खाचरौद-सिद्दीकगंज रोड पर करोड़ों की शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप,
संवाददाता : अनीस कुमार, खाचरौद
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
आष्टा/खाचरौद: आष्टा तहसील अंतर्गत ग्राम खाचरौद में शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण कार्य का मामला सामने आया है। गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खाचरौद-सिद्दीकगंज रोड पर स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर पक्के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि लंबे समय से सरकारी रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद यहां लगातार अतिक्रमण बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो सरकारी संपत्ति पर स्थायी कब्जा हो सकता है, जिससे भविष्य में शासन को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने आष्टा तहसीलदार को लिखित आवेदन देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने अवैध निर्माण रोकने, भूमि का सीमांकन कराने और अतिक्रमण हटाने की मांग प्रमुखता से उठाई है।
मुख्य मार्ग पर स्थित है बेशकीमती भूमि
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत खाचरौद क्षेत्र में सिद्दीकगंज रोड स्थित पगारिया जोड़ के पास कई वर्षों से शासकीय भूमि खाली पड़ी हुई थी। यह भूमि मुख्य सड़क से लगी होने के कारण काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे स्थित होने के कारण इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये तक हो सकती है। इसी वजह से कुछ लोगों द्वारा इस भूमि पर नजर रखते हुए धीरे-धीरे कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शासकीय भूमि पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के पक्के निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि सरकारी जमीन का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जाना नियमों का उल्लंघन है।
प्लॉट बेचने के लगाए आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत खाचरौद के उप सरपंच प्रतिनिधि मिट्ठलदास पर आरोप लगाया है कि वे शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे प्लॉट के रूप में लाखों रुपये में बेच रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति की तरह उपयोग किया जा रहा है और लोगों को प्लॉट बेचने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
मामले को लेकर ग्रामीणों ने तहसीलदार आष्टा को आवेदन देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। आवेदन में ग्रामीणों ने शासकीय भूमि का सीमांकन कराने, अवैध निर्माण तत्काल रोकने और अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि आम जनता की संपत्ति होती है। इसकी सुरक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और बढ़ सकते हैं।
पटवारी ने मौके पर पहुंचकर दी थी चेतावनी
इस मामले में हल्का पटवारी बलराम रजक से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद वे मौके पर पहुंचे थे। मौके पर निर्माण कार्य होता पाया गया था।
पटवारी ने बताया कि निर्माण कार्य रोकने के लिए संबंधित व्यक्ति को निर्देश दिए गए थे। ग्राम कोटवार प्रेमराज की उपस्थिति में पंचनामा भी तैयार किया गया था, जिसमें आगे निर्माण कार्य नहीं करने के लिए कहा गया था।
पटवारी के अनुसार, इसके बावजूद निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार कार्यालय को सौंप दी है।
जांच में मिला अवैध निर्माण का मामला
वहीं इस मामले में नायब तहसीलदार संदीप गौर ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित आवेदन दिया गया था। आवेदन के बाद मामले की जांच हल्का पटवारी से कराई गई।
नायब तहसीलदार के अनुसार, जांच रिपोर्ट में मौके पर शासकीय भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर पक्का निर्माण किए जाने की बात सामने आई है।
उन्होंने बताया कि पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल स्थगन आदेश जारी किया गया है। यदि आदेश के बाद भी निर्माण कार्य जारी रखा जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं। उनकी प्रमुख मांगें हैं—
- शासकीय भूमि का तत्काल सीमांकन कराया जाए।
- अवैध निर्माण कार्य को तुरंत हटाया जाए।
- शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
- प्लॉट बेचने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए।
राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल इस मामले में ग्रामीणों की शिकायत, पटवारी की रिपोर्ट और प्रशासनिक अधिकारियों के बयानों के बाद आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
यदि जांच में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत अतिक्रमण हटाने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को सुरक्षित रखा जा सके।
अब सभी की नजर राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए किस प्रकार के कदम उठाता है।
