सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के दर्शन और पूजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था।
सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश
कुण्डलपुर दमोह।
सुप्रसिद्ध विश्व धरोहर सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज का मंगल प्रवेश आज 14 मार्च 2026 शनिवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर की पावन धरा पर समाधीष्ट आचार्य परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, श्रमण संस्कृति के महामहिम, पूज्य चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का प्रातः भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य एवं देश के विभिन्न अंचलों से आए हजारों गुरु भक्त श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।
कुण्डलपुर में आचार्य संघ की भव्य मंगल अगवानी
सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल प्रवेश के अवसर पर गुरु भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ आचार्य संघ की भव्य मंगल अगवानी की तथा पाद प्रक्षालन किया।
इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के
ललित सराफ, अशोक सराफ, अजय निरमा, संजय कुबेर, अमर सेठ, अखिलेश फट्टा, पुरुषोत्तम जैन, प्रबंधक मोतीलाल जैन, उपप्रबंधक एन.के. जैन, रविंद्र जैन, राहुल जैन नोहटा, अनिल पुजारी, आदित्य पुजारी सहित कुण्डलपुर जैन समाज, बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु, ब्रह्मचारी भैया जी, दीदी जी एवं विभिन्न नगरों से आए भक्तजन उपस्थित रहे।पूरे क्षेत्र में “नमोस्तु शासन जयवंत हो” के जयघोष गूंज उठे।
बड़े बाबा आदिनाथ मंदिर में हुई वंदना
सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ पर्वत की सीढ़ियां चढ़ते हुए मंदिरों की वंदना करते हुए बड़े बाबा आदिनाथ मंदिर पहुंचे।
जहां आचार्य संघ ने पूज्य बड़े बाबा भगवान आदिनाथ के चरणों में वंदना की।
इस अवसर पर
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भक्तामर महामंडल विधान
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बड़े बाबा का अभिषेक
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शांतिधारा
भक्ति भाव से सम्पन्न हुई।
आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल प्रवचन
इस अवसर पर आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से कहा—सारे विश्व की आस्था कुण्डलपुर के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान पर है।उन्होंने कहा कि यह वही स्थान है जहां भगवान ऋषभदेव की महान परंपरा और जैन संस्कृति की गौरवशाली धरोहर आज भी जीवित है।
आचार्य श्री ने कहा कि भगवान ऋषभदेव का संदेश था—
“कृषि करो या ऋषि बनो”
भारत के कण-कण में जैनत्व की भावना विद्यमान है। जिन्होंने इस पवित्र स्थान पर भगवान आदिनाथ को स्थापित किया, वे महान महात्मा अवश्य रहे होंगे।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि जब आचार्य विद्यासागर जी स्वर्ग पहुंचे होंगे तो भट्टारक सुरेंद्र कीर्ति जी उनसे अवश्य मिले होंगे और दोनों इस भव्य मंदिर को देखकर प्रसन्न हुए होंगे।
श्रद्धालुओं को मिला अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य
सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में अनेक श्रद्धालु परिवारों को अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर
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अमन सपना जैन
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अतुल सिंघई परिवार भोपाल
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कैलाशचंद संतोष राजेश शुभम साक्षी जैन परिवार सोनीपत
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उदय सिंह जैन सिद्धार्थ जैन वाराणसी
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कैलाशचंद्र हरिश्चंद्र जैन देवेंद्रनगर
सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आचार्य श्री की आहारचर्या श्रेष्ठी श्री आकाश सेठ, अक्षत सेठ परिवार दमोह के चौके में सम्पन्न हुई।
गढ़ाकोटा की ओर हुआ आचार्य संघ का विहार
समायिक के पश्चात आचार्य श्री ने संत निवास में मंगल प्रवचन दिए।इसके बाद आचार्य संघ का विहार गढ़ाकोटा की ओर हो गया और रात्रि विश्राम बेलाजी ग्राम में होगा।
