उज्जैन महाकाल: Jayaa Ekadashi पर मोगरे से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का महासागर
Ujjain Mahakal Jayaa Ekadashi 2026
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पावन Jayaa Ekadashi पर गुरुवार सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। देर रात से ही भक्त मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर अपने आराध्य देवाधिदेव महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा करते नजर आए। जैसे ही सुबह चार बजे मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।
Jayaa Ekadashi के पावन अवसर पर बाबा महाकाल ने भक्तों को दिव्य और अलौकिक स्वरूप में दर्शन दिए। इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का मोगरे के पुष्पों से आकर्षक शृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भस्म रमाए, त्रिपुंड से सुसज्जित और मस्तक पर महाकाल नाम अंकित स्वरूप में बाबा महाकाल की छवि अत्यंत दिव्य प्रतीत हो रही थी।
तड़के 4 बजे जागे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा जनसैलाब
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि माघ माह शुक्ल पक्ष की जया एकादशी तिथि पर गुरुवार सुबह ठीक 4 बजे भस्म आरती संपन्न हुई। परंपरा अनुसार वीरभद्र जी से आज्ञा लेने के पश्चात मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों द्वारा गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
पूजन की शुरुआत जलाभिषेक से हुई, जिसमें भगवान महाकाल का अभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरि ओम’ मंत्रोच्चार के साथ जल अर्पित किया गया, जिससे पूरा गर्भगृह भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।

नवीन मुकुट और मोगरे से हुआ विशेष शृंगार
अभिषेक और पूजन के पश्चात पुजारियों और पुरोहितों द्वारा बाबा महाकाल का भव्य शृंगार किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरानुसार भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई।
भस्म अर्पण के दौरान झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की गूंज ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं, और यही कारण है कि भस्म आरती के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
आज की भस्म आरती की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि जया एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल का मोगरे के फूलों से शृंगार किया गया। मोगरे की सुगंध और भस्म से सजे महाकाल का स्वरूप भक्तों के मन में गहरी छाप छोड़ गया।
जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर
भस्म आरती के दौरान और उसके पश्चात हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन किए। दर्शन करते ही भक्त भाव-विभोर हो उठे और पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयकारे गूंजते रहे। कई श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को देखकर भावुक हो गए और आंखों में आस्था के आंसू छलकते नजर आए।
सूरत से आए 40 विशेष बच्चों ने किए बाबा महाकाल के दर्शन
Jayaa Ekadashi के पावन अवसर पर सूरत (गुजरात) से दीप ज्योति वेलफेयर ट्रस्ट के 40 मानसिक रूप से विशेष (मनो-दिव्यांग) बच्चों ने भी श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा इन बच्चों के लिए विशेष और सुगम दर्शन व्यवस्था की गई थी, जिससे उन्हें बिना किसी असुविधा के भगवान महाकाल के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
दर्शन के बाद सभी बच्चे अत्यंत प्रसन्न और भाव-विभोर नजर आए। वेलफेयर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मंदिर प्रबंध समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की संवेदनशील और मानवीय व्यवस्था सराहनीय है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर की दैनिक आरती व्यवस्था
श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन निर्धारित समय पर आरतियां संपन्न होती हैं, जिनका क्रम इस प्रकार है:
- प्रथम भस्म आरती: प्रातः 4:00 से 6:00 बजे तक
- द्वितीय दद्योतक आरती: प्रातः 7:30 से 8:15 बजे तक
- तृतीय भोग आरती: प्रातः 10:30 से 11:15 बजे तक
- चतुर्थ संध्याकालीन पूजन: सायं 5:00 से 5:45 बजे तक
- पंचम संध्या आरती: सायं 6:30 से 7:15 बजे तक
- शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक
यह आरती क्रम फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तक प्रभावी रहेगा।
मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर से संबंधित दर्शन, आरती, पूजन और दान की जानकारी के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1008 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त 24×7 निम्न नंबरों पर भी जानकारी उपलब्ध है:
0734-2559272
0734-2559277
0734-2559276
0734-2559275
निष्कर्ष:
Jayaa Ekadashi पर बाबा महाकाल के मोगरे से सजे अलौकिक स्वरूप और भस्म आरती के दिव्य दर्शन ने श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति से भर दिया। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपराओं का जीवंत केंद्र बनकर सामने आया।
