मुनि समत्व सागर प्रवचन में बताया कि जिन धर्म के सिद्धांत जैसे देव पूजा, स्वाध्याय, संयम और दान जीवन को संतुलित और सफल बनाते हैं।
मुनि समत्व सागर प्रवचन: जिन धर्म के सिद्धांतों से जीवन को व्यवस्थित बनाया जा सकता है
घुवारा। मुनि समत्व सागर प्रवचन में समाज के लोगों को जीवन को संतुलित और व्यवस्थित बनाने के महत्वपूर्ण सूत्र बताए गए। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावशाली शिष्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में “जीवन को जीने की कला” विषय पर चल रही प्रवचन श्रृंखला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मुनि समत्व सागर प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य अक्सर यह कहता है कि उसके पास समय नहीं है, जबकि समय वही 24 घंटे का है जो पहले भी था। अंतर केवल इतना है कि आज मनुष्य अपने जीवन का सही प्रबंधन नहीं कर पा रहा है। यही कारण है कि वह तनाव, चिंता और अनेक समस्याओं से घिर जाता है।
समय प्रबंधन पर मुनि समत्व सागर प्रवचन
मुनि समत्व सागर प्रवचन में उन्होंने बताया कि यदि मनुष्य अपने जीवन में अनुशासन और संतुलन बनाए रखे तो उसका जीवन सुखी और सफल हो सकता है। समय का सही उपयोग ही जीवन की सफलता का आधार है।
उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक जीवन में मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे भाग रहा है, लेकिन आत्मिक शांति को भूलता जा रहा है। जिन धर्म के सिद्धांत हमें आत्मिक संतुलन और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
जिन धर्म के 6 प्रमुख सिद्धांत
मुनि समत्व सागर प्रवचन में उन्होंने बताया कि जिन धर्म में बताए गए षट्-कर्तव्य मनुष्य के जीवन को संतुलित और सफल बनाते हैं।
1 देव पूजा
देव पूजा से मन में श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
2 गुरु उपासना
गुरुओं के प्रति श्रद्धा और सम्मान से जीवन में सही मार्गदर्शन मिलता है।
3 स्वाध्याय
धर्म ग्रंथों का अध्ययन आत्मज्ञान बढ़ाता है और जीवन को सही दिशा देता है।
4 संयम
संयम जीवन का सबसे बड़ा आभूषण है। यह मनुष्य को अनुशासित बनाता है।
5 तप
तपस्या आत्मशुद्धि का माध्यम है।
6 दान
दान से समाज में सहयोग और करुणा की भावना बढ़ती है।इन सिद्धांतों का पालन करने से मनुष्य का जीवन संतुलित और सफल बन सकता है।
जीवन प्रबंधन के सूत्र
मुनि समत्व सागर प्रवचन में उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाए तो वह मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और सामाजिक सम्मान प्राप्त कर सकता है।उन्होंने बताया कि जीवन में सफलता केवल धन या पद से नहीं आती, बल्कि आत्मिक संतुलन और सदाचार से आती है।
प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित
इस अवसर पर
मुनि श्री सौम्य सागर जी,
मुनि श्री जयेंद्र सागर जी,
और मुनि श्री शील सागर जी भी विराजमान रहे।
बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
माता-पिता बनने पर सम्मान समारोह
घुवारा में आगामी 22 से 27 मार्च तक आयोजित होने वाले श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव के अवसर पर सेठ सुखानंद जी-भागवती सेठ को माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
माता-पिता के निवास पर बधाइयों का तांता लगा रहा। इस अवसर पर सौधर्म इंद्र और कुबेर परिवार की मातेश्वरी महा नायक ने अनुमोदना करते हुए उन्हें सम्मानित किया और शुभकामनाएं दीं।
बधाइयां देने वालों में प्रमुख
प्रमोद मस्ताई
संजय बैध (शिक्षक)
निर्मल जैन वारव
पदमचंद पनवारी
सुबोध सेठ
सुरेंद्र बैध (प्राचार्य)
मनोज मस्ताई
डॉ ज्ञानचंद
सुनील घुवारा
नरेंद्र बैध टंडन
अंकित चंदला
प्रमोद सेठ
पटवारी हजारीलाल
धनीराम भोयरा
सनत कुटौरा
पवन घुवारा
डॉ पवन मबई
ऋषि सुनवाहा
महेश मुनीम
बाबूलाल गोरखपुर सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने बधाइयां देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



