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किसानों की समस्याओं को लेकर ऐतिहासिक ज्ञापन, अतिवृष्टि मुआवजा और ₹3000 समर्थन मूल्य की दमदार मांग | जीवनलाल जैन

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Published On: 10 February 2026
किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन
— किसानों की समस्याओं को लेकर उज्जैन में सौंपा गया ज्ञापन – भारतीय किसान युवा मंच

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किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान युवा मंच ने उज्जैन जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा। अतिवृष्टि सर्वे, बीमा क्लेम और गेहूँ समर्थन मूल्य 3000 रुपये की प्रभावशाली मांग।

किसानों की समस्याओं को लेकर सौंपा गया ज्ञापन

किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन एक बार फिर प्रशासन के सामने रखा गया।
नागदा जंक्शन में भारतीय किसान युवा मंच द्वारा किसानों की जमीनी समस्याओं को उजागर करते हुए उज्जैन जिलाधीश के नाम ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा गया।

यह ज्ञापन भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश अध्यक्ष कवि देवसिंह गुर्जर के नेतृत्व में दिया गया, जिसमें किसानों की फसल नुकसान, मुआवजा, बीमा क्लेम और समर्थन मूल्य जैसी अहम मांगें शामिल रहीं।

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अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से किसानों की हालत

किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन में बताया गया कि असमय बारिश और ओलावृष्टि ने क्षेत्र के किसानों की खड़ी फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।
कई स्थानों पर गेहूँ, चना, सोयाबीन जैसी फसलें जलदाग और फंगल रोगों के कारण पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।

किसानों का कहना है कि

  • कहीं उत्पादन शून्य हो गया
  • कहीं आधी से भी कम फसल बची
  • और जो फसल बची, उसे वाजिब दाम नहीं मिल रहा

यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार बन चुकी है।

बीमा क्लेम न मिलने से बढ़ी परेशानी

किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन में बीमा कंपनियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।
सोयाबीन फसल के नुकसान के बावजूद कई किसानों को अब तक बीमा क्लेम नहीं मिला है।

मंच की मांग है कि

  • बीमा कंपनियों को तत्काल निर्देश दिए जाएँ
  • किसानों को शर्तों के जाल में न उलझाया जाए
  • नुकसान के अनुरूप बीमा राशि शीघ्र प्रदान की जाए

गेहूँ के समर्थन मूल्य 3000 रुपये की दमदार मांग

ज्ञापन में कहा गया कि गेहूँ का समर्थन मूल्य वर्षों से किसानों की लागत के मुकाबले बहुत कम है।
नाममात्र की वृद्धि कर किसानों को गुमराह किया जा रहा है।

किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन में स्पष्ट मांग रखी गई कि
गेहूँ का समर्थन मूल्य ₹3000 प्रति क्विंटल से अधिक किया जाए,
ताकि किसान को उसकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके।

ग्रेसिम फैक्ट्री के प्रदूषित पानी से खेती पर असर

ज्ञापन में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया।
ग्रेसिम फैक्ट्री द्वारा छोड़े जा रहे अपशिष्ट रसायनयुक्त पानी से नदी किनारे बसे 14 गांवों की कृषि भूमि बंजर होती जा रही है।

किसानों का आरोप है कि

  • कई बार आवेदन और ज्ञापन दिए गए
  • लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
  • फसलें लगातार नष्ट हो रही हैं

मंच ने प्रशासन से मांग की कि अवैध रूप से छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी पर तत्काल रोक लगाई जाए।

इस अवसर पर मौजूद किसान साथी

इस कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन मंच के जिलाध्यक्ष देवीलाल चन्द्रवंशी सहित
रवि शर्मा, रजला, नानालाल जाट, विनोद गुर्जर किलोडिया, रघुवीर गुर्जर, अर्जुन गुर्जर जलोदिया, राकेश अलसी, जितेंद्र गुर्जर, राकेश गुर्जर, जगदीश, मुकेश प्रजापत, गोवर्धन गुर्जर, मोतीलाल, भंवरलाल, रुगनाथ, रमेश, शुभम, बालूसिंह, सुनील, विरम, जयपाल सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।

प्रशासन से उम्मीद

किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए मंच ने उम्मीद जताई कि प्रशासन शीघ्र

  • फसल सर्वे
  • मुआवजा वितरण
  • बीमा क्लेम
  • और प्रदूषण पर नियंत्रण

जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाएगा।

दिनांक

10/02/2026

संवाददाता

जीवनलाल जैन | नागदा

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