मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर में दिगंबर जैन समाज का भव्य आयोजन, मुनि विमल सागर जी के प्रेरक उद्गार, जानिए पूरी खबर और धार्मिक महत्व।
मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर: मनुष्य पर्याय मिली व्यर्थ मत गमाओ
इंदौर। मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर के पावन अवसर पर दिगंबर जैन समाज के श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि आत्मजागरण और आध्यात्मिक उन्नति का भी अद्भुत संदेश लेकर आया।
मनुष्य जीवन को जैन दर्शन में अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान माना गया है। इसी संदर्भ में आज आयोजित इस भव्य समारोह में मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्गारों से उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन का सच्चा उद्देश्य समझाया।
मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर का महत्व
मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पुण्य अर्जन का महान अवसर है। जैन धर्म में अभिषेक का विशेष महत्व है, जिसमें भगवान की प्रतिमा पर जल, दूध, केसर, चंदन आदि से स्नान कराया जाता है।
मान स्तंभ, अहंकार त्याग और विनम्रता का प्रतीक होता है। इसके दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को अपने जीवन में विनय और धर्म की प्रेरणा मिलती है।
मुनि श्री विमल सागर जी महाराज के प्रेरक उद्गार
इस पावन अवसर पर मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ने कहा—“मनुष्य पर्याय मिली, देव, शास्त्र, गुरु का सानिध्य मिला, उसे व्यर्थ मत गमाओ।”उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ है और इसे केवल भोग-विलास में व्यतीत करना जीवन का अपमान है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रतिदिन भगवान के श्री चरणों में श्रद्धा, विवेक और संकल्प के साथ उत्तम वस्तुओं का समर्पण करने का संदेश दिया।
मुनिश्री ने यह भी बताया कि—
- नियमित अभिषेक और पूजन से पापों का क्षय होता है
- पुण्य और वैभव में वृद्धि होती है
- आत्मा की शुद्धि होती है
इस अवसर पर मुनि श्री अनंतसागर जी महाराज भी उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक गरिमा प्रदान की।
अभिषेक समारोह का भव्य दृश्य
मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर में 45 फुट ऊंचे मान स्तंभ पर विराजित चतुर्मुखी प्रतिमाओं का अभिषेक अत्यंत भव्य और दिव्य दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।यह अभिषेक तीन खंडों में किया गया, जिसमें—
- स्वर्ण कलश
- रजत कलश
- शांति धारा
के माध्यम से भगवान का अभिषेक किया गया।श्रद्धालुओं की भीड़ और “जय जिनेंद्र” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
सौभाग्यशाली परिवारों की सहभागिता
इस महाअभिषेक में कई श्रद्धालु परिवारों को विशेष सौभाग्य प्राप्त हुआ।
प्रथम, द्वितीय कलश एवं शांति धारा करने का सौभाग्य जिनको प्राप्त हुआ, उनमें शामिल हैं—
- रमेशचंद जैन (बीना वाले)
- श्रुत जैन (केवलारी)
- भूपेंद्र जैन
- वीरेंद्र जैन (देवरी वाले)
- हीरालाल शाह
- विपुल बांझल
- राजेश जैन दद्दू
- डॉ. प्रदीप बांझल
- सचिन जैन
- अरविंद सोधिया
- अखिलेश सोधिया
इन सभी श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान और भक्ति भाव से अभिषेक किया।
नवीन प्रतिमाओं की स्थापना
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि इस शुभ अवसर पर जिनालय की वेदी में दो नवीन प्रतिमाएं भी विराजमान की गईं।यह स्थापना पूरी विधि-विधान, मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न हुई।इससे जिनालय की भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा में और अधिक वृद्धि हुई।
धार्मिक और आध्यात्मिक संदेश
मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला संदेश है—
- अहंकार का त्याग करें
- धर्म के मार्ग पर चलें
- प्रतिदिन भगवान की आराधना करें
- अपने जीवन को सार्थक बनाएं
यह आयोजन हमें यह भी सिखाता है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि में है।
समाज में धर्म जागरण की भूमिका
ऐसे आयोजनों से समाज में धार्मिक जागरूकता बढ़ती है।युवा पीढ़ी को अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।धार्मिक आयोजन—
- समाज को एकजुट करते हैं
- नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं
- आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देते हैं
निष्कर्ष
मान स्तंभ महाअभिषेक इंदौर का यह आयोजन न केवल भव्यता का प्रतीक था, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागृति का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।मुनि श्री विमल सागर जी महाराज के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि मनुष्य जीवन अमूल्य है और इसे धर्म, सेवा और साधना में लगाकर ही सार्थक बनाया जा सकता है।


