भालूमाड़ा का केवई पुल बना मौत का रास्ता, जर्जर हालत से 20 से अधिक गांवों के हजारों लोगों की जान जोखिम में
अनूपपुर/भालूमाड़ा। जिले के भालूमाड़ा क्षेत्र में स्थित केवई पुल इन दिनों गंभीर खतरे का केंद्र बन गया है। लंबे समय से रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के चलते यह महत्वपूर्ण पुल जर्जर हालत में पहुंच चुका है। पुल की खराब स्थिति के कारण प्रतिदिन यहां से गुजरने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
केवई पुल भालूमाड़ा क्षेत्र को आसपास के 20 से अधिक गांवों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। यह पुल स्थानीय लोगों के लिए आवागमन की जीवनरेखा माना जाता है। इसी रास्ते से बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, ग्रामीण, नौकरीपेशा लोग और व्यापारी प्रतिदिन आवागमन करते हैं। लेकिन वर्तमान में पुल की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां से गुजरना लोगों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।
पुल पर बने जानलेवा गड्ढे, बाहर निकली सरिया
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल की सतह पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। कई स्थानों पर कंक्रीट उखड़ने के कारण लोहे की सरिया बाहर निकल आई हैं, जो कभी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।
वाहन चालकों को पुल पार करते समय काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
20 से अधिक गांवों के लोगों की निर्भरता
केवई पुल क्षेत्र के कई गांवों के लोगों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके दैनिक कार्यों से लेकर शिक्षा, रोजगार और व्यापार तक के लिए इस पुल का उपयोग करना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि पुल की खराब स्थिति को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी गई, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ रहा खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि जर्जर और संकरे पुल से लगातार भारी वाहन भी गुजर रहे हैं। ओवरलोड ट्रकों और बड़े वाहनों की आवाजाही के कारण पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे इसकी स्थिति और खराब होती जा रही है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भारी वाहनों के आवागमन पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो पुल का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गिर सकता है, जिससे बड़ी जनहानि होने की संभावना बनी हुई है।
बारिश में बढ़ जाता है दुर्घटना का खतरा
मानसून के दौरान केवई पुल की स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाता।
विशेषकर रात के समय यह पुल और अधिक खतरनाक हो जाता है। पानी से भरे गड्ढों में बाइक के पहिए फंसने के कारण कई लोग चोटिल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में यहां दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि पुल की तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराई जाए और इसकी स्थिति के आधार पर जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू किया जाए।
इसके अलावा ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक पुल की स्थिति सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई जाए। पुल के दोनों ओर चेतावनी संकेतक और सुरक्षा बैरिकेड लगाने की मांग भी की गई है, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल केवल एक मार्ग नहीं बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसकी अनदेखी करना आम जनता की सुरक्षा के साथ बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके और किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
रिपोर्ट: अभिषेक द्विवेदी
