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20,000 किलोमीटर दूर से भारत को मिली LPG राहत, आयात दोगुना हुआ

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Published On: 26 March 2026
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LPG  संकट में अर्जेंटीना ने बढ़ाए मदद के हाथ, भारत को मिली राहत

नई दिल्ली, 26 मार्च 2026: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारत गंभीर एलपीजी संकट (LPG Crisis) का सामना कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और समुद्री यातायात बाधित होने के कारण भारत की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है, क्योंकि देश का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी इसी मार्ग से आयात होता है। इस संकट की घड़ी में लगभग 20,000 किलोमीटर दूर स्थित दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना भारत के लिए एक अप्रत्याशित और अहम सहयोगी के रूप में सामने आया है।

संकट की वजह और मौजूदा हालात

पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो कि विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस पारगमन मार्गों में से एक है, इस समय बंद है। इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है। एलपीजी की कमी ने घरेलू उपयोग, उद्योग और वाणिज्यिक सेक्टर में संकट पैदा किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अब विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी रणनीति के तहत अर्जेंटीना ने भारत को एलपीजी आपूर्ति करने की पहल की।

अर्जेंटीना का अप्रत्याशित सहयोग

साल 2026 की पहली तिमाही में अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन एलपीजी की आपूर्ति की है। यह मात्रा पूरे 2025 में भेजी गई 22,000 टन से दोगुनी से अधिक है। संघर्ष के गहराने से पहले ही अर्जेंटीना के ‘बाहिया ब्लांका’ बंदरगाह से लगभग 39,000 टन एलपीजी भारत के तटों पर पहुँच चुकी थी।

केंद्र सरकार के अनुसार, 5 मार्च को अर्जेंटीना से भारत के लिए 11,000 टन एलपीजी का एक और शिपमेंट रवाना किया गया है। गौरतलब है कि साल 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को कभी एलपीजी की आपूर्ति नहीं की थी।

राजनयिक दृष्टिकोण

भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कौसिनो ने कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना के पास गैस का विशाल भंडार उपलब्ध है और भारत को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संसाधन तैयार हैं।

राजदूत ने यह भी बताया कि उनकी राष्ट्रीय गैस और तेल कंपनी के अध्यक्ष ने पिछले साल भारत का दो बार दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने भारतीय ऊर्जा कंपनियों और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के साथ कई बैठकें कीं, ताकि आपूर्ति के मार्ग और रणनीतियों पर सहयोग सुनिश्चित किया जा सके।

भारत की ऊर्जा विविधता रणनीति की सराहना

राजदूत ने भारत की ऊर्जा विविधता रणनीति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अब 40 से अधिक देशों से ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसमें अर्जेंटीना एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद कड़ी बनकर उभरा है।

भारत की यह रणनीति न केवल ऊर्जा संकट को कम करने में मददगार है, बल्कि लंबे समय में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

लंबी दूरी की चुनौतियां

अर्जेंटीना के बाहिया ब्लांका बंदरगाह से भारत के दाहेज (गुजरात) बंदरगाह तक दूरी लगभग 20,000 किलोमीटर है। यह मार्ग दुनिया के सबसे लंबे शिपमेंट मार्गों में से एक है। इतनी लंबी दूरी के कारण:

  • परिवहन लागत में भारी इजाफा होता है।
  • डिलीवरी में समय अधिक लगता है।
  • समुद्री मौसम के जोखिम बढ़ जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के लंबी दूरी के शिपमेंट में आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।

भारत के घरेलू कदम

अर्जेंटीना से एलपीजी आयात बढ़ाने के साथ-साथ भारत ने घरेलू उपायों के लिए भी कदम उठाए हैं।

  1. कमर्शियल एलपीजी आवंटन में वृद्धि: हॉस्पिटैलिटी और खाद्य सेवा क्षेत्रों को राहत देने के लिए सरकार ने कमर्शियल एलपीजी के कोटे में 20 प्रतिशत की वृद्धि की है।
  2. PNG कनेक्शन: घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है। PNG एक अधिक स्थिर और सुरक्षित विकल्प है।
  3. आपातकालीन भंडार: राज्य और केंद्र सरकार ने एलपीजी के भंडार और वितरण चैनलों का निरीक्षण बढ़ाया है।

इन उपायों से उपभोक्ताओं और वाणिज्यिक इकाइयों को एलपीजी की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

LPG संकट का व्यापक प्रभाव

एलपीजी की कमी का असर घरों, उद्योगों और रसोईघरों पर पड़ा है। कई रेस्टोरेंट, होटल और खाद्य सेवा इकाइयां एलपीजी की अनुपलब्धता के कारण संचालन बाधित होने का सामना कर रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, एलपीजी संकट केवल तत्कालिक आपूर्ति की समस्या नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क की मजबूती पर भी सवाल उठाता है।

भविष्य की रणनीतियां

अर्जेंटीना के साथ सहयोग से यह स्पष्ट होता है कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैश्विक साझेदारी पर भरोसा करना होगा। विशेषज्ञों के सुझाव हैं:

  • विविध देशों से आपूर्ति नेटवर्क बनाना।
  • लंबी दूरी के शिपमेंट के लिए लॉजिस्टिक और पोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना।
  • घरेलू भंडार और PNG नेटवर्क को और विकसित करना।

इसके अलावा, सरकार को ऊर्जा संकट की स्थिति में समय पर निर्णय लेने और विदेशी साझेदारों के साथ सहयोग बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।

निष्कर्ष

पश्चिम एशिया में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण उत्पन्न एलपीजी संकट के बीच अर्जेंटीना ने भारत के लिए एक अहम और भरोसेमंद सहयोगी साबित किया है। साल 2026 की पहली तिमाही में बढ़ी हुई एलपीजी आपूर्ति ने भारत के घरेलू और वाणिज्यिक उपयोग में राहत दी है।

भारत ने इस आपूर्ति के साथ-साथ घरेलू स्तर पर भी कई उपाय किए हैं, जिनसे एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। लंबे समय में, यह सहयोग भारत की ऊर्जा विविधता रणनीति को मजबूत करेगा और देश को वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रति अधिक सुरक्षित बनाएगा।

इस संकट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा केवल देश के भीतर उपायों से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक साझेदारी से सुनिश्चित की जा सकती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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