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कर्नाटक राजनीति में प्रियांक खरगे का धमाका: “भाजपा आरएसएस की कठपुतली, संघ की 400 करोड़ फंडिंग और संविधान विरोधी गतिविधियों की जांच हो”

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Published On: 13 October 2025
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कर्नाटक: प्रियांक खरगे का आरएसएस पर गंभीर हमला, बोले — “भाजपा सिर्फ संघ की कठपुतली बनकर रह गई है”

कांग्रेस नेता ने उठाए पारदर्शिता और संविधान-विरोधी गतिविधियों पर सवाल, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखा पत्र

बेंगलुरु।
कर्नाटक की राजनीति में सोमवार को एक बार फिर तूफान उठ गया जब राज्य के मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधे निशाना साधते हुए कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
उन्होंने कहा कि आरएसएस न तो किसी सरकारी रजिस्ट्रेशन के तहत काम करता है और न ही अपने फंडिंग स्रोतों की पारदर्शिता दिखाता है, फिर भी हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये कहां से आते हैं — इसका कोई जवाब नहीं देता।

प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर मांग की है कि राज्य की सभी सरकारी इमारतों, स्कूलों और संस्थानों में आरएसएस की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाए। उनका कहना है कि यह संगठन संविधान की भावना के खिलाफ कार्य कर रहा है और समाज में वैचारिक विभाजन पैदा कर रहा है।


“आरएसएस दुनिया का सबसे गुप्त संगठन” – प्रियांक खरगे

पत्रकारों से बातचीत में प्रियांक खरगे ने कहा,

“आरएसएस दुनिया का सबसे गुप्त संगठन है। यह न रजिस्टर्ड है, न पारदर्शी। फिर भी इसे हर साल 300 से 400 करोड़ रुपये मिलते हैं — आखिर ये पैसा कहां से आता है? कौन देता है? क्या इनकी कोई ऑडिट रिपोर्ट है?”

उन्होंने आगे कहा कि अगर आरएसएस खुद को एक सामाजिक या सांस्कृतिक संगठन कहता है, तो उसे अपने दस्तावेज़ और फंडिंग स्रोत सार्वजनिक करने चाहिए।
खरगे ने सवाल उठाया कि संघ का प्रमुख इतना सुरक्षा घिरा लेकर क्यों चलता है — अगर यह संगठन केवल समाजसेवा करता है तो उसे इतनी सुरक्षा की आवश्यकता क्यों पड़ती है?


“भाजपा आरएसएस की कठपुतली” – कांग्रेस नेता का तीखा बयान

प्रियांक खरगे ने भाजपा और आरएसएस के रिश्ते पर भी सीधा वार किया।
उनका कहना था कि भाजपा (BJP), आरएसएस (RSS) की “कठपुतली” बनकर रह गई है।

“अगर आरएसएस नहीं रहेगा तो भाजपा भी खत्म हो जाएगी। भाजपा की नीतियां और निर्णय संघ के निर्देशों पर आधारित हैं, न कि जनता की जरूरतों पर,”
खरगे ने कहा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे हिंदू धर्म या धार्मिक परंपराओं के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि आरएसएस की विचारधारा के विरोध में हैं, जो उनके अनुसार समानता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को कमजोर करती है।

“संविधान हमें समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे की शिक्षा देता है। लेकिन आरएसएस ‘मनुस्मृति’ की सोच को आगे बढ़ा रहा है, जो असमानता और भेदभाव को जन्म देती है,”
उन्होंने कहा।


सरकारी संस्थानों में आरएसएस की गतिविधियों पर रोक की मांग

खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे अपने पत्र में कहा है कि सरकारी स्कूलों और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में आरएसएस से जुड़ी शाखाएं चल रही हैं, जहाँ बच्चों को भड़काऊ बातें सिखाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह संविधान की भावना के खिलाफ है और इससे समाज में नफरत का माहौल पैदा होता है।

“राज्य सरकार को ऐसे संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए जो सरकारी संस्थानों का दुरुपयोग करके अपने वैचारिक एजेंडे को फैलाने की कोशिश कर रहे हैं,”
खरगे ने लिखा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी स्कूल या कॉलेज में धार्मिक या राजनीतिक विचारधारा थोपने की अनुमति न दी जाए।


“आरएसएस के लाठी मार्च से युवाओं में गलत संदेश”

प्रियांक खरगे ने आरएसएस के लाठी मार्च और सार्वजनिक रैलियों को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि बिना पुलिस की अनुमति के हथियारनुमा डंडों के साथ सार्वजनिक प्रदर्शन करना बच्चों और युवाओं के मन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

“जब बच्चे या किशोर किसी संगठन के लोगों को हथियारों के साथ सड़कों पर मार्च करते देखते हैं, तो उनके मन में डर और असुरक्षा पैदा होती है। लोकतंत्र में ऐसी गतिविधियाँ स्वीकार्य नहीं हो सकतीं,”
उन्होंने कहा।


संविधान के खिलाफ विचारधारा का आरोप

प्रियांक खरगे का कहना है कि आरएसएस की विचारधारा भारतीय संविधान की मूल भावना — धर्मनिरपेक्षता और समानता — के विरोध में है।
उन्होंने कहा कि संविधान हमें यह अधिकार देता है कि अगर कोई संस्था नफरत फैलाने या समाज को बांटने का काम करती है, तो सरकार उसे रोकने के लिए कदम उठाए।

“हमारा संविधान सभी धर्मों और समुदायों को समान सम्मान देता है। लेकिन कुछ ताकतें धर्म के नाम पर समाज को बांट रही हैं। अब समय आ गया है कि राज्य और केंद्र सरकार ऐसी संस्थाओं की जवाबदेही तय करें,”
खरगे ने कहा।


भाजपा ने कहा – “खरगे का बयान राजनीति से प्रेरित”

दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने प्रियांक खरगे के बयान को राजनीति से प्रेरित बताया है।
पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाने के लिए आरएसएस और भाजपा पर आरोप लगाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
हालाँकि, प्रियांक खरगे ने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी धर्म को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करना है।


कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार आने के बाद से आरएसएस और भाजपा के बीच लगातार वैचारिक टकराव बढ़ा है।
प्रियांक खरगे के हालिया बयान ने इस विवाद को और तीखा बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब आरएसएस की विचारधारा को चुनौती देकर राज्य की राजनीति में अपनी “धर्मनिरपेक्ष पहचान” को और मजबूत करना चाहती है।


निष्कर्ष: राजनीतिक संग्राम का नया दौर

प्रियांक खरगे के बयान ने कर्नाटक में भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक जंग को नई दिशा दे दी है।
जहाँ एक ओर कांग्रेस आरएसएस की पारदर्शिता और संविधानिक वैधता पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इसे “राजनीतिक हथकंडा” बताकर खारिज कर रही है।
इस विवाद ने न सिर्फ राज्य की राजनीति में बहस को तेज कर दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में राजनीति और धर्म के बीच की रेखा अब और धुंधली होती जा रही है।

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