माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन ने मकर संक्रांति पर तिल-गुड़, भोजन और कंबल वितरण कर मानवता, सेवा और संस्कार की अनुपम मिसाल पेश की।
माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन से शुरू हुई मकर संक्रांति की सेवा गाथा
माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन ने मकर संक्रांति के पावन पर्व पर यह सिद्ध कर दिया कि पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और संस्कार का संगम है। इस आयोजन में समाज द्वारा दरिद्रनारायणों के लिए तिल-गुड़, पोहा, जलेबी, गरम चाय और ठंड से बचाव के लिए कंबलों का वितरण किया गया।
इस सेवा कार्य में समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और यह संदेश दिया कि सच्ची संक्रांति वही है, जिसमें किसी के जीवन में गर्माहट और मुस्कान लाई जाए।
तिल-गुड़ से शुरू हुई सेवा की यात्रा
माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन का शुभारंभ तिल-गुड़ वितरण से हुआ। समाजजनों ने “तिल-गुड़ खाओ, मीठा-मीठा बोलो” की परंपरा को सेवा के भाव से जोड़ा।
“तिल-गुड़ की मिठास संग,
सेवा का हो विस्तार।
सूरज सा उजियारा फैले,
हर जीवन में हो नव-संस्कार॥”
यह पंक्तियां आयोजन के भाव को पूरी तरह व्यक्त कर रही थीं।
जरूरतमंदों के लिए भोजन और कंबल वितरण
कड़ाके की ठंड को देखते हुए माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन के अंतर्गत सैकड़ों जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए। साथ ही पोहा, जलेबी और गरम चाय ने ठंड में राहत और पेट को संतोष दिया।
जरूरतमंदों की आंखों में कृतज्ञता और चेहरे पर मुस्कान इस सेवा का सबसे बड़ा पुरस्कार थी।
समाज पदाधिकारियों और समाजजनों की भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में समाज के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे –
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समाज अध्यक्ष: घनश्याम राठी
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सचिव: प्रतीक गगरानी
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कोषाध्यक्ष: सौरभ मोहता
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वरिष्ठ समाजसेवी: गोविंदलाल मोहता, रमेशचंद्र मोहता, आनंदीलाल गगरानी
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अन्य समाजजन: अशोक बिसानी, झमक राठी, सुभाष गगरानी, महेश झंवर, प्रशांत राठी, विपिन मोहता सहित बड़ी संख्या में समाजजन
सभी ने मिलकर सेवा कार्य को एक आंदोलन का रूप दिया।
सचिव प्रतीक गगरानी का संदेश
समाज सचिव प्रतीक गगरानी ने बताया कि –
“माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन हर वर्ष मकर संक्रांति पर किया जाता है। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी जरूरतमंद ठंड में असहाय न रहे और पर्व की खुशियां सब तक पहुंचें।”
उन्होंने कहा कि सेवा ही समाज की सबसे बड़ी पहचान है।
समाज अध्यक्ष घनश्याम राठी का उद्बोधन
समाज अध्यक्ष घनश्याम राठी ने कहा –
“मकर संक्रांति केवल तिथि नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और समाज को मजबूत बनाने का अवसर है। माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन इसी भावना को जीवंत करता है।”
उन्होंने समाजजनों से अपील की कि इस परंपरा को और मजबूत करें।
वरिष्ठ समाजसेवियों की सहभागिता
वरिष्ठ समाजसेवी गोविंदलाल मोहता, रमेशचंद्र मोहता और आनंदीलाल गगरानी ने स्वयं सेवा कार्य में भाग लेकर युवाओं को प्रेरित किया।
उनका कहना था कि सेवा में उम्र नहीं, केवल भावना देखी जाती है।
युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
इस आयोजन में युवाओं और महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
भोजन वितरण, कंबल बांटना, चाय परोसना – हर कार्य में समाज की बेटियां और युवा सबसे आगे रहे।
यह दृश्य समाज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत था।
सामाजिक समरसता का संदेश
माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया।
इस आयोजन में जाति, वर्ग या भेदभाव का कोई स्थान नहीं था – केवल मानवता थी।
आभार और संकल्प
कार्यक्रम के अंत में समाज पदाधिकारियों ने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया और संकल्प लिया कि भविष्य में भी इसी भावना से सेवा कार्य जारी रहेंगे।
निष्कर्ष: सेवा ही सच्ची संक्रांति
मकर संक्रांति पर आयोजित माहेश्वरी समाज नागदा सेवा आयोजन ने यह साबित कर दिया कि सच्चा पर्व वही है जिसमें किसी के जीवन में राहत, मुस्कान और उम्मीद लाई जाए।
यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

