khachrod नेत्रदान की प्रेरक मिसाल में बाबा महाकाल के भक्त स्वर्गीय श्याम सुंदर जी के निधन के बाद परिवार ने नेत्रदान कर दो दृष्टिबाधित लोगों को नई रोशनी देने का संकल्प पूरा किया। गीता भवन न्यास समिति का 972वां और जैन सोशल ग्रुप मैत्री की प्रेरणा से 16वां नेत्रदान संपन्न।
khachrod नेत्रदान की प्रेरक मिसाल
khachrod नेत्रदान की एक प्रेरणादायक मिसाल उस समय देखने को मिली जब बाबा महाकाल के परम भक्त स्वर्गीय श्री श्याम सुंदर जी के आकस्मिक देवलोकगमन के बाद उनके परिवार ने मानवता और सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। परिवारजनों ने दुःख की इस घड़ी में भी नेत्रदान का संकल्प लेकर दो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में नई रोशनी पहुंचाने का कार्य किया।
स्वर्गीय श्री श्याम सुंदर जी, स्वर्गीय श्री मांगीलाल जी के सुपुत्र, स्वर्गीय मोहनलाल जी के छोटे भाई, श्री गोपाल जी एवं श्री दिनेश जी के बड़े भाई तथा पंकज एवं नीरज के पूज्य पिताजी थे। उनके निधन से परिवार, समाज और नगर में शोक की लहर व्याप्त हो गई।
परिवार ने लिया मानवता का बड़ा निर्णय
दुःखद परिस्थितियों के बावजूद परिवार ने समाज के सामने सेवा और संवेदना का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया। पुत्र एवं परिवार की सहमति से जैन सोशल ग्रुप मैत्री की प्रेरणा तथा गीता भवन न्यास समिति, डॉ. जी.एल. ददरवाल एवं उनकी टीम के सहयोग से स्वर्गीय श्याम सुंदर जी का नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को दृष्टि मिल सकती है। इसी उद्देश्य के साथ यह महादान संपन्न हुआ, जिससे दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में नई आशा और नई रोशनी का संचार होगा।
गीता भवन न्यास समिति का 972वां नेत्रदान
यह नेत्रदान गीता भवन न्यास समिति द्वारा संपन्न कराया गया 972वां नेत्रदान है। वर्षों से समिति समाज में नेत्रदान जागरूकता के लिए कार्य कर रही है और सैकड़ों परिवारों को इस पुण्य कार्य से जोड़ चुकी है।
समिति के निरंतर प्रयासों के कारण अनेक जरूरतमंद लोगों को दृष्टि प्राप्त हुई है। संस्था का यह अभियान मानव सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।
जैन सोशल ग्रुप मैत्री की प्रेरणा
जैन सोशल ग्रुप मैत्री द्वारा प्रेरित यह 16वां नेत्रदान रहा। संगठन लंबे समय से सामाजिक सेवा, जनजागरण और मानव कल्याण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
नेत्रदान प्रक्रिया के दौरान जैन सोशल ग्रुप मैत्री के अध्यक्ष राजेंद्र नांदेचा, राजेश चोपड़ा, आयुष बरड़िया, मनीष मेहता, अतुल चौरड़िया, स्वप्निल सुराणा एवं अरुण लुणावत उपस्थित रहे और उन्होंने परिवार को इस पुण्य कार्य के लिए साधुवाद दिया।
लोहार समाज का पहला नेत्रदान
इस नेत्रदान की एक और विशेष उपलब्धि यह रही कि खाचरौद में लोहार समाज द्वारा यह पहला नेत्रदान है। समाजजनों और नगरवासियों ने इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की।लोगों का कहना है कि इस प्रकार के कार्य समाज में जागरूकता बढ़ाते हैं और दूसरों को भी नेत्रदान जैसे महादान के लिए प्रेरित करते हैं।
समाज को मिला प्रेरणादायक संदेश
khachrod नेत्रदान को महादान कहा जाता है क्योंकि यह मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला भर देता है। स्वर्गीय श्याम सुंदर जी का यह नेत्रदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।समाज के लोगों ने अधिक से अधिक नागरिकों से नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की है ताकि हजारों दृष्टिबाधित लोगों को नई जिंदगी मिल सके।
