MP News: एयर इंडिया से कॉर्निया अब होगी पूरी तरह मुफ्त, Eye बैंक एसोसिएशन के साथ समझौता
भोपाल, MP : देश में नेत्रदान और कॉर्निया ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक बड़ी पहल की गई है। अब नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए एयर इंडिया की उड़ानों का उपयोग पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा। इसके तहत Eye बैंक और अस्पतालों से कॉर्निया के परिवहन पर एयर इंडिया कोई भी कार्गो शुल्क नहीं लेगी। इस समझौते से नेत्रदान के क्षेत्र में एक नया और अहम कदम उठाया गया है, जिससे देशभर के दृष्टिहीन मरीजों को लाभ मिलेगा।
Eye बैंक एसोसिएशन और एयर इंडिया के बीच समझौता
सेंट्रल जोन Eye बैंक एसोसिएशन की चेयरपर्सन उमा झंवर के अनुसार, एयरलाइंस के साथ लंबी बातचीत के बाद यह फैसला संभव हो पाया। इससे नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया को समय पर और बिना किसी अतिरिक्त खर्च के मरीजों तक पहुंचाया जा सकेगा।
भोपाल एम्स के नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. भावना शर्मा ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इससे मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ कम होगा और कॉर्निया ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया अधिक सहज और तेज होगी।
अन्य अंगों के लिए भी मुफ्त परिवहन की आवश्यकता
ऑर्गन डोनेशन के लिए जागरूकता फैलाने वाले डॉ. राकेश भार्गव ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि अन्य एयरलाइंस को भी इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कॉर्निया के साथ-साथ लंग्स, लिवर और हार्ट जैसे जीवनरक्षक अंगों के परिवहन को भी मुफ्त किया जाना चाहिए, क्योंकि इन अंगों का प्रत्यारोपण सीमित समय में करना जरूरी होता है। इसके लिए सरकार और एयरलाइंस को मिलकर एक स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए।
कॉर्निया भेजने पर अब नहीं देना होगा कोई शुल्क
पहले तक एक शहर से दूसरे शहर कॉर्निया भेजने पर लगभग 3,000 से 5,000 रुपये तक का कार्गो शुल्क देना पड़ता था, जिसे मरीज या उनके परिजन चुकाते थे। कई मामलों में निजी अस्पताल यह खर्च और भी ज्यादा वसूलते थे।
नई नीति के तहत यह शुल्क पूरी तरह से समाप्त हो गया है। अब नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया को देश के किसी भी हिस्से में जरूरत पड़ने पर मुफ्त भेजा जा सकेगा।
नेत्रदान की प्रक्रिया और समयसीमा
चिकित्सकों के अनुसार, नेत्रदान मृत्यु के छह घंटे के भीतर किया जाना आवश्यक होता है। कॉर्निया को सुरक्षित रखने के लिए इसे एक दिन से लेकर दो हफ्ते तक स्टोर किया जा सकता है। समय पर कॉर्निया का सुरक्षित परिवहन और ट्रांसप्लांट बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दृष्टिहीन मरीजों की दृष्टि लौटाने में समय की भूमिका अहम होती है।
देश और मध्यप्रदेश में आवश्यकता
वर्तमान में देश में लगभग 4.20 लाख मरीज कॉर्निया ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में हैं। भोपाल में इसकी संख्या लगभग दो हजार बताई जा रही है। इन मरीजों के लिए कॉर्निया का समय पर और सुरक्षित परिवहन एक बड़ी चुनौती रहा है।
आई बैंक और एयर इंडिया के इस समझौते से यह चुनौती काफी हद तक कम हो जाएगी। अब देशभर में नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया जल्दी और सुरक्षित रूप से जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच सकेगा।
पहल का सामाजिक और मानवतावादी महत्व
इस पहल को नेत्रदान और मानवता के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। यह न केवल मरीजों को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
डॉ. भावना शर्मा ने कहा, “यह नीति मरीजों के लिए राहत देने के साथ-साथ परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने में भी मदद करेगी। इससे ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया तेज और सुरक्षित होगी।”
डॉ. राकेश भार्गव ने इसे अन्य अंगों के लिए भी मॉडल बताया और कहा कि सरकार और एयरलाइंस को मिलकर ऑर्गन ट्रांसपोर्टेशन के लिए स्पष्ट और मुफ्त नीति बनानी चाहिए।
भविष्य की संभावनाएँ
आई बैंक और एयर इंडिया की इस पहल के बाद उम्मीद की जा रही है कि देश के अन्य एयरलाइंस भी इसी तरह की सुविधा शुरू करेंगे। इससे नेत्रदान और ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया में तेजी आएगी और अधिक से अधिक मरीजों को लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष
इस पहल से यह साबित होता है कि सर्वोपयोगी और मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाकर समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। कॉर्निया का मुफ्त परिवहन अब केवल सुविधा नहीं बल्कि दृष्टिहीन मरीजों के लिए जीवनदायिनी पहल बन गया है।
Eye बैंक और एयर इंडिया के बीच यह समझौता न केवल नेत्रदान के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा बल्कि देशभर में जागरूकता और सेवा भाव को भी बढ़ावा देगा।
