिर परिसर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत से हुआ, जहां उन्हें श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। विकासखंड समन्वयक भुवान सिंह गेहलोत ने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 19 मार्च से 30 जून तक चले इस अभियान में कई चरणों में जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत जल स्रोतों की साफ-सफाई, गहरीकरण, वृक्षारोपण, जल प्याऊ स्थापना, जल संवाद और प्राचीन बावड़ियों के पुनर्जीवन जैसे कार्य किए गए। नवांकुर संस्थाओं, प्रस्फुटन समितियों और सीएमसीएलडीपी छात्रों ने इसमें सक्रिय भूमिका निभाई।

जल संरक्षण पर जनप्रतिनिधियों के विचार
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व जनपद पंचायत सदस्य लाल सिंह डावर ने कहा कि इस अभियान से ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति वास्तविक जागरूकता आई है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को नियमित रूप से जारी रखना चाहिए, क्योंकि जल प्रबंधन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि सामूहिक भागीदारी से ही संभव है।
विशेष अतिथि भेरू सिंह पटेल ने कहा कि “जल है तो जीवन है” आज के समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई गांवों में गर्मियों के दौरान जल संकट गहराता जा रहा है, जिसका मुख्य कारण वनों की कमी, वर्षा जल का संरक्षण न होना और जल स्रोतों की उपेक्षा है।
सामाजिक संस्थाओं और युवाओं की भागीदारी
कार्यक्रम में विभिन्न नवांकुर संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही। वंदे मातरम् समाज कल्याण समिति, मां नर्मदा सेवा एवं जनकल्याण समिति सहित कई संगठनों ने जल संरक्षण अभियान में सहयोग दिया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि गांव स्तर पर जल संरक्षण की गतिविधियों से लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ी है। युवाओं ने भी श्रमदान और आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
160 ग्रामीणों की सहभागिता
बावड़ी उत्सव कार्यक्रम में लगभग 160 ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर जल संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस अवसर पर ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ। आयोजन के दौरान सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे भविष्य में जल स्रोतों की रक्षा करेंगे और उन्हें स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे।
ग्रामीणों ने यह भी माना कि जल संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। उपस्थित लोगों ने प्राचीन बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों के पुनर्जीवन को समय की आवश्यकता बताया और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी करार दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से यह संकल्प दोहराया कि वे अपने गांव और क्षेत्र में जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएंगे, ताकि भविष्य में जल संकट की समस्या को कम किया जा सके और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन बना रहे।

कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का सफल संचालन जगदीश भवेल द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाते हुए सभी गतिविधियों का समन्वय किया। उन्होंने वक्ताओं को आमंत्रित करने से लेकर संगोष्ठी और श्रमदान से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को प्रभावी तरीके से संचालित किया। इसके बाद आभार प्रदर्शन प्रवीण दास बैरागी द्वारा किया गया, जिन्होंने सभी अतिथियों, ग्रामीणों, सामाजिक संस्थाओं, युवाओं एवं सहयोगी संगठनों का धन्यवाद व्यक्त किया।
अपने आभार संबोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जन-जागरूकता एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि जल संरक्षण को केवल एक अभियान न मानकर इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम निरंतर रूप से आयोजित किए जाने चाहिए ताकि समाज में पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बनी रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
