खतरगच्छ उपाध्याय प्रवर मंगलप्रवेश नागदा में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। नगर में धर्म, संयम और अहिंसा का दिव्य वातावरण बना।
संवाददाता जीवन लाल जैन नागदा की रिपोर्ट
खतरगच्छ उपाध्याय प्रवर मंगलप्रवेश नागदा में श्रद्धा और उल्लास का अनुपम दृश्य
खतरगच्छ उपाध्याय प्रवर मंगलप्रवेश नागदा जैन समाज के लिए एक अविस्मरणीय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण क्षण बन गया। नगर में रविवार का प्रातःकाल उस समय विशेष बन गया जब खतरगच्छ सम्प्रदाय के उपाध्याय प्रवर श्री महेन्द्रसागरजी म.सा. एवं श्री मनीषसागरजी म.सा. अपने 20 ठाणा के साथ पावन मंगलप्रवेश हेतु नागदा जं. पहुंचे।
जैसे ही मुनि भगवंतों का नगर में आगमन हुआ, सम्पूर्ण वातावरण जयकारों, नवकार मंत्र और भक्ति गीतों से गूंज उठा। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि संयम, साधना और संस्कारों का जीवंत उत्सव था।
खतरगच्छ उपाध्याय प्रवर मंगलप्रवेश नागदा की पावन शुरुआत
मंगलप्रवेश की शुरुआत श्री शांतिनाथ राजेन्द्रसूरी जैन ज्ञान मंदिर, जैन कॉलोनी नागदा से हुई। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुजन सफेद वस्त्रों में, हाथों में ध्वज-पताकाएं लिए, मुनि भगवंतों की अगवानी के लिए उपस्थित थे।
नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए यह मंगलप्रवेश एक चलती-फिरती धर्मयात्रा का रूप ले चुका था। हर वर्ग, हर आयु के लोग इस पावन अवसर के साक्षी बने।
श्रद्धा, अनुशासन और जयघोष से सजा नगर भ्रमण
मुनि भगवंतों के दर्शन हेतु श्रद्धालु रास्तों के दोनों ओर पंक्तिबद्ध खड़े दिखाई दिए।
“उपाध्याय प्रवर की जय”,
“धर्म प्रभावना की जय”
जैसे जयघोषों से नागदा नगर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
महिलाओं ने मंगल कलश सजाए, युवाओं ने सेवा व्यवस्था संभाली और वरिष्ठजनों ने आशीर्वाद स्वरूप भावनाएं अर्पित कीं। यह दृश्य जैन संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर रहा था।
धर्मसभा में उपाध्याय प्रवरों का प्रेरक धर्मोपदेश
मंगलप्रवेश पश्चात श्री पाश्वप्रधान पाठशाला भवन में धर्मसभा का आयोजन किया गया।
यहां उपाध्याय प्रवरों ने अपने प्रवचनों में—
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अहिंसा का व्यवहारिक स्वरूप
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संयमित जीवन की महत्ता
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आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन
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आधुनिक जीवन में धर्म की आवश्यकता
जैसे विषयों पर गहन और सरल शब्दों में मार्गदर्शन प्रदान किया।
उनके वचनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि धर्म केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।

श्रीसंघ और समाज की गरिमामयी सहभागिता
इस भव्य आयोजन में श्री श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ नागदा जं. की उल्लेखनीय भूमिका रही।
अगवानी का दायित्व श्रीसंघ अध्यक्ष मनिष ओरा, सचिव हर्षित नागदा, ट्रस्टीगण एवं समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने निभाया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन अभय चौपड़ा द्वारा किया गया, वहीं आयोजन से जुड़ी जानकारी श्री राजेन्द्र सूरि जैन ज्ञान मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रजेश बोहरा ने साझा की।
आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत नागदा
पूरा नगर उस दिन धर्ममय, शांत और अनुशासित वातावरण में डूबा रहा।
श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि नागदा में आज भी धर्म के प्रति गहरी आस्था जीवित है।
मंगलप्रवेश केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आया।
निष्कर्ष: धर्म, संयम और संस्कारों का जीवंत उदाहरण
खतरगच्छ उपाध्याय प्रवर मंगलप्रवेश नागदा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
यह आयोजन यह संदेश देता है कि—
जब समाज एकजुट होकर धर्म के पथ पर चलता है,
तब नगर नहीं, पूरा वातावरण पवित्र हो जाता है।

