पिता से शिक्षा और माँ से भक्ति ने जीवन में संयम सिखाया: कुमार विश्वास का गौतमबुद्ध नगर में वक्तव्य
गौतमबुद्ध नगर।
प्रसिद्ध हिन्दी कवि, लेखक और वक्ता डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि “पिता से मिली शिक्षा और माँ से मिली भक्ति ने मुझे जीवन में संयम, अनुशासन और समर्पण का रास्ता दिखाया है।”
वे यह बात गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश के सांसद व संसदीय आवास समिति के अध्यक्ष तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा के निवास पर आयोजित एक अनौपचारिक परिचर्चा के दौरान बड़े गर्व के साथ साझा कर रहे थे।
यह मुलाकात न केवल साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण रही, बल्कि समाज में मूल्यों, संस्कारों और पारिवारिक आदर्शों पर भी इसका गहरा प्रभाव दिखाई दिया।
पिता की ‘प्यार भरी डांट’ आज भी मार्गदर्शन देती है: कुमार विश्वास
डॉ. कुमार विश्वास ने अपने पिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पिता, जो पिलखुआ (ज़िला हापुड़, उत्तर प्रदेश) में एक अध्यापक थे, आज भी उन्हें किसी भी मंचीय त्रुटि, उच्चारण या तथ्यगत गलती पर तुरंत ‘प्यार भरी डांट’ देकर सुधारने में संकोच नहीं करते।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—
“मंच पर मैं चाहे कितनी बड़ी सभा में बोलकर आऊँ, लेकिन यदि कोई शब्द गलत बोल दिया या कोई तथ्य गलत कह दिया तो मेरे पिता मुझे तुरंत बता देते हैं। उनके इसी अनुशासन ने मुझे जीवनभर सजग रखा है।”
कुमार विश्वास ने यह भी कहा कि किसी भी कलाकार, वक्ता या जनप्रतिनिधि के लिए स्वयं में सुधार की यह भावना सबसे बड़ा गुण है।
मां ने सिखाया कि धार्मिक आयोजन में ‘देना’ है, ‘पाना’ नहीं
अपनी माता के संस्कारों का उल्लेख करते हुए कुमार विश्वास ने कहा—
“मां ने हमेशा सख़्त निर्देश दिए कि किसी भी धार्मिक आयोजन में कभी कुछ प्राप्त नहीं करना है। वे हमेशा कहती हैं कि धर्मकर्म में बैठे संत, विद्वान अथवा ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक कुछ भेंट करना ही असली सेवा है।”
उन्होंने बताया कि उनके घर पर आने वाले विद्वानों और संतों को उनकी मां बिना शॉल ओढ़ाकर और आदरपूर्वक दक्षिणा देकर जाने नहीं देतीं।
इन्हीं संस्कारों ने उन्हें जीवन में सहजता, विनम्रता, संयम और सेवा का भाव सिखाया।
डॉ. महेश शर्मा ने किया स्वागत, डॉ. भरत शर्मा ने की भेंट
कार्यक्रम के दौरान डॉ. महेश शर्मा ने कुमार विश्वास का स्वागत परंपरागत रूप से शॉल ओढ़ाकर किया।
इंदौर, मध्यप्रदेश से पधारे डॉ. भरत शर्मा (सदस्य–संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) ने भी उनसे मुलाकात कर उनका अभिवादन किया।
डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि कुमार विश्वास जैसे साहित्यिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व देश में नई पीढ़ी को भारतीय भाषा, संस्कृति और मूल्य व्यवस्था से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कविता, वक्तृत्व और डिजिटल पहुँच ने बनाए रखा है उनका प्रभाव
भारतीय साहित्य और मंचीय कविता में अग्रणी नामों में शामिल कुमार विश्वास आज भी अपनी वाक्पटुता, भाषा की सरलता और डिजिटल सामग्री की विशाल पहुँच के कारण निरंतर प्रासंगिक बने हुए हैं।
उनके कार्यक्रम देश–विदेश में लोकप्रिय हैं और युवाओं में उनकी कविताएँ विशेष प्रेरणादायक मानी जाती हैं।
गौतमबुद्ध नगर में इस अनौपचारिक बैठक के दौरान भी कई युवाओं और अतिथियों ने उनसे उनकी प्रसिद्ध पंक्तियों और अनुभवों पर चर्चा की।
संस्कार, मूल्य और अनुशासन—कुमार विश्वास के व्यक्तित्व की जड़ें
इस पूरी बातचीत में एक बात बार-बार उभरकर सामने आई—
कुमार विश्वास की सफलता, लोकप्रियता और जीवन दर्शन की असली जड़ें उनके पारिवारिक संस्कार हैं।
उन्होंने कहा—
“जीवन में नाम, प्रसिद्धि और उपलब्धियां तभी सार्थक हैं जब मन में संयम, व्यवहार में विनम्रता और कर्म में सेवा हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में माता-पिता द्वारा बच्चों को दिए गए संस्कार ही समाज को दिशा दे सकते हैं।
उनके अनुसार, भारतीय समाज की शक्ति उसके परिवार, संस्कृति और अध्यात्म में छिपी है।
प्रबुद्धजन भी रहे उपस्थित
इस अवसर पर डॉ. उमा शर्मा, वाई. के. शर्मा, दिनेश शर्मा, नरेश शर्मा, डॉ. पल्लवी शर्मा सहित गौतमबुद्ध नगर के कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
सभी ने कुमार विश्वास के विचारों, सरलता और सांस्कृतिक दृष्टिकोण की सराहना की।
अनौपचारिक वातावरण में हुई इस चर्चा ने साहित्य, संस्कृति, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारी—इन सभी विषयों को एक सूत्र में पिरो दिया।
