मप्र में MNREGA की जगह “जी राम जी योजना” लागू होने की तैयारी, रोजगार गारंटी सिस्टम में बड़े बदलाव
मध्यप्रदेश में वर्ष 2006 से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA ) के स्वरूप में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस योजना का मौजूदा पोर्टल आज अंतिम दिन तक ही सक्रिय रहेगा और इसके बाद सिस्टम को नए मॉडल में अपग्रेड किया जाएगा। अपडेट प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 जुलाई से इसे नए नाम और नए ढांचे के साथ लागू किए जाने की तैयारी है, जिसे “जी राम जी योजना” के नाम से जाना जाएगा।
सरकारी स्तर पर इस बदलाव को ग्रामीण विकास को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। हालांकि, इस नए मॉडल को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों और जमीनी क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
पुरानी व्यवस्था से नए मॉडल तक का बदलाव
मनरेगा योजना पिछले लगभग दो दशकों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख साधन रही है। इसके तहत अब तक मुख्य रूप से अस्थायी और श्रम-आधारित (कच्चे) कार्यों को ही शामिल किया जाता था।
लेकिन प्रस्तावित “जी राम जी योजना” में इस ढांचे को विस्तार देने की बात कही जा रही है। नए मॉडल में केवल कच्चे कार्यों तक सीमित न रहते हुए पक्के निर्माण कार्यों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही कार्यों की सूची में भी बड़ा विस्तार किया गया है। जहां पहले लगभग 266 प्रकार के कार्य स्वीकृत थे, वहीं नए ढांचे में इसे बढ़ाकर 318 कार्यों तक ले जाने की बात सामने आई है।
ग्राम पंचायतों को मिलेगा अधिक अधिकार
इस नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव ग्राम पंचायतों की भूमिका को लेकर बताया जा रहा है। अब पंचायतों को गांव स्तर पर विकास कार्यों के चयन और क्रियान्वयन में अधिक अधिकार दिए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, पंचायतें अब अपने स्तर पर—
- सड़क निर्माण
- पक्के भवन निर्माण
- जल संरक्षण कार्य (वाटर हार्वेस्टिंग)
- अन्य ग्रामीण ढांचागत विकास कार्य
जैसे कामों को अधिक स्वतंत्रता के साथ प्रस्तावित कर सकेंगी।
सरकारी तर्क यह है कि इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य बेहतर तरीके से हो पाएंगे।
पोर्टल डाउनटाइम और तकनीकी बदलाव
जानकारी के अनुसार, मौजूदा मनरेगा पोर्टल को आज शाम से डाउनटाइम में ले लिया जाएगा। इसके बाद सिस्टम में बड़े स्तर पर डेटा अपडेट और तकनीकी बदलाव किए जाएंगे।
रात भर चलने वाली इस प्रक्रिया के बाद 1 जुलाई से नया सिस्टम लागू होने की संभावना जताई जा रही है। इस ट्रांजिशन के दौरान कार्यों की एंट्री और उपस्थिति प्रणाली अस्थायी रूप से प्रभावित रह सकती है।
फर्जीवाड़े पर रोक के लिए नई डिजिटल व्यवस्था
नई योजना में सबसे बड़ा फोकस पारदर्शिता और डिजिटल मॉनिटरिंग पर बताया जा रहा है।
मनरेगा में लंबे समय से फर्जी उपस्थिति और नाम दर्ज कर भुगतान लेने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसे रोकने के लिए “जी राम जी योजना” में लाइव लोकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की बात कही जा रही है।
इसके तहत—
- मजदूर की उपस्थिति जियो-टैग लोकेशन के आधार पर दर्ज होगी
- निर्माण स्थल का GPS डेटा पहले से फीड किया जाएगा
- सुबह और शाम दोनों समय लाइव सेल्फी आधारित उपस्थिति अनिवार्य होगी
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया जा रहा है कि केवल वास्तविक कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों को ही भुगतान मिले।
लाइव सेल्फी और लोकेशन सिस्टम की चुनौती
हालांकि इस नई व्यवस्था को पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन की उपलब्धता और तकनीकी जागरूकता जैसे मुद्दे इस प्रणाली को जटिल बना सकते हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि—
- रोजाना लाइव फोटो अपलोड करना
- सही लोकेशन ट्रैकिंग सुनिश्चित करना
- तकनीकी गड़बड़ियों से बचाव
इन सभी पहलुओं पर अतिरिक्त प्रशिक्षण और संसाधनों की जरूरत होगी।
काम का दायरा बढ़ने से विकास को गति की उम्मीद
नई योजना में कार्यों की संख्या और प्रकार दोनों बढ़ाए जाने से ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पक्के निर्माण कार्यों को शामिल किए जाने से—
- गांवों में स्थायी ढांचा मजबूत होगा
- रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं
- पंचायतों की विकास क्षमता में वृद्धि होगी
सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और गांव आत्मनिर्भर विकास मॉडल की ओर बढ़ सकेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स और चर्चाओं का असर
इस बदलाव को लेकर ग्रामीण विकास और प्रशासनिक हलकों में लगातार चर्चा हो रही है। कई लोग इसे एक बड़ा सुधार मान रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे बहुत तेजी से लागू किया गया बदलाव भी बता रहे हैं।
ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़ी योजना में बदलाव के लिए—
- प्रशिक्षण
- तकनीकी ढांचा
- और जमीनी तैयारी
बहुत जरूरी होती है।
निष्कर्ष
मनरेगा जैसी बड़ी और पुरानी योजना का नए स्वरूप “जी राम जी योजना” में परिवर्तन ग्रामीण विकास नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। जहां एक ओर इसमें पारदर्शिता, डिजिटल मॉनिटरिंग और कार्य विस्तार जैसे सकारात्मक पहलू जुड़े हैं, वहीं दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन को लेकर कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
अब देखना यह होगा कि यह नया मॉडल जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और क्या यह वास्तव में ग्रामीण रोजगार और विकास की गति को बढ़ा पाता है या नहीं।
