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करवा चौथ 2025: व्रत की तिथि, पूजन विधि, महत्व और खास नियम जानें

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Published On: 14 September 2025
Karwa Chauth 2025 Date

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करवा चौथ 2025: सुहागिनें क्यों रखती हैं व्रत, कैसे करें पूजन और क्या मानें विशेष नियम

हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। करवा चौथ का व्रत केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाने वाला पर्व भी माना जाता है।

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करवा चौथ 2025 की तिथि और चंद्रोदय का समय

  • तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर 2025, रात 10:54 बजे

  • तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर 2025, शाम 7:38 बजे

  • चंद्रोदय का समय (दिल्ली में अनुमानित): रात 8:18 बजे (अन्य स्थानों पर समय अलग हो सकता है)


करवा चौथ क्यों मनाया जाता है?

  • मान्यता है कि इस व्रत से पति की आयु बढ़ती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

  • करवा चौथ का उल्लेख प्राचीन पुराणों और कथाओं में भी मिलता है, जिसमें व्रत के प्रभाव से पतियों का जीवन संकट से बचा।

  • इसे पति-पत्नी के बीच विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।


करवा चौथ का व्रत कैसे रखा जाता है?

1. सुबह की सरगी (ससुराल से मिला भोजन)

  • व्रत रखने वाली महिला सूर्योदय से पहले सास द्वारा दी गई सरगी खाती है।

  • इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं।

2. निर्जला व्रत

  • सूर्योदय के बाद से महिलाएं बिना पानी पिए और बिना कुछ खाए व्रत करती हैं।

  • यह व्रत रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पति के हाथ से पानी पीकर पूरा होता है।

3. करवा चौथ पूजन विधि

  • शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा स्थल पर बैठती हैं।

  • करवा (मिट्टी/पीतल का छोटा कलश) में जल भरकर रखा जाता है।

  • महिलाएं गौरी माता और चंद्र देव की पूजा करती हैं।

  • करवा चौथ की कथा (व्रत कथा) सुनी जाती है।

4. चंद्रोदय और अर्घ्य

  • चंद्रमा के निकलने पर छलनी से चंद्रमा और पति का दर्शन किया जाता है।

  • इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर और पहला निवाला खाकर व्रत तोड़ा जाता है।


करवा चौथ पर क्या करें और क्या न करें?

क्या करें

  • सूर्योदय से पहले सरगी खाएं।

  • पूरे दिन मन को शांत रखें और पूजा में ध्यान लगाएं।

  • सोलह श्रृंगार करें और माता गौरी की पूजा अवश्य करें।

  • चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी उम्र की कामना करें।

क्या न करें

  • व्रत के दौरान गुस्सा, झगड़ा या कटु वचन बोलना अशुभ माना जाता है।

  • दिनभर पानी या भोजन का सेवन न करें।

  • गलत समय पर पूजा करना वर्जित है, हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करें।


करवा चौथ का महत्व

  • यह व्रत न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और पारिवारिक दृष्टि से भी।

  • पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति समर्पण को और गहरा करता है।

  • घर में सुख-शांति, वैभव और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।


👉 इस तरह करवा चौथ का व्रत केवल एक परंपरा नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन को मधुर और सुखद बनाने का उत्सव है।

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