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विधायिका और पत्रकारिता: भोपाल में लोकतंत्र के दो स्तंभों ने रचा इतिहास, प्रेस क्लब भवन की घोषणा

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Published On: 27 October 2025
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भोपाल में ‘मीडिया संवाद एवं दीपावली मिलन’ कार्यक्रम: विधायिका और पत्रकारिता के बीच लोकतांत्रिक संवाद का सशक्त मंच स्थापित

भोपाल, 27 अक्टूबर, 2025: सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब (पब्लिक ट्रस्ट) द्वारा भोपाल के होटल लेक व्यू अशोका में आयोजित “मीडिया संवाद एवं दीपावली मिलन” कार्यक्रम ने लोकतंत्र के दो प्रमुख स्तंभों – विधायिका और पत्रकारिता – के बीच एक ऐतिहासिक और सार्थक संवाद का मंच प्रस्तुत किया। इस वर्ष के कार्यक्रम का विषय – “विधायिका एवं पत्रकारिता – लोकतंत्र के दो प्रमुख आधार स्तंभ” – ने समारोह की मंशा को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया, जहाँ प्रदेशभर के पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों ने एक साझा मंच पर मिलकर लोकतांत्रिक संवाद को और मजबूत करने पर जोर दिया।

लोकतंत्र के दो स्तंभ: एक मंच, एक लक्ष्य

इस गरिमामयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर और नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार की उपस्थिति ने कार्यक्रम के महत्व को और बढ़ा दिया। इस मीडिया संवाद ने साबित किया कि जब विधायिका और मीडिया आपसी सहयोग और सम्मान के साथ आगे बढ़ते हैं, तो लोकतंत्र की जड़ें और भी गहरी及मजबूत होती हैं।

मुख्य अतिथि श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने संबोधन में पत्रकारिता को लोकतंत्र का प्रहरी करार देते हुए कहा, “पत्रकार केवल समाचारों का वाहक मात्र नहीं है, बल्कि वह समाज का विचार निर्माता और जनता की आवाज है। एक पत्रकार की कलम ही वह सशक्त सेतु है जो आम जनता और सत्ता के बीच सीधा संवाद स्थापित करती है। जब विधायिका और मीडिया इस तरह के साझा मंच पर मिलते हैं, तो यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।”

नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने पत्रकारों के कठिन परिश्रम की सराहना करते हुए एक रोचक तुलना पेश की। उन्होंने कहा, “एक पत्रकार सच्चाई तक पहुँचने के लिए वैसी ही मेहनत करता है, जैसी एक वकील तर्क जुटाने में और एक जासूस सबूत ढूँढने में करता है। मीडिया लोकतंत्र की आवाज़ है और निष्पक्ष पत्रकारिता ही हम जनप्रतिनिधियों को सही दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करती है, हमारी गलतियों की ओर इशारा करती है।”

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एक ऐतिहासिक घोषणा: प्रेस क्लब भवन निर्माण की राह पर बड़ा कदम

कार्यक्रम का सबसे ऐतिहासिक और सराहनीय पल तब आया जब वरिष्ठ पत्रकार और ट्रस्टी श्री एन.के. सिंह ने सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब के अपने स्थायी भवन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों से सक्रिय इस क्लब का आज तक अपना कोई स्थायी भवन नहीं है, जो पत्रकारों के लिए एक सुरक्षित और स्थिर कार्य-परिवेश के निर्माण में बाधक है।

इस पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने वचन दिया कि भोपाल के सभी विधायक प्रेस क्लब भवन के निर्माण के लिए पाँच-पाँच लाख रुपये का आर्थिक सहयोग प्रदान करेंगे, ताकि 15 दिनों के भीतर ही प्रेस क्लब भवन का निर्माण कार्य शुरू हो सके। यह घोषणा सभागार में उपस्थित सैकड़ों पत्रकारों के लिए एक सुखद आश्चर्य थी और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। यह कदम पत्रकारिता की आत्मनिर्भरता और सम्मान की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

मंचासीन अतिथियों ने रखे लोकतंत्र और पत्रकारिता पर मजबूत विचार

कार्यक्रम में मौजूद अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी विधायिका और पत्रकारिता के बीच के इस सशक्त संवाद पर अपने गहन विचार साझा किए।

  • श्री अरविंद शर्मा, प्रमुख सचिव, विधानसभा ने पत्रकारिता को ‘तथ्यों की तपस्या’ बताया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग ही लोकतंत्र के तापमान को संतुलित रखती है और जनता को सही निर्णय लेने में मदद करती है।

  • विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने पत्रकारों को ‘समाज का आईना’ करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारों की निष्पक्षता और ईमानदारी ही लोकतंत्र को जीवंत और गतिशील बनाए रखती है।

  • विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने पत्रकारिता की पारदर्शिता और जनहित में उसकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अग्रदूत की भूमिका निभाता है।

  • श्री अवधेश प्रताप सिंह, सदस्य, मानव अधिकार आयोग ने पत्रकारिता को एक ‘मिशन’ बताया। उन्होंने कहा, “पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं देते, बल्कि वे मानवाधिकारों के प्रहरी भी हैं। उनकी कलम समाज के शोषित और वंचित वर्ग की आवाज बनकर उभरती है।”

  • श्री आशीष अग्रवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी ने दीपावली के त्योहार से जुड़े संदेश को पत्रकारिता से जोड़ते हुए कहा, “दीपावली का असली संदेश अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाना है। एक पत्रकार की कलम वह दीपक है जो विचारों, भ्रांतियों और जानकारी के अंधकार को दूर करके समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाती है।”

  • श्री भूपेंद्र गुप्ता, प्रमुख, कांग्रेस विचार विभाग ने लोकतांत्रिक संवाद के महत्व पर बात करते हुए कहा, “लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद होना अनिवार्य है। मीडिया की भूमिका इस संवाद को संतुलित और प्रभावी ढंग से पेश करने की है।”

  • श्री विजय कुमार दास, राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रेस क्लब ने क्लब को ‘पत्रकारों का परिवार’ बताया। उन्होंने अपने उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि उनका लक्ष्य प्रदेश के हर जिले में पत्रकारों को एक साझा मंच, सहयोग और सुरक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर से एक पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग भी रखी।

  • श्री गोविंद गुर्जर, प्रदेश अध्यक्ष ने अपने स्वागत भाषण में मीडिया और विधायिका के रचनात्मक समन्वय को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया। उन्होंने प्रेस क्लब की ओर से 55 नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा करके संगठन के विस्तार का संकेत दिया।

दीपावली मिलन: उत्सव, स्नेह और सहयोग का प्रतीक

कार्यक्रम के अंत में एक भव्य दीपावली मिलन का आयोजन किया गया, जहाँ पत्रकारों ने एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएँ दीं। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों और पत्रकारों के लिए एक स्नेहिल भोज का प्रबंध किया था। यह मिलन समारोह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि विधायिका और पत्रकारिता के बीच बढ़ते विश्वास, आपसी सहयोग और साझा लक्ष्य का जीवंत प्रतीक बन गया।

निष्कर्ष: एक नई शुरुआत का प्रतीक

सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब का यह मीडिया संवाद एवं दीपावली मिलन कार्यक्रम निस्संदेह एक सफल और ऐतिहासिक आयोजन रहा। इसने न केवल लोकतंत्र के दो स्तंभों के बीच के रिश्ते को मजबूत किया, बल्कि पत्रकारिता के भविष्य के लिए एक ठोस आधार भी रखा। श्री उमंग सिंघार द्वारा दिए गए आर्थिक सहयोग के वचन को पत्रकारिता की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम के संचालन और सफल आयोजन का श्रेय नेशनल कोऑर्डिनेटर श्री राजेश भाटिया को जाता है। समापन में उन्होंने कहा, “पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक गहरी प्रतिबद्धता है। जब विधायिका और मीडिया मिलकर लोकतंत्र के लिए काम करते हैं, तभी समाज में सार्थक बदलाव और जनहित की वास्तविक अनुभूति होती है। सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब का यह प्रयास पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद, सहयोग और आपसी विश्वास की एक मिसाल है।”

यह कार्यक्रम वास्तव में भोपाल में हुए एक ऐसे सशक्त मीडिया संवाद के रूप में याद किया जाएगा, जिसने लोकतंत्र की नींव को और अधिक मजबूती प्रदान की।

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