KEDL बिजली कंपनी लापरवाही के चलते कोटा में ठेका कर्मचारी विनोद मेघवाल की फॉल्ट सुधारने के दौरान मौत हो गई। समाजसेवी हिम्मत सिंह के हस्तक्षेप के बाद परिवार को 18 लाख रुपये मुआवजा और ₹5000 मासिक पेंशन का घोषणा पत्र मिला। पढ़ें पूरी खबर।
KEDL बिजली कंपनी लापरवाही: सुरक्षा उपकरणों के बिना खंभे पर चढ़ाए गए कर्मचारी की मौत, 18 लाख मुआवजा और ₹5000 मासिक पेंशन का ऐलान
KEDL बिजली कंपनी लापरवाही
कोटा | 29 जून। राजस्थान के कोटा शहर में KEDL बिजली कंपनी लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। बजरंग नगर क्षेत्र में बिजली फॉल्ट सुधारने के दौरान ठेका कर्मचारी विनोद मेघवाल (27 वर्ष) की करंट लगने से मौत हो गई। मृतक के परिजनों और मेघवाल समाज ने घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए न्याय और मुआवजे की मांग की।घटना के बाद बड़ी संख्या में समाज के लोग एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी पर एकत्र हुए। बाद में समाजसेवी हिम्मत सिंह के हस्तक्षेप के बाद मृतक परिवार को 18 लाख रुपये आर्थिक सहायता और बुजुर्ग माता-पिता को ₹5000 प्रतिमाह पेंशन देने का घोषणा पत्र जारी किया गया।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार 28 जून की रात लगभग 11:30 बजे बजरंग नगर क्षेत्र में बिजली लाइन में फॉल्ट आने की सूचना मिली थी। इस फॉल्ट को ठीक करने के लिए KEDL बिजली कंपनी में ठेके पर कार्यरत कर्मचारी विनोद मेघवाल, उम्र 27 वर्ष, निवासी किशनपुरा तकिया को मौके पर भेजा गया।
आरोप है कि कर्मचारी को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिजली के खंभे पर चढ़ाया गया और उसे बताया गया कि लाइन बंद है। इसी दौरान अचानक करंट प्रवाहित हो गया और विनोद गंभीर रूप से झुलस गए।सहकर्मी उन्हें तत्काल एमबीएस अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सुबह परिजनों को मिली मौत की सूचना
राष्ट्र गौरव एवं वरिष्ठ पत्रकार पारस जैन “पार्श्वमणि” ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना के बाद 29 जून की सुबह मृतक के परिवार को उसके निधन की सूचना दी गई।सूचना मिलते ही मृतक के बुजुर्ग पिता, परिजन एवं मेघवाल समाज के लोग एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी पहुंच गए और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।परिजनों का कहना था कि यदि कर्मचारी को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते और पूरी सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
FIR दर्ज करने और हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग
परिजनों एवं समाज के लोगों ने घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।मौके पर पहुंचे समाजसेवी हिम्मत सिंह ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग संबंधी एफआईआर प्रस्तुत कराई।उन्होंने मृतक परिवार को उचित आर्थिक सहायता, माता-पिता के लिए पेंशन तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी रखी।
समाजसेवी हिम्मत सिंह की पहल से हुआ समझौता
लंबी बातचीत और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद मृतक परिवार की सहमति से आर्थिक सहायता का निर्णय लिया गया।घोषणा के अनुसार—
- ₹10 लाख KEDL बिजली कंपनी द्वारा
- ₹8 लाख राज्य सरकार द्वारा
- मृतक के बुजुर्ग माता-पिता को ₹5000 प्रतिमाह पेंशन
देने का घोषणा पत्र जारी किया गया।इसके बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने पर सहमति जताई।
पोस्टमार्टम के बाद गांव ले जाया गया शव
घोषणा पत्र मिलने के बाद एमबीएस अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया।पोस्टमार्टम के उपरांत परिजन मृतक विनोद मेघवाल के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव लेकर रवाना हुए।घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह हादसा एक बार फिर बिजली कंपनियों में कार्यरत ठेका कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।विशेषज्ञों का मानना है कि विद्युत लाइनों पर कार्य करते समय—
- सुरक्षा बेल्ट
- इंसुलेटेड दस्ताने
- हेलमेट
- लाइन बंद होने की लिखित पुष्टि
- अर्थिंग प्रक्रिया
- सुपरविजन
जैसी व्यवस्थाओं का पालन अनिवार्य होना चाहिए।यदि इन नियमों का पालन नहीं किया जाए तो इस प्रकार की घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
पहले भी लोगों की मदद कर चुके हैं हिम्मत सिंह
वरिष्ठ पत्रकार राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” ने बताया कि समाजसेवी हिम्मत सिंह इससे पहले भी कई सामाजिक मामलों में लोगों को राहत दिला चुके हैं।उन्होंने बताया कि श्रीपुरा क्षेत्र में गन्ने का जूस बेचने वाले धनराज सुमन का लगभग ₹2,66,000 का बिजली बिल संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर घटवाकर ₹14,945 कराया था।इस कारण स्थानीय लोगों के बीच उनकी सामाजिक सक्रियता की चर्चा होती रही है।
प्रशासन से उठी निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के बाद सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।लोगों का कहना है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बिजली कंपनियों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
कोटा में हुई यह दुखद घटना कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को एक बार फिर सामने लाती है। यदि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाता तो संभवतः एक युवा कर्मचारी की जान बचाई जा सकती थी। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

