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महाशिवरात्रि मेला नागदा कवि सम्मेलन में 7 वर्षों बाद ऐतिहासिक वापसी, देर रात गूंजती तालियों ने रचा अविस्मरणीय सांस्कृतिक उत्सव

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Published On: 21 February 2026
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महाशिवरात्रि मेला नागदा कवि सम्मेलन ने वर्षों बाद शानदार वापसी की। ओज, हास्य और देशभक्ति से भरी कविताओं ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।

महाशिवरात्रि मेला नागदा कवि सम्मेलन: वर्षों बाद लौटी साहित्यिक परंपरा, संस्कृति और संवेदना का भव्य संगम

नागदा में आयोजित महाशिवरात्रि मेला नागदा कवि सम्मेलन इस वर्ष शहर की सांस्कृतिक स्मृति में एक ऐतिहासिक आयोजन बनकर उभरा। वर्षों के अंतराल के बाद जब अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का मंच सजा, तो यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का उत्सव बन गया।

नगर पालिका परिषद नागदा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि कविता केवल शब्द नहीं होती—वह समाज की आत्मा होती है।

मां सरस्वती पूजन के साथ गरिमामय शुभारंभ

https://images.timesnowhindi.com/thumb/msid-97310290%2Cwidth-1280%2Cheight-720%2Cresizemode-3/97310290.jpgकार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। यह दृश्य भारतीय परंपरा की उस गहरी जड़ को दर्शाता है जहां साहित्य को साधना माना जाता है।

जनप्रतिनिधियों ने कहा — साहित्य समाज को दिशा देता है

मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। उन्होंने युवाओं को भारतीय साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

नपाध्यक्ष संतोष ओ.पी. गेहलोत ने वर्षों बाद आयोजित इस महाशिवरात्रि मेला नागदा कवि सम्मेलन को नगर की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए इसे परंपरा का पुनर्जीवन बताया।

देशभर के कवियों ने प्रस्तुत की रचनात्मक ऊर्जा

कवि सम्मेलन में प्रस्तुत कविताओं ने कई आयामों को छुआ—

  • राष्ट्रभक्ति की तेजस्विता
  • सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य
  • मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति
  • आधुनिक जीवन की विडंबनाओं का चित्रण

हास्य-व्यंग्य ने बांधा समां

जब हास्य कवियों ने मंच संभाला, तो पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
हास्य ने केवल मनोरंजन नहीं किया बल्कि समाज की वास्तविकताओं पर सोचने को भी मजबूर किया।

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ओजपूर्ण कविताओं से जागा राष्ट्रभाव

देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं ने वातावरण को भावनात्मक ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
श्रोताओं ने खड़े होकर तालियों से कवियों का स्वागत किया।

यह क्षण महाशिवरात्रि मेला नागदा कवि सम्मेलन की आत्मा बन गया।

देर रात तक चलता रहा साहित्य का उत्सव

कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा, लेकिन श्रोताओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
यह दृश्य बताता है कि साहित्य आज भी लोगों के भीतर जीवित है।

प्रशासन और समाज की संयुक्त भागीदारी

कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
एसडीएम, तहसीलदार और नगर पालिका अधिकारियों की उपस्थिति ने आयोजन को संस्थागत समर्थन प्रदान किया।

युवाओं के लिए बना प्रेरणा मंच

आज डिजिटल युग में जहां ध्यान भटकता है, वहां महाशिवरात्रि मेला नागदा कवि सम्मेलन जैसे आयोजन युवाओं को—

  • भाषा से जोड़ते हैं
  • संस्कृति से परिचित कराते हैं
  • अभिव्यक्ति का मंच देते हैं

नागदा में साहित्यिक परंपरा का पुनर्जागरण

यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नागदा में साहित्यिक संस्कृति की पुनर्स्थापना का संकेत था।
स्थानीय नागरिकों ने इसे निरंतर आयोजित करने की मांग भी की।

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भविष्य की दिशा: ऐसे आयोजन क्यों ज़रूरी हैं?

  • सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं
  • पीढ़ियों के बीच संवाद बनाते हैं
  • भाषा और साहित्य को जीवित रखते हैं
  • समाज में सकारात्मक विमर्श को जन्म देते हैं

नागदा से जीवनलाल जैन नागदा की रिपोर्ट।

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