भालू विचरण क्षेत्र में झोपड़ियों में रह रहे परिवार, सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
खांड़ा में पहाड़ के नीचे बाहरी परिवारों के ठहरने का मामला; वन विभाग को सूचना देने के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल
Anuppur । खांड़ा क्षेत्र में भालू विचरण क्षेत्र के बीच पहाड़ के नीचे झोपड़ियां बनाकर परिवारों के रहने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत खांड़ा से मिली जानकारी के अनुसार, शिवपुरी जिले के गोदरी क्षेत्र से आए कुछ लोग यहां झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं। बताया गया है कि इन परिवारों में छोटे बच्चे भी शामिल हैं। ऐसे में क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को लेकर लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राम पंचायत खांड़ा की सरपंच कमला सिंह और सचिव गोरेलाल केवट द्वारा मौके का पंचनामा तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। पंचनामा में मौके पर मौजूद लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं। पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि उन्हें अनूपपुर के ठेकेदार लकी वर्मा द्वारा काम के लिए यहां लाया गया है।
भालू विचरण क्षेत्र में झोपड़ियां बनाने की अनुमति पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जिस स्थान पर ये परिवार रह रहे हैं, वह वनभूमि के दायरे में आता है। हालांकि भूमि की वास्तविक स्थिति और वहां झोपड़ियां बनाने की अनुमति से संबंधित स्थिति जांच का विषय है।
क्षेत्र को भालू विचरण क्षेत्र माना जाता है और यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बनी रहती है। ऐसे में परिवारों, विशेषकर छोटे बच्चों के इस स्थान पर रहने को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग को मौके की स्थिति की जांच कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
रेंजर को सूचना देने का दावा
पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं पूर्व अनूपपुर विधायक प्रत्याशी रमेश सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित वन विभाग के रेंजर को फोन पर इसकी जानकारी दी थी। उनके अनुसार, उन्होंने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया था।

रमेश सिंह का आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद मौके पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि भालू विचरण क्षेत्र में परिवारों और छोटे बच्चों का इस तरह रहना सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय है। यदि विभाग को जानकारी मिलने के बाद भी समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते हैं और कोई अप्रिय घटना होती है, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों में वन विभाग को वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने मौके का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
कई सवालों के जवाब जांच से सामने आएंगे
मामले में यह सवाल उठ रहा है कि यदि वन विभाग को परिवारों के इस स्थान पर रहने की जानकारी दी गई थी, तो उसके बाद क्या कार्रवाई की गई। क्या विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया? क्या वहां रह रहे लोगों को भालू के संभावित खतरे के संबंध में जानकारी दी गई? यदि भूमि वन क्षेत्र में आती है, तो वहां झोपड़ियां किस परिस्थिति में बनीं और लोगों को वहां ठहरने की अनुमति किस स्तर से मिली—इन बिंदुओं की जांच जरूरी है।
वहीं, यदि लोगों को ठेकेदार द्वारा काम के लिए लाया गया है, तो उनके सुरक्षित आवास की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच की आवश्यकता है।
रेंजर ने कहा- सुरक्षित स्थान पर रहने के निर्देश दिए
मामले में अनूपपुर वन विभाग के रेंजर स्वर्ण गौरव सिंह ने बताया, “जानकारी मिलते ही संबंधित लोगों को वहां से हटकर गांव में सुरक्षित स्थान पर मकान लेकर रहने के निर्देश दिए गए हैं।”
वन विभाग के इस बयान के बाद अब यह देखना होगा कि संबंधित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई किस तरह की जाती है और खांड़ा क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को कम करने के लिए विभाग आगे क्या कदम उठाता है।
