राजगढ़ में महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं शरद पूर्णिमा पर विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन
राजगढ़: महर्षि वाल्मीकि जयंती और शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में सेल्फ डिफेंस एंड मार्शल आर्ट्स एकेडमी, राजगढ़ में भव्य विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह साहित्यिक आयोजन न केवल महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन और योगदान को याद करने का अवसर था, बल्कि भारतीय संस्कृति और साहित्य की अमूल्य धरोहर को भी आम जन तक पहुँचाने का माध्यम बना।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्री बलबहादुर सिंह राठौड़ उपस्थित थे। इसके साथ ही डॉ. आशिष वैद्य और नगर परिषद उपाध्यक्ष श्री दीपक जैन विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री प्रेम कुमार वैद्य ने की। आयोजन का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह और मोतियों की माला पहनाकर किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।
इस अवसर पर मार्शल आर्ट्स एकेडमी के राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके अथक प्रयास, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया। खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देखकर उपस्थित श्रोताओं में गर्व और उत्साह की भावना देखी गई।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा विराट कवि सम्मेलन, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओजस्वी, प्रेरक और हास्यपूर्ण रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने अपने शब्दों और भावों के माध्यम से साहित्यिक वातावरण को जीवंत कर दिया। सम्मेलन में कवियों ने विभिन्न रसों—ओज, हास्य, श्रृंगार और देशभक्ति—में काव्य पाठ प्रस्तुत किया।
मुख्य कवि और उनके योगदान:
- डॉ. शिरीन कुरैशी – शिक्षिका, CM राइज स्कूल, सरदारपुर
- संदीप यादव – हास्य कवि, गायक और शिक्षक, राजगढ़
- आशीष त्रिवेदी – ओज रस के कवि, भोपावर
- अजय पाटीदार – गीतकार (राम गीत और देशभक्ति गीत), बड़वेली, सरदारपुर
- महेश डांगी – हास्य रस के कवि, धार
- श्री हरिनारायण तिवारी – श्रृंगार रस के कवि
इन कवियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी रचनाओं में न केवल साहित्यिक गहराई थी, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता और मानव मूल्यों को भी प्रतिबिंबित कर रही थीं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, अभिभावक, छात्र एवं आम नागरिक उपस्थित थे। इस आयोजन ने न केवल साहित्यिक साधना को बढ़ावा दिया, बल्कि साहित्यिक संवाद और संस्कृति के संवर्धन की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों और अतिथियों को स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र प्रदान किए गए। इस भव्य आयोजन का सफल संचालन धार जिला अध्यक्ष श्री महेश कुमार वर्मा ने किया।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के पदाधिकारियों की उपस्थिति:
इस साहित्यिक आयोजन में ट्रस्ट के पदाधिकारी और सदस्य भी उपस्थित थे, जिनकी उपस्थिति कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा गई। प्रमुख उपस्थित पदाधिकारी थे:
- श्री योगेन्द्र तिवारी – तहसील अध्यक्ष, सरदारपुर
- श्री झमकलाल मारु – तहसील सचिव
- श्री राजू जोशी – जिला महामंत्री
- श्रीमती सीता शर्मा – तहसील महिला अध्यक्ष
- श्रीमती साधना उपाध्याय – तहसील सचिव
- श्री नरेन्द्र सिंह कटारिया – जिला सदस्य
- श्री सुनील फरबदा – जिला सदस्य
- श्री शुभम शर्मा – तहसील सदस्य
राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश:
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने अपने संदेश में कहा,
“महर्षि वाल्मीकि जयंती और शरद पूर्णिमा जैसे पावन पर्व हमें ज्ञान, संस्कृति और कर्तव्यपथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं। भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर ‘रामायण’ के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी ने समाज को सत्य, धर्म और मर्यादा का मार्ग दिखाया। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट सदैव साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। राजगढ़ में आयोजित विराट कवि सम्मेलन साहित्य साधना की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। मैं आयोजन में शामिल सभी सम्मानित अतिथियों, कवियों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और उपस्थित जनों का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।”
कार्यक्रम की सफलता में सहयोग:
इस भव्य आयोजन की सफलता में शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, मनीष गुप्ता, संतोष सिंह पंवार, जीवनलाल जैन, भावेश नाहर, सुश्री आस्था जैन और धार जिले के सभी ऊर्जावान सदस्यों का विशेष योगदान रहा। इन सभी ने लगातार तन, मन और धन से सहयोग किया, जिससे कार्यक्रम समयबद्ध और अत्यंत भव्य रूप से संपन्न हो सका।
इस साहित्यिक कार्यक्रम ने न केवल महर्षि वाल्मीकि जयंती और शरद पूर्णिमा की पावनता को और बढ़ाया, बल्कि राजगढ़ और धार जिले में साहित्यिक चेतना और संस्कृति के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपस्थित श्रोताओं ने कवियों के ओजस्वी काव्य पाठ और प्रेरक प्रस्तुतियों की भरपूर सराहना की।

