इंदौर में कीटनाशक कारोबारी संजय अग्रवाल के ठिकानों पर GST का बड़ा छापा — करोड़ों की टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग का संदेह
इंदौर | सेंट्रल जीएसटी (CGST) विभाग ने मंगलवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कीटनाशक कारोबारी संजय अग्रवाल के इंदौर स्थित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई लंबे समय से संदेह के घेरे में चल रही कथित टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग और करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की शिकायतों के आधार पर की गई।
साकेत नगर स्थित आलीशान आवास और छावनी क्षेत्र में संचालित ऑफिस पर एक साथ दबिश देकर विभाग ने कारोबारी को चौंका दिया। छापेमारी की शुरुआत होते ही शहर के व्यापारिक हलकों में हड़कंप मच गया।
सूत्रों के अनुसार, संजय अग्रवाल इंदौर के प्रमुख कीटनाशक और एग्रोकैमिकल उत्पादों के थोक व्यापारियों में से एक हैं, और विभाग को इनके द्वारा की जा रही कथित बिलिंग हेराफेरी की जानकारी लगातार मिल रही थी। पुख्ता सबूत एकत्र होने के बाद ही यह सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
फर्जी बिलिंग और करोड़ों की टैक्स चोरी का शक — जाँच DGGI तक पहुँची
जीएसटी अधिकारियों को संदेह है कि यह मामला केवल छोटे स्तर का टैक्स चोरी प्रकरण नहीं है, बल्कि एक बड़े फर्जी बिलिंग नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है। जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि कारोबारी संजय अग्रवाल इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ लेने के लिए फर्जी कंपनियों के माध्यम से करोड़ों की बोगस बिलिंग कर रहे थे।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम भी इस मामले में सक्रिय रूप से शामिल है, क्योंकि प्रारंभिक इनपुट में संकेत मिले हैं कि यह टैक्स चोरी किसी बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हो सकती है जो कई राज्यों में फैला हुआ है।
अधिकारियों का कहना है कि—
“डिजिटल डेटा की गहन जांच से और महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है। शुरुआती स्तर पर जो जानकारी मिली है, उससे प्रतीत होता है कि टैक्स चोरी का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।”
कारोबारी के ठिकानों से दस्तावेज, लैपटॉप व डिजिटल डिवाइस ज़ब्त
छापेमारी के दौरान टीम ने बड़ी मात्रा में दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री को कब्जे में लिया। इनमें—
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लैपटॉप
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मोबाइल फोन
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पेन ड्राइव
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कंप्यूटर सिस्टम
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अकाउंट बुक
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जीएसटी रजिस्टर
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इनवॉइस फाइलें
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बैंक स्टेटमेंट
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टैली डेटा
जैसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं।
टीम अब डिजिटल फॉरेन्सिक विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितनी रकम फर्जी तरीके से टैक्स लाभ के रूप में प्राप्त की गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
खातों का मिलान शुरू — बिलिंग पैटर्न में गड़बड़ियों के संकेत
छापेमारी के बाद अब विभाग की विशेषज्ञ टीमें इनवॉइस और अकाउंट बुक्स का क्रॉस वेरिफिकेशन कर रही हैं।
जांच में मुख्य रूप से इन पहलुओं पर फोकस किया जा रहा है—
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वास्तविक बिक्री और बिलिंग में अंतर
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बिना वास्तविक माल ख़रीदे ITC क्लेम करना
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फर्जी कंपनियों को बिल जारी करना
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फर्जी GST नंबरों के साथ लेन-देन
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टैक्स चोरी में शामिल सप्लायर्स की पहचान
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स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री के आंकड़ों में असंगतियाँ
अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की आशंका मजबूत होती है।
पूछताछ शुरू — कारोबारी जगत में मचा हड़कंप
CGST और DGGI की टीम ने कारोबारी संजय अग्रवाल से पूछताछ भी शुरू कर दी है। उनसे—
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बिलिंग प्रक्रिया
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सप्लाई चेन
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GST रिटर्न फाइलिंग
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आईटीसी क्लेम
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खरीद और बिक्री का अंतर
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प्रमुख सप्लायर्स और क्लाइंट्स
से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए हैं।
इंदौर के अन्य व्यावसायिक संगठनों में भी इस कार्रवाई के बाद चिंता का माहौल है। कई व्यापारी यह मानकर चल रहे हैं कि विभाग आने वाले दिनों में और भी बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई कर सकता है।
क्या टैक्स चोरी का आंकड़ा करोड़ों में?
सूत्रों के अनुसार—
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विभाग को लगभग ₹10–₹25 करोड़ की संभावित टैक्स चोरी का संदेह है
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फर्जी बिलिंग का आंकड़ा ₹50 करोड़ से अधिक हो सकता है
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ITC फ्रॉड का नेटवर्क कई जिलों और राज्यों तक फैला हो सकता है
हालाँकि, अधिकारी यह भी स्पष्ट करते हैं कि—
“टैक्स चोरी की वास्तविक राशि का पता डिजिटल डेटा और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद ही लगाया जा सकेगा।”
इंदौर में लगातार बढ़ रही हैं GST कार्रवाईयाँ
पिछले कुछ महीनों में इंदौर में GST विभाग ने कई बड़े कारोबारी समूहों, ज्वैलर्स, स्टील व्यापारियों और एग्रोकैमिकल कारोबारियों पर छापेमारी की है।
इंदौर मध्य भारत का बड़ा व्यापारिक केंद्र होने के कारण यहाँ टैक्स चोरी के मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक सामने आती है।
इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि विभाग अब कीटनाशक और एग्रो-इनपुट सेक्टर की कंपनियों पर विशेष नजर रखेगा, क्योंकि इस सेक्टर में फर्जी बिलिंग के कई केस देशभर में पकड़े जा चुके हैं।
जांच जारी — और नाम सामने आने की संभावना
CGST और DGGI की संयुक्त टीमें अब—
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डिजिटल डेटा रिकवरी
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बैंक लेनदेन की जांच
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सप्लाई चेन ट्रेसिंग
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फर्जी कंपनियों की पहचान
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अन्य व्यापारियों की भूमिका
जैसे पहलुओं पर गहराई से काम कर रही हैं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि—
“इस छापेमारी की आंच कई और व्यापारियों तक पहुँच सकती है। आने वाले दिनों में कुछ और ठिकानों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।”
