लक्ष्मी नारायण मानव सेवा संस्थान द्वारा आयोजित सर्वधर्म निशुल्क कन्या विवाह में अंतराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना महासभा इंदौर द्वारा ४० जोड़ो का कन्यादान कर पुण्य हासिल किया । कार्यक्रम के आयोजक श्रीमान किशनसिंह चौहान( शेरू)भैया का धन्यवाद किया ।
- वर्ष—14 |
- आयोजन तिथि—23 नवंबर 2025
- स्थान—इंदौर |
- सहयोग—दानदाताओं एवं समाजसेवियों का आशीर्वाद
समाजसेवा का वास्तविक अर्थ तभी साकार होता है जब समाज के सबसे कमजोर वर्ग को संबल, सम्मान और सुरक्षा दी जाए। इसी दिव्य भावना को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना महासभा, इंदौर द्वारा इस वर्ष भी “नर सेवा नारायण सेवा” के संकल्प के अंतर्गत 40 दिव्यांग, अनाथ, गरीब एवं बेसहारा कन्याओं के सामूहिक विवाह का भव्य आयोजन किया गया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि मानवता के उत्थान का एक प्रेरणादायी उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। वर्ष 14 में प्रवेश कर चुका यह विवाह महोत्सव प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक चेतना और सामाजिक सहयोग का आदर्श मंच बन चुका है।
कन्यादान—सभी वीरांगनाओं का सामूहिक संकल्प
इस पावन अवसर पर महासभा की सभी पदाधिकारी एवं सदस्याएँ एकजुट होकर उपस्थित रहीं। कन्याओं के विवाह से पहले संपन्न हुए कन्यापूजन कार्यक्रम ने माहौल को धर्म, आस्था और कर्तव्य के भावों से भर दिया। सभी वीरांगनाओं ने मिलकर कन्या पूजन कर अतुलनीय पुण्य अर्जित किया, जो इस समारोह की सबसे हृदयस्पर्शी झलक रही।
अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना महासभा इंदौर—उपस्थित पदाधिकारियों की विशेष भूमिका
कार्यक्रम में संगठन के सभी प्रमुख पदाधिकारी बड़े उत्साह, जिम्मेदारी और भावनात्मक समर्पण के साथ उपस्थित रहे।
प्रदेश अध्यक्ष एवं वाइस प्रेसिडेंट—वंदना सिंह
महासभा की प्रेरणास्रोत एवं ऊर्जा का केंद्र कहलाने वाली वंदना सिंह जी ने पूरे आयोजन का नेतृत्व किया। पिछले कई वर्षों से वह कन्या विवाह जैसे सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उनका उद्देश्य है—
“हर वह बेटी जिसके पास सहारा नहीं, उसे सम्मान के साथ जीवन की नई शुरुआत दी जाए।”
संभाग अध्यक्ष—रानी चंदेल
रानी चंदेल जी ने आयोजन की पूरी व्यवस्थाओं, आवश्यक समन्वय और कन्याओं की सुरक्षा एवं देखरेख का उत्तरदायित्व संभाला। समारोह की प्रत्येक प्रक्रिया में उनका सतत योगदान देखने योग्य रहा।
जिलाध्यक्ष—अर्चना ठाकुर
जिलाध्यक्ष के रूप में अर्चना ठाकुर जी ने पूरी टीम को संगठित किया और प्रत्येक कन्या के विवाह की व्यवस्था—कपड़े, गृहस्थी सामग्री, विधि-विधान—सुनिश्चित करायी।
कोषाध्यक्ष—रितिका गौर
सभी आर्थिक व्यवस्थाओं, दानदाताओं के सहयोग, सामान की खरीद और वित्तीय पारदर्शिता को बनाए रखने में रितिका गौर जी की विशेष भूमिका रही।
जनसंपर्क सचिव—आरती भदौरिया
कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार, मीडिया समन्वय, जनसम्पर्क और सामाजिक संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने का कार्य आरती भदौरिया जी ने अत्यंत सशक्त रूप से निभाया।
उपाध्यक्ष—ज्योत्सना बीसेन, मंगला ठाकुर, किरण तोमर
इन तीनों पदाधिकारियों ने कन्याओं की व्यवस्था, विवाह संस्कार, भोजन व्यवस्था, अतिथि सत्कार और संपूर्ण आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संगठन सचिव—मंगला ठाकुर
महासभा के सामाजिक कार्यों में अग्रणी मंगला ठाकुर जी ने आयोजन की प्रशासनिक तैयारियों, महिला सदस्यों के समन्वय और कार्यक्रम की सटीक व्यवस्था को सफल बनाया।
संयुक्त सचिव—पल्लवी चौहान
पल्लवी जी ने कन्याओं और उनके परिवारों से संपर्क, दस्तावेज़ सत्यापन और विवाह सामग्री की सूची तैयार करने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
बिना किसी जाति-धर्म भेदभाव के “सर्वधर्म विवाह” सम्पन्न
इस विवाह समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह आयोजन सर्वधर्म नि:शुल्क सामूहिक विवाह परंपरा के अनुरूप किया गया।
- किसी प्रकार का शुल्क नहीं
- न जाति-धर्म का भेद
- न किसी प्रकार का सामाजिक विभाजन
हर कन्या को समान सम्मान, समान सामग्री और समान विधि से विवाह संस्कार के माध्यम से विदा किया गया।
कन्याओं को प्रदान की गई सामग्री
संगठन की समिति द्वारा प्रत्येक कन्या को गृहस्थी की शुरुआती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सामग्री का सेट प्रदान किया गया, जिसमें शामिल थे—
- पूरे विवाह के वस्त्र
- बर्तन सेट
- किचन गैस स्टोव
- चादर, कंबल
- अलमारी
- सिलाई मशीन (जरूरत अनुसार)
- आभूषण व धार्मिक सामग्री
- जीवन उपयोगी गृहस्थी सामान
हर दानदाता का सहयोग इस आयोजन की रीढ़ साबित हुआ, जिनके आशीर्वाद से यह कार्यक्रम अत्यंत गरिमामयी तरीके से सम्पन्न हो पाया।
विवाह समारोह का भव्य आयोजन—मानवता की मिसाल
23 नवंबर 2025 को हुए इस आयोजन में हजारों की संख्या में समाजसेवी, माताएँ-बहनें, दानदाता, सामाजिक संगठन और शहरवासियों ने उपस्थित होकर इन कन्याओं के जीवन की नई शुरुआत का आशीर्वाद दिया।
संगीत, हल्दी, मेहंदी और पारंपरिक वैदिक विधियों के साथ किए गए विवाह ने समारोह को अत्यंत शुभ, पावन और भावनात्मक रूप दिया।
सहयोग और सद्भाव का ऐसा वातावरण शायद ही कहीं और देखने को मिले।
समाज को दिया एक बड़ा संदेश—“एक बेटी नहीं, 40 घरों में नई रोशनी”
इस आयोजन ने प्रमाणित किया कि—
👉 अगर समाज एकजुट हो जाए तो कोई बेटी बेसहारा नहीं रहती।
👉 संगठन की निष्ठा और दानदाताओं का सहयोग मिलकर चमत्कार कर सकते हैं।
👉 निशुल्क सामूहिक विवाह सिर्फ आयोजन नहीं, सामाजिक आंदोलन है।
अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना महासभा इंदौर ने मानवता, सहानुभूति और सेवा के अपने मूल्य को एक बार फिर चरितार्थ किया।
निष्कर्ष—“नर सेवा नारायण सेवा” का साकार उदाहरण
40 गरीब, दिव्यांग, अनाथ और बेसहारा कन्याओं के विवाह का यह आयोजन एक बार फिर साबित करता है कि—
“जहाँ सेवा होती है, वहाँ भगवान बसते हैं।”
महासभा की सभी पदाधिकारी बहनों और दानदाताओं को इस पावन कार्य का सच्चा साधक माना जाएगा।
यह आयोजन न सिर्फ एक कार्यक्रम था, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा, एक संदेश और मानवता के प्रति समर्पण का सजीव प्रमाण है।




