Maheshwar में मुकेश के अमर गीतों से सजी यादगार संगीत संध्या, देर रात तक सुरों की महफिल में झूमते रहे संगीत प्रेमी
दैनिक स्वराज वाणी जिला ब्यूरो चीफ संवाददाता गौतम साल्वे मंडलेश्वर
Maheshwar। नर्मदा तट की पवित्र और ऐतिहासिक नगरी महेश्वर में बुधवार की शाम संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर लेकर आई। महान पार्श्व गायक मुकेश कुमार की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य संगीत निशा में उनके अमर गीतों की मधुर गूंज देर रात तक वातावरण में बनी रही। गांधी चौक स्थित शारदा सदन ग्रंथालय एवं पर्यटन सुविधा केंद्र में मां रेवा सुर संगम मंच के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी पहुंचे और पुराने दौर के सदाबहार गीतों का आनंद लिया।
कार्यक्रम में ऐसा माहौल बना कि पूरा सभागार संगीत की स्वर लहरियों से सराबोर हो गया। कलाकारों ने मुकेश के लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावनाओं से जोड़ दिया। कई गीतों ने जहां लोगों को पुरानी यादों में पहुंचा दिया, वहीं प्रेम, संवेदना और जीवन दर्शन से जुड़े गीतों ने श्रोताओं को भावुक भी कर दिया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
संगीत संध्या का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। आयोजन में उपस्थित अतिथियों और संगीत प्रेमियों ने भारतीय संगीत परंपरा को याद करते हुए कार्यक्रम की सराहना की। मंच से कलाकारों ने एक के बाद एक लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुनील गाडगे ने प्रसिद्ध गीत “दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई” की प्रस्तुति से की। उनकी आवाज में गीत की भावनाओं को सुनकर श्रोताओं ने तालियों से उनका स्वागत किया। इसके बाद मुकेश हिरवे ने “जो तुमको पसंद वही बात कहेंगे” गीत प्रस्तुत कर संगीत प्रेमियों का मन मोह लिया।
मंडलेश्वर से आए कलाकार नटराज प्रजापति ने “जुबां पे दर्द भरी दास्तां” गीत की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं देवी सिंह ने “जाने कहां गए वो दिन” गीत के माध्यम से पुराने समय की यादों को ताजा कर दिया। हिमांशु मंसोरे ने “चंदन सा बदन” गीत प्रस्तुत कर अपनी गायकी का प्रभाव छोड़ा।
कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
संगीत निशा में शहीद खान ने “तारों में सजके अपने सूरज से मिलने” गीत प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। मनीषा बजाज ने निमाड़ी लोकगीत के साथ-साथ प्रसिद्ध गीत “किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार” प्रस्तुत कर लोक संस्कृति और फिल्मी संगीत का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
रेखा रन्सोरे ने “एक प्यार का नगमा है” गीत की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं यशदीप सेन ने “हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे” गीत गाकर खूब वाहवाही प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान हर कलाकार की प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम का समापन किशोर कुमार के लोकप्रिय गीत “कभी अलविदा ना कहना” के साथ किया गया। इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने संगीत संध्या को एक यादगार अंत दिया।

संगीत ने बांधे सभी को एक सूत्र में
मुकेश कुमार भारतीय सिनेमा के ऐसे महान गायक रहे हैं, जिनकी आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में बसती है। उनकी आवाज में दर्द, प्रेम और भावनाओं की गहराई देखने को मिलती थी। यही कारण है कि उनकी जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में हर उम्र के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में मौजूद युवा, बुजुर्ग और महिलाएं देर रात तक संगीत का आनंद लेते रहे। कई श्रोताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को पुराने दौर के संगीत और महान कलाकारों की विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
अतिथियों ने की आयोजन की सराहना
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अधिवक्ता जितेंद्र नेगी, वरिष्ठ पत्रकार मनोज गौड़ एवं समाजसेवी दिलीप सोनी उपस्थित रहे। अतिथियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि संगीत समाज को जोड़ने का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान करते हैं। साथ ही, यह नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अतिथियों ने मां रेवा सुर संगम मंच की पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि महेश्वर जैसी सांस्कृतिक नगरी में ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहना चाहिए, जिससे कला और संगीत को बढ़ावा मिलता रहे।
भविष्य में भी आयोजन जारी रखने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में मां रेवा सुर संगम मंच के सुनील गाडगे एवं जितेंद्र नेगी ने सभी कलाकारों, सहयोगियों, अतिथियों और संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मंच का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करना और संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाना है।
उन्होंने बताया कि भविष्य में भी मंच द्वारा सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि कलाकारों को मंच मिलता रहे और शहर में कला एवं संस्कृति का वातावरण मजबूत हो।
महेश्वर की इस संगीत संध्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अच्छे संगीत की कोई उम्र नहीं होती। मुकेश के अमर गीतों ने सभी पीढ़ियों के लोगों को एक साथ जोड़ दिया और देर रात तक महेश्वर नगरी सुरों की मधुर धुनों में डूबी रही।

